Kishanganj Medical College: बिहार के सबसे पिछड़े और दूरदराज के जिलों में गिने जाने वाले किशनगंज के लोगों के लिए एक उम्मीद भरी खबर आई है। यहाँ एक सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाने की योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुँचती दिख रही है। जिला प्रशासन ने ठाकुरगंज के कृषि मैदान के पास की जमीन को इस कॉलेज के लिए सबसे उपयुक्त मानते हुए उसका चयन कर लिया है और संबंधित प्राधिकरण को प्रस्ताव भेज दिया है।
हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव को ऊपर से हरी झंडी नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि यह मेडिकल कॉलेज जल्द हकीकत बन सकता है। इलाके के लोग वर्षों से इस मांग को उठाते आ रहे हैं और अब लगता है कि उनकी यह माँग जल्द पूरी होने वाली है।
बिहार सरकार ने दी थी 20 नए मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी

यह पूरा मामला बिहार सरकार की उस बड़ी योजना का हिस्सा है जिसमें राज्य के 20 जिलों में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की मंजूरी दी गई थी। बिहार मंत्रिपरिषद के इस फैसले के बाद बिहार स्टेट हेल्थ सोसाइटी और संबंधित एजेंसी BSASICS यानी बिहार स्टेट एजुकेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ने सभी जिला अधिकारियों को पत्र लिखा था।
इस पत्र में कहा गया था कि राज्य में अभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं और सरकार ने 20 और नए मेडिकल कॉलेज खोलने की स्वीकृति दी है। इसके लिए सभी जिलों से उचित जमीन का चयन करके प्रस्ताव माँगा गया था। किशनगंज जिले से ठाकुरगंज की जमीन का प्रस्ताव भेजा गया है।
ठाकुरगंज को क्यों चुना गया? जानें वजह
किशनगंज जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए ठाकुरगंज को चुने जाने के पीछे कई अहम वजहें हैं। सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह है इसकी भौगोलिक स्थिति। ठाकुरगंज राष्ट्रीय राजमार्ग यानी NH के बेहद करीब है।
NH के पास होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी भी आपातकाल या दुर्घटना की स्थिति में मरीज को जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुँचाया जा सकेगा। जब मेडिकल कॉलेज के साथ एक बड़ा अस्पताल भी खुलेगा, तो NH से सटे होने की वजह से दूर-दूर से आने वाले मरीजों को भी सुविधा होगी।
इसके अलावा ठाकुरगंज की भौगोलिक स्थिति इसलिए भी खास है क्योंकि यह कई प्रखंडों के बीच में पड़ता है। यहाँ मेडिकल कॉलेज खुलने से किशनगंज के कई प्रखंडों के लोगों को एक ही जगह पर अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
CM नीतीश के दौरे पर थी उम्मीद, लेकिन हुई निराशा
11 मार्च 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठाकुरगंज पहुँचे थे। जैसे ही यह खबर फैली कि सीएम ठाकुरगंज आ रहे हैं, स्थानीय लोगों में एक नई उम्मीद जाग उठी। लोगों को लग रहा था कि मुख्यमंत्री इस दौरे पर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास कर देंगे और सालों की माँग पूरी हो जाएगी।
लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। सभा के दौरान शिलान्यास नहीं हुआ और लोगों में निराशा छा गई। सभा के दौरान भीड़ में से मेडिकल कॉलेज ठाकुरगंज में बनाने की माँग को लेकर जोरदार नारेबाजी भी हुई। यह नारेबाजी इस बात का सबूत था कि इलाके के लोग इस मेडिकल कॉलेज को लेकर कितने गंभीर और उत्सुक हैं।
विधायक और गृहमंत्री ने किया ठाकुरगंज का समर्थन
सीएम की सभा में स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने अपने भाषण में कई मांगों के साथ ठाकुरगंज में ही मेडिकल कॉलेज खोलने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खुलने से आसपास के कई प्रखंडों के लोगों को सीधा फायदा होगा जो अभी इलाज के लिए दूर-दूर तक भटकते हैं।
सबसे अहम बात यह रही कि बिहार के गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपने भाषण में साफ कहा कि ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा। गृहमंत्री के मुँह से यह बात सुनकर लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी। हालांकि उसी दिन शिलान्यास न होने से लोग थोड़े निराश भी हुए, लेकिन गृहमंत्री के बयान ने यह भरोसा जरूर दिलाया कि यह कॉलेज बनकर रहेगा।
पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लोगों को भी मिलेगा फायदा
भाजपा के जिला प्रवक्ता कौशल किशोर यादव ने इस मामले पर विस्तार से बताया। उनके मुताबिक ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज खुलने से सिर्फ किशनगंज के लोगों को ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लोगों को भी बड़ा फायदा होगा।
दरअसल ठाकुरगंज बंगाल की सीमा के काफी करीब है। अभी इस इलाके के लोगों को किसी गंभीर बीमारी में इलाज के लिए पटना या सिलीगुड़ी जैसे दूर के शहरों तक जाना पड़ता है जिसमें काफी समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं। ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बन जाने से यह दूरी और खर्च दोनों कम हो जाएंगे।
कौशल किशोर यादव ने यह भी कहा कि जिस जमीन का चयन किया गया है वह राष्ट्रीय राजमार्ग के बहुत नजदीक है जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बहुत जल्दी अस्पताल तक पहुँचाया जा सकेगा। उन्होंने माँग की कि सरकार जल्द से जल्द इस मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करे।
अन्य विधायकों ने भी उठाई थी यह माँग
यह पहली बार नहीं है जब किशनगंज में मेडिकल कॉलेज की माँग उठी हो। इससे पहले भी स्थानीय विधायक सरवर आलम और तौसीफ आलम ने अपने-अपने इलाके में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए सरकार को पत्र लिखे थे। यह इस बात का संकेत है कि पूरे किशनगंज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कितनी जरूरत है और यहाँ के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं।
अब इंतजार है सरकारी मंजूरी का
फिलहाल सारी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को ऊपर से कब मंजूरी मिलती है। प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जमीन का चयन हो चुका है, जनप्रतिनिधियों का समर्थन है और गृहमंत्री का बयान भी आ चुका है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही किशनगंज के ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज की नींव रखी जाएगी और इस पिछड़े इलाके के लोगों को घर के पास ही अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
किशनगंज के लोग लंबे समय से इस सुविधा के लिए इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सरकार कब इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है और कब यह सपना हकीकत बनता है।
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