Jharkhand Politics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोलियम पदार्थों और विदेशी वस्तुओं के उपयोग में कटौती करने की अपील की। इस अपील पर झारखंड के सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। दोनों दलों ने एक साथ केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छुपाने के लिए आम जनता को त्याग का उपदेश देने लगी है।
Jharkhand Politics: झामुमो ने बोला सीधा हमला
झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने इस मामले में खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चुनाव तक चुप्पी साधे रहे और अब जनता को पेट्रोल बचाने, सोना न खरीदने, विदेश यात्राएं रोकने, विदेशी सामान छोड़ने और घर से काम करने की सलाह दे रहे हैं।
विनोद पांडेय ने सवाल उठाया कि जो आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय संकट आज बताया जा रहा है, उसकी शुरुआत आज नहीं हुई। युद्ध और वैश्विक तनाव की स्थिति पहले से बनी हुई थी। तब प्रधानमंत्री ने देश से त्याग और कटौती की अपील क्यों नहीं की?
Jharkhand Politics: विदेश नीति पर भी उठाए सवाल
झामुमो नेता ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को भी विफल बताया। उन्होंने कहा कि जिन देशों को कभी भारत का सबसे भरोसेमंद मित्र बताया जाता था, वही देश आज भारत से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। सरकार अमेरिका के दबाव के सामने झुकती नजर आ रही है और इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा है।
विनोद पांडेय ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने विश्वगुरु, न्यू इंडिया और पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे बड़े-बड़े सपने दिखाए। लेकिन हकीकत यह है कि आज आम आदमी की कमर टूट चुकी है। महंगाई लगातार बढ़ रही है और बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है।
रुपया कमजोर, पेट्रोल पर भारी टैक्स
झामुमो महासचिव ने कहा कि रुपये की कीमत कमजोर हो रही है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता को निचोड़ा जा रहा है। आर्थिक नीति पहले ही आम लोगों को तोड़ चुकी थी और अब सरकार खुलकर जनता से त्याग मांग रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को घूमने से परहेज करने का ज्ञान दिया जा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री खुद यूरोप के दौरों पर निकल जाते हैं। अगर घर से काम और ऑनलाइन बैठक इतनी जरूरी और प्रभावी हैं, तो क्या सरकार खुद उसका पालन नहीं कर सकती?
झामुमो का मानना है कि देश को भाषण नहीं, जवाब चाहिए। जनता टैक्स भी दे, महंगाई भी सहे, बेरोजगारी भी झेले और अंत में उपदेश भी सुने यह लोकतंत्र नहीं बल्कि जनता के साथ अन्याय है।
कांग्रेस का भी तीखा तंज
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता चरम पर है। ऐसे में जनता को यह कहना कि सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ और खाने का तेल कम करो यह बेहद असंवेदनशील सोच को दर्शाता है।
राकेश सिन्हा ने सवाल किया कि देश की जनता आखिर कब तक हर आर्थिक विफलता की कीमत चुकाती रहेगी? क्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवार अपनी इच्छाओं, जरूरतों और जीवन स्तर को लगातार कम करते रहें, जबकि सरकार अपने प्रचार और बड़े-बड़े आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती रहे?
केंद्र सरकार ने क्यों की यह अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग में संयम बरतें। इसके अलावा उन्होंने सोना न खरीदने, विदेश यात्राओं से बचने, विदेशी सामान का उपयोग कम करने और जहां तक हो सके घर से काम करने की सलाह दी। यह अपील वैश्विक आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच की गई।
Jharkhand Politics: विपक्ष का एकजुट रुख
झामुमो और कांग्रेस दोनों दलों ने एक स्वर में यह स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की यह अपील जनता को भ्रमित करने और अपनी आर्थिक विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश है। दोनों दलों का कहना है कि सरकार को पहले अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए, न कि जनता को बलिदान देने के लिए कहना चाहिए।
झामुमो ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति हर मोर्चे पर कमजोर साबित हो रही है। जो देश कभी भारत के करीबी थे, आज वे दूरी बना रहे हैं। इस स्थिति की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी होगी।
Jharkhand Politics: जनता की परेशानी सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद के केंद्र में आम आदमी की तकलीफ है। बढ़ती महंगाई, घटती नौकरियां और कमजोर होती खरीदने की क्षमता ने जनता को पहले से ही परेशान कर रखा है। ऐसे में सरकार की ओर से और कटौती की अपील को विपक्ष जनविरोधी बता रहा है।
झामुमो और कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार महंगाई पर लगाम नहीं लगाती, बेरोजगारी कम नहीं करती और रुपये को मजबूत नहीं बनाती, तब तक जनता से त्याग की उम्मीद करना उचित नहीं है।
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