Jharkhand News: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद सुर्खियों में है। बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में जो बातें कहीं, उसने राज्य की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाया है।
गुरुवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करके मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सीएम के विधानसभा में दिए गए बयान को न सिर्फ आपत्तिजनक और निंदनीय बताया बल्कि यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री को कतई शोभा नहीं देता।
आदित्य साहू ने क्या कहा? जानें पूरा बयान
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने अपने बयान में कहा कि बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस तरह हिंदू देवी-देवताओं का मजाक बनाया और हिंदू पूजा पद्धतियों का उपहास उड़ाया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या संप्रदाय की पूजा पद्धति और मान्यताओं का मजाक उड़ाना किसी सत्ताधारी नेता को बिल्कुल भी शोभा नहीं देता।
साहू ने यह भी कहा कि भारत हजारों साल पुरानी सनातन संस्कृति का देश है। यह साधु-संतों, मठ-मंदिरों और यज्ञ-हवन की परंपरा वाला देश है। गुलामी के दौर में भी राष्ट्रविरोधी ताकतें इस संस्कृति को मिटा नहीं सकीं। लेकिन आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इस काम की जिम्मेदारी खुद उठा ली है।
राहुल गांधी के नक्शेकदम पर चल रहे हेमंत’
आदित्य साहू ने अपने बयान में एक बड़ा और सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रास्ते पर चलते दिख रहे हैं।
साहू ने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ा और त्रिशूल जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों को विवाद में घसीटा। उनका कहना है कि अब हेमंत सोरेन भी उसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। साहू के मुताबिक यह सब तुष्टिकरण की उस राजनीति का नतीजा है जिसमें वोट बैंक को खुश करने के लिए बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जाती है।
खुद पूजा करते हैं, लेकिन वोट के लिए बदल जाती है भाषा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दोहरे चरित्र का आरोप भी लगाया। साहू ने कहा कि हेमंत सोरेन खुद अपने परिवार के साथ समय-समय पर पूजा-पाठ करते हैं। वे मंदिरों में जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। लेकिन जैसे ही वोट बैंक और सत्ता बचाने की बात आती है, उनकी भाषा और रवैया दोनों बदल जाते हैं।
साहू ने तीखे अंदाज में कहा कि अगर सीएम को हिंदू धर्म की मान्यताओं पर इस तरह की टिप्पणी करने में कोई समस्या नहीं है, तो उन्हें किसी दूसरे धर्म की पूजा पद्धतियों और मान्यताओं पर भी उसी तरह से बोलकर दिखाना चाहिए। उनका यह बयान सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि सिर्फ हिंदू धर्म को ही निशाना क्यों बनाया जाता है।
रामनवमी, मूर्ति और डीजे, पुराने फैसलों पर भी उठाए सवाल
आदित्य साहू ने सिर्फ ताजा बयान तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने हेमंत सरकार के कुछ पुराने फैसलों को भी इस विवाद से जोड़ा और कहा कि इन फैसलों से सरकार की हिंदू विरोधी सोच पहले से ही जाहिर होती रही है।
साहू ने कहा कि कभी मूर्तियों का आकार छोटा करने का आदेश दिया गया, कभी रामनवमी के झंडे छोटे करने की बात हुई और कभी धार्मिक आयोजनों में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई। उनके मुताबिक इन सभी फैसलों ने मिलकर यह साबित कर दिया है कि हेमंत सरकार हिंदू त्योहारों और धार्मिक परंपराओं को लेकर कैसी सोच रखती है।
बाबूलाल मरांडी और अन्य भाजपा नेता भी हुए हमलावर
यह सिर्फ आदित्य साहू की अकेले की प्रतिक्रिया नहीं है। झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। इन नेताओं ने विधानसभा में हेमंत के बयान को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
भाजपा ने इस मामले को सोशल मीडिया पर भी जोर-शोर से उठाया है। झारखंड भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कई पोस्ट किए गए हैं जो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
JMM समर्थकों का पलटवार निरर्थक मुद्दा
दूसरी तरफ, JMM और सरकार के समर्थकों ने भाजपा के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। JMM समर्थकों का कहना है कि भाजपा बेकार के मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि हेमंत सोरेन झारखंड के विकास में लगातार काम कर रहे हैं और राज्य में कई बड़े विकास कार्य हो रहे हैं। इन समर्थकों के मुताबिक विपक्ष के पास राज्य सरकार की कार्यशैली पर कोई ठोस सवाल नहीं है, इसीलिए वे इस तरह के विवादों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।
झारखंड की राजनीति में नया मोड़
इस पूरे विवाद ने झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ भाजपा इसे हिंदू धर्म की भावनाओं से जोड़कर एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ JMM और उसके सहयोगी दल इसे बेबुनियाद विवाद बता रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला और बड़ा रूप लेता है या फिर धीरे-धीरे शांत हो जाता है। लेकिन फिलहाल झारखंड की सियासत में यह मुद्दा केंद्र में बना हुआ है और दोनों पक्षों की तरफ से तीखे बयान सामने आ रहे हैं।
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