Dhanbad News: झारखंड की कोयला राजधानी धनबाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल कोयले की चोरी का नहीं बल्कि सरकारी तंत्र के बीच पैदा हुए भारी गतिरोध का है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने सीधे तौर पर धनबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कंपनी का दावा है कि जिला पुलिस के असहयोग के कारण अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे उनके तमाम अभियान ठप पड़ रहे हैं। बीसीसीएल के सुरक्षा मुख्यालय ने इस संबंध में धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को एक विस्तृत पत्र भेजकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस पत्र ने जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। यह सवाल अब हर जुबान पर है कि आखिर किसके इशारे पर खाकी ने अवैध खनन के खिलाफ नरमी बरती है।
Dhanbad News: पुलिस की चुप्पी और माफिया का खेल
महाप्रबंधक सुरक्षा हाफिजुल कुरैशी ने साफ कहा कि जिला प्रशासन और टास्क फोर्स की बैठकों में सहयोग के बड़े-बड़े वादे तो किए जाते हैं लेकिन जब जमीन पर उतरने की बारी आती है तो स्थिति पूरी तरह उलट होती है। अप्रैल से मई 2026 के बीच कंपनी ने दर्जनों ऐसे अभियानों की योजना बनाई थी जिनसे अवैध कोयला कारोबार की कमर तोड़ी जा सकती थी। अफसोस की बात यह है कि पुलिस बल की अनुपस्थिति की वजह से इनमें से ज्यादातर कार्रवाई अधूरी रह गई। जब पुलिस बल मौके पर नहीं पहुंचता है तो सुरक्षा कर्मियों के लिए उग्र भीड़ और माफिया के गुर्गों का सामना करना असंभव हो जाता है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो अंधेरे की आड़ में राष्ट्रीय संपत्ति को लूट रहे हैं।
कोयले की यह लूट केवल आर्थिक नुकसान नहीं है। यह सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का एक बड़ा प्रमाण भी है। बीसीसीएल का कहना है कि जब उनकी टीम किसी क्षेत्र में डोजरिंग या अवैध मुहानों को भरने जाती है तो स्थानीय थानों से मदद मांगी जाती है। कई बार लिखित सूचना देने के बाद भी फोर्स नहीं भेजी जाती। इससे न केवल टीम को खाली हाथ लौटना पड़ता है बल्कि माफिया के हौसले और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं। उन्हें लगता है कि कानून के हाथ उन तक नहीं पहुंचेंगे।
कतरास और सिजुआ में फेल हुआ ऑपरेशन
कतरास क्षेत्र में मई के महीने में दो बार बड़े ऑपरेशन की तैयारी थी। 23 और 26 मई को सीआईएसएफ की टीम पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद थी। थाना स्तर पर पहले ही सूचना दे दी गई थी। बावजूद इसके पुलिस का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। बिना सुरक्षा घेरे के अवैध खनन स्थलों पर जाना खतरनाक साबित हो सकता था। टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। ऐसी ही स्थिति सिजुआ क्षेत्र के लोहाबाद में भी देखने को मिली। वहां 20 मई को अवैध खनन स्थलों को भरने का काम तय किया गया था। घंटों इंतजार के बाद भी जब पुलिस बल नहीं पहुंचा तो अभियान को स्थगित करना पड़ा।
यही कहानी जोगता और गोविंदपुर क्षेत्रों की भी है। गोविंदपुर में तो हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से सीआईएसएफ ने खुद ही कदम पीछे खींच लिए। बरोरा थाने में इस बाबत ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई गई है। बीसीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मुद्दे को केवल पत्राचार तक सीमित नहीं रखेंगे। उनके पास उन सभी पत्रों और कॉल्स का रिकॉर्ड है जो पुलिस को समय पर दिए गए थे। कंपनी का मानना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोयला चोरी का यह संगठित गिरोह एक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है।
राजनीति की एंट्री और बाबूलाल मरांडी का हमला
कोयले की इस कालाबाजारी और पुलिसिया सुस्ती पर अब राजनीति भी गरमा गई है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस स्थिति को बेहद भयावह बताया है। उन्होंने कहा कि धनबाद में अब केवल चोरी नहीं बल्कि सरेआम डकैती हो रही है। उनका आरोप है कि सत्ता के संरक्षण के बिना इस स्तर पर अवैध कारोबार मुमकिन ही नहीं है। मरांडी ने चेतावनी दी है कि वे इस पूरे मामले का ब्यौरा लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री और केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है और एनआईए से जांच कराने की मांग की है।
विपक्ष का कहना है कि जब केंद्र सरकार की एक कंपनी खुद सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है तो आम जनता का क्या होगा। कोयलांचल में कोयले की अवैध ढुलाई और अवैध खनन के कारण अक्सर बड़े हादसे होते हैं। इन हादसों में गरीब मजदूर अपनी जान गंवा देते हैं। लेकिन असली खिलाड़ी हमेशा बच निकलते हैं। बीसीसीएल के ताजा आरोपों ने इस सिंडिकेट के चेहरे से नकाब हटाने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस पर क्या सफाई देती है।
Dhanbad News: सुरक्षा बनाम सहयोग की चुनौती
बीसीसीएल ने अपने स्तर पर इस साल अप्रैल से मई के बीच करीब दस से ज्यादा मुकदमे दर्ज कराए हैं। इन एफआईआर में कई नामजद आरोपी भी शामिल हैं। लेकिन गिरफ्तारी न होने और कार्रवाई रुकने से अपराधी बेखौफ हैं। राष्ट्रीय संसाधनों की रक्षा करना कंपनी की जिम्मेदारी है लेकिन पुलिस के बिना वह इसे अंजाम नहीं दे सकती। जानकारों का मानना है कि अगर पुलिस और बीसीसीएल के बीच यह तालमेल इसी तरह बिगड़ा रहा तो आने वाले दिनों में धनबाद में गैंगवार जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। अवैध कमाई का यह जरिया कई गुटों के बीच संघर्ष की वजह बनता रहा है।
धनबाद के एसएसपी को लिखे पत्र के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस मुख्यालय से सख्त निर्देश जारी होंगे। हालांकि स्थानीय स्तर पर तैनात पुलिस कर्मियों की भूमिका पर संदेह के बादल गहरे हैं। क्या वाकई फोर्स की कमी है या फिर यह जानबूझकर किया जा रहा है? बीसीसीएल ने साफ कर दिया है कि वह अब चुप नहीं बैठने वाली। राष्ट्रीय खनिज संपदा की लूट को रोकने के लिए वह हर संभव कदम उठाएगी। फिलहाल पूरी नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। क्या कोयला माफिया के इन सुरक्षित किलों पर पुलिस का बुलडोजर चलेगा या फिर आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर यूं ही चलता रहेगा? यह सवाल धनबाद के हर नागरिक के मन में है।
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