Top 5 This Week

Related Posts

Jharkhand News: झारखंड के दुमका में शर्मनाक मामला, महिला शिक्षिका के आरोप सही, विभाग सख्त कार्रवाई के मूड में

Jharkhand News: झारखंड के दुमका जिले से एक बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। जरमुंडी प्रखंड के एक सरकारी विद्यालय में तैनात एक पारा शिक्षिका ने अपने ही स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक ब्रजेश कुमार पत्रलेख पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिक्षिका ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई और न्याय की गुहार लगाई। मामले की जांच हुई और जांच में शिक्षिका के लगाए गए आरोप सही पाए गए। अब इस मामले ने पूरे जिले में एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि जहाँ बच्चों को पढ़ाया जाता है, उसी स्थान पर अगर एक महिला शिक्षक सुरक्षित नहीं है तो यह समाज के लिए कितनी बड़ी चिंता की बात है।

Jharkhand News: शिक्षिका ने क्या-क्या आरोप लगाए?

शिक्षिका ने विभाग को दिए अपने लिखित आवेदन में कई गंभीर और चिंताजनक आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में काम के दौरान प्रधानाध्यापक उनके साथ अनुचित व्यवहार करते हैं। स्कूल परिसर में चलते-फिरते समय वे जानबूझकर उनसे टकराते हैं और बैड टच यानी अनुचित स्पर्श करते हैं।

इतना ही नहीं, शिक्षिका ने यह भी बताया कि महिला कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित हर महीने दो दिनों के विशेष आकस्मिक अवकाश को भी प्रधानाध्यापक स्वीकृत करने में आनाकानी करते हैं। इस विशेष अवकाश के लिए भी वे सबूत माँगते हैं जो पूरी तरह गलत और नियमों के खिलाफ है।

शिक्षिका के मुताबिक प्रधानाध्यापक इस विशेष अवकाश को लेकर उन पर गलत तरीके से दबाव बनाने की कोशिश भी करते हैं। जब शिक्षिका इस सब का विरोध करती हैं तो वे झगड़ा करते हैं और उनका मासिक मानदेय रोकने की धमकी भी देते हैं। इन सब बातों की वजह से शिक्षिका मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई हैं।

जांच में आरोप सही पाए गए, अब कार्रवाई का इंतजार

शिक्षिका की शिकायत मिलने के बाद प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने इस मामले की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह पुष्टि हुई कि शिक्षिका द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं। यह एक बेहद गंभीर बात है क्योंकि अब यह मामला सिर्फ एक शिकायत नहीं रहा बल्कि एक जांच में साबित हुई सच्चाई बन गया है।

जिला शिक्षा अधीक्षक को जांच रिपोर्ट भेजी गई है और उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ आश्वासन देना काफी है? जब आरोप जांच में सही पाए जा चुके हैं तो कार्रवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए।

Jharkhand News: महिला कर्मचारियों के अधिकारों का हो रहा उल्लंघन

इस पूरे मामले में एक और पहलू है जिस पर ध्यान देना जरूरी है। सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिनों का विशेष आकस्मिक अवकाश एक कारण से देने का प्रावधान किया है। यह उनका कानूनी अधिकार है।

लेकिन इस मामले में प्रधानाध्यापक इस अधिकार को भी रोकने की कोशिश कर रहे थे और उसके बदले में अनुचित माँगें रख रहे थे। यह न सिर्फ महिला के अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी नियमों की भी खुली अवहेलना है।

यह मामला यह भी दर्शाता है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए बने कानूनों और नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करवाना आज भी कितनी बड़ी चुनौती है। जब एक सरकारी स्कूल में एक शिक्षिका का यह हाल है तो निजी क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

POSH कानून क्या कहता है इस मामले में?

भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए POSH यानी Prevention of Sexual Harassment at Workplace Act 2013 बना हुआ है। इस कानून के तहत हर सरकारी और निजी संस्थान में एक आंतरिक शिकायत समिति यानी Internal Complaints Committee बनाना अनिवार्य है।

इस मामले में जो आरोप लगाए गए हैं वे POSH कानून के दायरे में आते हैं। शारीरिक संपर्क और उस पर अनुचित टिप्पणी, अनुचित व्यवहार और कार्यस्थल पर असहज माहौल बनाना, ये सभी यौन उत्पीड़न की परिभाषा में आते हैं। शिक्षा विभाग को इस मामले में POSH कानून के तहत भी जांच करानी चाहिए।

शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषी प्रधानाध्यापक के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई हो और शिक्षिका को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम करने का अधिकार मिले।

शिक्षा का मंदिर बना उत्पीड़न की जगह

यह मामला कई सवाल खड़े करता है। स्कूल वह जगह है जहाँ बच्चों को न सिर्फ पढ़ाई बल्कि अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य भी सिखाए जाते हैं। लेकिन जब उसी स्कूल का प्रधानाध्यापक ऐसी हरकतें करे तो वह बच्चों को क्या सिखाएगा?

पारा शिक्षक और पारा शिक्षिकाएं पहले से ही बेहद कम मानदेय पर काम करते हैं और उनकी नौकरी की सुरक्षा भी उतनी मजबूत नहीं होती। ऐसे में मानदेय रोकने की धमकी देकर उन्हें डराना और चुप कराने की कोशिश करना एक बेहद कायरतापूर्ण काम है। यह शिक्षिका इसलिए भी बहादुर हैं कि उन्होंने नौकरी जाने के डर के बावजूद आवाज उठाई और विभाग के सामने शिकायत की।

क्या माँग कर रही हैं शिक्षिका और क्या होना चाहिए?

शिक्षिका की माँग बिल्कुल सीधी और जायज है। वे चाहती हैं कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में काम करने का अवसर मिले। दोषी प्रधानाध्यापक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद अब देरी का कोई कारण नहीं है। जिला शिक्षा अधीक्षक और झारखंड शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे इस मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई करें। आरोपी प्रधानाध्यापक को तत्काल निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।

Read More Here:- 

Iran Attack 2026: Donald Trump का ईरान पर हमला, परमाणु नहीं, Bitcoin था असली टारगेट

Aaj Ka Rashifal 21 March 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद किन राशियों पर बरसेगा? पढ़ें सभी 12 राशियों का राशिफल

Chaitra Navratri 2026 Day 3: आज होगी मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें सही विधि, मंत्र और भोग, पूजा से मिलेगी हर शारीरिक और मानसिक परेशानी से मुक्ति

TMC Manifesto 2026: ममता बनर्जी की 10 प्रतिज्ञाएं और भवानीपुर पर खास फोकस

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles