Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य की CID (अपराध अनुसंधान विभाग) के खोजी कुत्तों के लिए एक अनोखा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब इन कुत्तों को उच्च गुणवत्ता वाला विदेशी ब्रांड का पैक्ड भोजन दिया जाएगा। इसका मकसद इन कुत्तों की शारीरिक ताकत बढ़ाना और उनकी सूंघने की क्षमता को और बेहतर बनाना है, ताकि वे अपराध जांच, विस्फोटक खोज और नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहतर तरीके से काम कर सकें।
यह फैसला राज्य में पहली बार लिया गया है। CID के श्वान दस्ते को फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और स्पेन जैसे देशों के प्रीमियम डॉग फूड दिए जाएंगे। 6 अप्रैल 2026 को जारी एक सरकारी पत्र के अनुसार, इन कुत्तों को रॉयल कैनिन मैक्सी और डायबेक सेंस जैसे स्पेशल फूड खिलाए जाएंगे। इन फूड में ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो कुत्तों की ऊर्जा, मसल्स और नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला
झारखंड पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि खोजी कुत्ते पुलिस की जांच में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये कुत्ते विस्फोटक, ड्रग्स, लाश और अपराधियों के निशान सूंघकर पता लगाते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाने, चोरी-डकैती और हत्या के मामलों को सुलझाने में इनकी मदद अहम होती है।
अगर कुत्तों को सही और संतुलित आहार नहीं मिलता तो उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। बेहतर पोषण से उनकी ताकत बढ़ेगी, वे ज्यादा देर तक काम कर सकेंगे और सूंघने की क्षमता भी तेज होगी। पशु विशेषज्ञों का मानना है कि सही खाना कुत्तों के नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है, जिससे वे फोकस के साथ काम करते हैं।
किन ब्रांड्स का फूड दिया जाएगा

CID ने खास तौर पर विदेशी ब्रांड चुने हैं। इनमें रॉयल कैनिन का मैक्सी फॉर्मूला और डायबेक सेंस जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। ये फूड कुत्तों की उम्र, नस्ल और काम के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं। इनमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और खास तरह के फाइबर होते हैं जो कुत्तों की सेहत को अच्छा रखते हैं।
राज्य में पहली बार ऐसा हो रहा है कि खोजी कुत्तों के लिए आयातित उच्च गुणवत्ता वाला भोजन खरीदा जा रहा है। इससे पहले सामान्य या लोकल फूड ही इस्तेमाल होता था। नई व्यवस्था से कुत्तों की परफॉर्मेंस में सुधार आने की उम्मीद है।
प्रतिदिन कितना खर्च, सालाना बजट कितना
एक खोजी कुत्ते पर प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये खर्च होने का अनुमान है। अगर साल भर का हिसाब करें तो एक कुत्ते पर करीब 1.44 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। यह राशि झारखंड की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय से भी ज्यादा है।
विभाग का कहना है कि यह खर्च जरूरी है क्योंकि ये कुत्ते पुलिस की टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बेहतर भोजन से उनकी उम्र भी बढ़ सकती है और वे लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। फिलहाल CID के पास 58 प्रशिक्षित खोजी कुत्ते हैं। इनमें ज्यादातर बेल्जियम शेफर्ड और लैब्राडोर नस्ल के हैं। ये दोनों नस्लें ट्रैकिंग और स्निफिंग के काम के लिए बहुत मशहूर हैं।
खोजी कुत्तों की भूमिका और चुनौतियां
झारखंड में नक्सल समस्या अभी भी कुछ इलाकों में बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में खोजी कुत्ते पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ जाते हैं। वे आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) और छिपे हुए हथियारों को सूंघकर पता लगाते हैं। शहरों में चोरी, हत्या या लापता व्यक्तियों के मामलों में भी इनकी मदद ली जाती है।
इन कुत्तों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। वे घंटों तक सूंघते रह सकते हैं लेकिन सही खाना न मिलने से उनकी स्टैमिना कम हो जाती है। नया फूड इस समस्या को दूर करने में मदद करेगा। कुत्तों के हैंडलर भी कहते हैं कि अच्छा आहार मिलने से कुत्ते ज्यादा उत्साही और एक्टिव रहते हैं।
पशु विशेषज्ञ क्या कहते हैं
संतुलित और पौष्टिक आहार कुत्तों को अतिरिक्त ऊर्जा देता है। इससे उनका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और वे थकान कम महसूस करते हैं। खासकर काम करने वाले कुत्तों के लिए प्रोटीन और फैट की सही मात्रा बहुत जरूरी है। विदेशी ब्रांड्स में ये चीजें वैज्ञानिक तरीके से बैलेंस की गई हैं। लैब्राडोर और बेल्जियम शेफर्ड जैसी नस्लें बहुत एक्टिव होती हैं। इन्हें रोजाना सही कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स की जरूरत पड़ती है। अगर आहार ठीक नहीं रहा तो उनकी सूंघने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जो पुलिस काम के लिए नुकसानदायक है।
CID की तैयारी और भविष्य की योजना
झारखंड पुलिस ने इस भोजन की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह व्यवस्था की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि सभी 58 कुत्तों को नियमित रूप से यह प्रीमियम फूड उपलब्ध कराया जाए।
भविष्य में और ज्यादा कुत्तों को शामिल करने की भी योजना है। पुलिस महकमा श्वान दस्ते को और मजबूत बनाने पर जोर दे रहा है। अच्छे भोजन के साथ-साथ कुत्तों की ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और रहन-सहन की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया और चर्चा
इस फैसले पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कुछ लोग इसे सराहनीय बता रहे हैं और कह रहे हैं कि कुत्ते भी पुलिस का हिस्सा हैं, इसलिए उनकी देखभाल जरूरी है। वहीं कुछ लोग खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि जब इंसानों की कई जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं तो कुत्तों पर इतना खर्च क्यों।
पुलिस अधिकारी इन सवालों का जवाब देते हुए कहते हैं कि खोजी कुत्ते कई जानें बचा चुके हैं। नक्सल क्षेत्रों में उनका योगदान अमूल्य है। बेहतर सुविधाएं देने से उनका प्रदर्शन सुधरेगा, जिससे अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।
कुत्तों की देखभाल में नई शुरुआत
यह फैसला झारखंड पुलिस के लिए एक नई शुरुआत है। पहले कुत्तों को सामान्य चावल, दाल या लोकल फूड दिया जाता था। अब विदेशी प्रीमियम फूड से उनकी डाइट को अपग्रेड किया जा रहा है। इससे कुत्तों की सेहत बेहतर रहेगी और वे लंबे समय तक पुलिस की सेवा कर सकेंगे।
झारखंड जैसे राज्य में जहां सुरक्षा चुनौतियां हैं, वहां कुत्तों की भूमिका और बढ़ गई है। सरकार का यह कदम दिखाता है कि पुलिस महकमा अपने हर संसाधन को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रहा है।
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो दूसरे राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था अपनाई जा सकती है। फिलहाल CID के खोजी कुत्ते बेहतर भोजन का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और झारखंड में अपराध जांच और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनेगी।
पुलिस विभाग अब नियमित रूप से इन कुत्तों की स्वास्थ्य रिपोर्ट भी रखेगा ताकि फूड का असर सही से मॉनिटर किया जा सके। कुल मिलाकर यह कदम खोजी कुत्तों की मेहनत को सम्मान देने जैसा है, जो पुलिस की टीम का अहम हिस्सा हैं।
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