Jharkhand News: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू इलाके में हाई वोल्टेज बिजली के तार अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। पतरातू-रांची मुख्य मार्ग पर बावंधारा से पतरातू लेक रिसोर्ट तक सड़क के किनारे लगे घने पेड़ों की डालियां सीधे 33,000 वोल्ट और 11,000 वोल्ट के तारों में उलझ रही हैं। हल्की हवा चलते ही या बारिश होने पर तार आपस में टकराते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट हो जाता है और पूरे इलाके में बिजली गुल हो जाती है।
इस समस्या से पीटीपीएस कॉलोनी, कटिया, कोतो बस्ती और आसपास के कई गांवों के लोग रोजाना परेशान हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में बिजली कटने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। छोटे दुकानदारों का काम ठप पड़ रहा है, छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है और घरों में जरूरी काम भी रुक रहे हैं।
बार-बार बिजली कटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त
स्थानीय निवासी बताते हैं कि जैसे ही तेज हवा चलती है या हल्की बारिश शुरू होती है, तुरंत बिजली चली जाती है। कई बार तो रात भर अंधेरा छाया रहता है। गर्मी में पंखे और कूलर बंद होने से खासकर बुजुर्गों और बच्चों को काफी तकलीफ हो रही है।
एक स्थानीय रहने वाले ने बताया, हर दूसरे-तीसरे दिन बिजली जाती है। कभी-कभी तो पूरे दिन नहीं आती। हम लोग बिजली विभाग को बार-बार फोन करते हैं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
इस अनियमित बिजली आपूर्ति से इलाके के छोटे व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं। मोबाइल रिचार्ज, किराना दुकान और अन्य छोटे काम करने वाले लोग रोजाना नुकसान उठा रहे हैं।
Jharkhand News: मौसम बदलते ही बढ़ जाती है समस्या

पतरातू में बरसात का मौसम शुरू होते ही यह समस्या और गंभीर हो जाती है। पेड़ों की बढ़ी हुई डालियां हवा में हिलती हैं और हाई वोल्टेज तारों से टकराती हैं। इससे फॉल्ट हो जाता है और बिजली विभाग के कर्मचारियों को बार-बार लाइन सुधारने के लिए मैदान में उतरना पड़ता है।
लाइनमैनों की स्थिति भी कठिन हो गई है। घने पेड़ों और झाड़ियों के बीच तारों में खराबी का सटीक स्थान ढूंढना मुश्किल हो रहा है। कई बार घंटों की मेहनत के बाद भी फॉल्ट ठीक नहीं हो पाता, जिससे बिजली बहाल करने में देरी होती है।
Jharkhand News: हादसे का खतरा भी मंडरा रहा
यह समस्या सिर्फ बिजली कटने तक सीमित नहीं है। हाई वोल्टेज तारों का पेड़ों से लगातार संपर्क रहना बड़ा हादसा होने का कारण बन सकता है। बारिश के दौरान तारों से करंट फैलने की आशंका बढ़ जाती है, जो किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
खासकर सड़क किनारे रहने वाले लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति खतरनाक है। अगर तार टूटकर नीचे गिर गए तो कोई भी बड़ा नुकसान हो सकता है। स्थानीय लोग अब इस खतरे को लेकर भी चिंतित हैं।
बिजली विभाग पर लगे लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों ने कई बार बिजली विभाग को इस समस्या की शिकायत की है। उन्होंने पेड़ों की नियमित छंटाई और तारों को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट करने की मांग की है। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
लोग कहते हैं कि अगर समय रहते पेड़ों की डालियां काट दी जाएं और तारों को सही जगह पर व्यवस्थित किया जाए तो यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
पतरातू की भौगोलिक स्थिति और समस्या की वजह
पतरातू इलाका घने जंगलों और हरियाली से भरा हुआ है। यहां सड़क किनारे पुराने और बड़े पेड़ हैं जो बिजली लाइनों के बहुत करीब हैं। समय के साथ पेड़ बढ़ते गए लेकिन तारों की ऊंचाई या रूट नहीं बदला गया। नतीजा यह है कि आज ये तार पेड़ों की डालियों में फंसकर समस्या बन गए हैं।
33,000 वोल्ट के मुख्य ट्रांसमिशन लाइन और 11,000 वोल्ट की लोकल लाइन दोनों ही प्रभावित हो रही हैं। इससे पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाकों में नियमित रूप से पेड़ों की छंटाई जरूरी होती है, जो यहां नहीं हो रही है।
लोगों की मांग और समाधान के उपाय
स्थानीय निवासी अब इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं। उनकी मुख्य मांग है कि बिजली विभाग पेड़ों की छंटाई कराए और जहां जरूरी हो वहां तारों को ऊंचा या दूसरी तरफ शिफ्ट करे।
कुछ लोग सुझाव दे रहे हैं कि अगर संभव हो तो इन लाइनों को अंडरग्राउंड कर दिया जाए, हालांकि यह महंगा विकल्प है। फिलहाल सबसे आसान और जरूरी काम पेड़ों की नियमित ट्रिमिंग और तारों की सफाई है।
बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा असर
बार-बार फॉल्ट होने से बिजली विभाग के संसाधनों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कर्मचारियों को बार-बार मैदान में जाना पड़ रहा है, जिससे अन्य क्षेत्रों की मेंटेनेंस में देरी हो रही है। अगर समस्या को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो पूरे रामगढ़ जिले की बिजली व्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
क्या कहते हैं स्थानीय नेता और अधिकारी
पतरातू के कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से बात की और जल्द समाधान का आश्वासन लिया है। लेकिन लोग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
बिजली विभाग के एक अधिकारी ने अनौपचारिक रूप से बताया कि पेड़ों की छंटाई का काम जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौसम की स्थिति देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर यह काम पूरा किया जाएगा।
पतरातू में यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है लेकिन इस साल गर्मी और आने वाली बारिश ने इसे और गंभीर बना दिया है। अगर विभाग ने समय पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
स्थानीय लोग अब प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और पतरातू की बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।
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