Bihar Electricity Tariff 2026-27: अगर आप बिहार में रहते हैं और हर महीने बिजली का बिल भरते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद राहत देने वाली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार में बिजली की दरें नहीं बढ़ेंगी। यानी अगले साल भी आप उतने ही पैसों में बिजली का इस्तेमाल करते रहेंगे जितने में अभी कर रहे हैं।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग यानी BERC ने यह बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने राज्य की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम्स के उस प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है जिसमें सभी श्रेणियों में 35 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ बढ़ाने की मांग की गई थी। इस फैसले से राज्य के करीब 2.22 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
किसने लिया यह फैसला और कब से होगा लागू?
यह टैरिफ आदेश आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस पीठ में सदस्य परशुराम सिंह यादव और अरुण कुमार सिन्हा भी शामिल थे। तीनों ने मिलकर डिस्कॉम्स के प्रस्तावों की गहराई से जांच की और अंत में उपभोक्ताओं के हित में यह फैसला सुनाया।
नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और अगले आदेश तक यही दरें लागू रहेंगी। आयोग ने साफ कहा कि उपभोक्ताओं पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा, इसीलिए टैरिफ को जस का तस रखा गया है।
क्यों नहीं बढ़ाई गई बिजली की दरें?
यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर आयोग ने टैरिफ बढ़ाने से मना क्यों किया? इसका जवाब है दोनों बिजली वितरण कंपनियों के खातों में राजस्व अधिशेष यानी Revenue Surplus दर्ज किया गया।
आयोग ने उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी NBPDCL के लिए 16,555.69 करोड़ रुपये का ARR और दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी SBPDCL के लिए 18,908.97 करोड़ रुपये का ARR मंजूर किया। ARR यानी Aggregate Revenue Requirement वह रकम होती है जो बिजली कंपनियों को अपना काम चलाने के लिए चाहिए होती है। चूंकि दोनों कंपनियों के पास जरूरत से ज्यादा राजस्व आ रहा है, इसलिए टैरिफ बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं थी।
स्लैब मर्ज होने से 27 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
सिर्फ टैरिफ न बढ़ाना ही नहीं, आयोग ने इस बार एक और बड़ा और फायदेमंद बदलाव किया है। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं (DS-II), ग्रामीण वाणिज्यिक उपभोक्ताओं (NDS-I) और शहरी वाणिज्यिक उपभोक्ताओं (NDS-II) के लिए दो अलग-अलग स्लैब को मिलाकर एक स्लैब बना दिया गया है।
इस फैसले से शहरों में घर चलाने वाले उपभोक्ताओं को 1.53 रुपये प्रति यूनिट तक की राहत मिलेगी। गांवों में दुकान या छोटा कारोबार चलाने वाले ग्रामीण वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 0.42 रुपये प्रति यूनिट की बचत होगी। वहीं शहरों में छोटे-मोटे व्यापार करने वाले लोगों को 1.20 रुपये प्रति यूनिट की राहत मिलेगी। इस बदलाव से करीब 27 लाख उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा। साथ ही बिलिंग प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और साफ-सुथरी हो जाएगी।
किसानों को भी मिली खुशखबरी, मशरूम की खेती हुई सस्ती
इस बार के टैरिफ आदेश में किसानों के लिए भी एक अहम फैसला लिया गया है। आयोग ने मशरूम की खेती को कृषि श्रेणी यानी IAS में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इसका मतलब यह है कि अब मशरूम उगाने वाले किसानों को कृषि वाली दरों पर बिजली मिलेगी, जो आम दरों के मुकाबले काफी कम होती है। इससे उनकी उत्पादन लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि मशरूम की प्रोसेसिंग या मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े काम इस कृषि श्रेणी में नहीं आएंगे।
छोटे व्यापारियों को भी मिली बड़ी राहत
बिहार का एक बड़ा तबका छोटे-मोटे व्यापार से अपनी रोजी-रोटी चलाता है। इन लोगों को अक्सर बिजली के फिक्स्ड चार्ज की वजह से अतिरिक्त परेशानी होती थी। इस बार आयोग ने इसमें भी कटौती की है।
NDS-II श्रेणी में 0.5 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए फिक्स्ड चार्ज 200 रुपये प्रति माह से घटाकर 150 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसी तरह LTIS-I श्रेणी के लिए यह चार्ज 288 रुपये से घटाकर 278 रुपये प्रति KVA और LTIS-II के लिए 360 रुपये से घटाकर 350 रुपये प्रति KVA कर दिया गया है। भले ही यह कटौती छोटी लगे, लेकिन हर महीने होने वाली इस बचत का असर साल भर में काफी बड़ा हो जाता है।
वितरण हानि को लेकर भी तय हुए लक्ष्य
आयोग ने इस बार दोनों बिजली वितरण कंपनियों के लिए वितरण हानि यानी Distribution Loss के लक्ष्य भी तय कर दिए हैं। NBPDCL के लिए यह लक्ष्य 11.97 फीसदी और SBPDCL के लिए 15.91 फीसदी रखा गया है। वितरण हानि कम करने का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है क्योंकि जितनी कम बिजली बर्बाद होगी, उतना ही बिजली कंपनियों का खर्च कम होगा और टैरिफ पर दबाव भी घटेगा।
सरकारी सब्सिडी का भी मिलेगा अलग से फायदा
यहां यह जानना भी जरूरी है कि आयोग द्वारा तय किए गए इस टैरिफ में राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी शामिल नहीं है। बिहार सरकार जल्द ही 2026-27 के लिए अपनी सब्सिडी का एलान कर सकती है।
अभी ‘मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना’ के तहत राज्य के 1.86 करोड़ उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट बिजली मुफ्त मिल रही है। इस योजना की वजह से शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 550 रुपये की बचत हो रही है जबकि गांवों में रहने वाले लोगों को हर महीने करीब 306 रुपये की बचत हो रही है।
कुल मिलाकर क्या समझें?
बिहार सरकार और BERC के इस फैसले को मिलाकर देखें तो यह साफ है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में बिहार के आम आदमी को बिजली के मामले में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। टैरिफ स्थिर रखना, स्लैब मर्ज करना, फिक्स्ड चार्ज घटाना और मशरूम किसानों को कृषि दर पर बिजली देना ये सभी फैसले मिलकर राज्य के करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनते हैं।
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