Modi Cabinet: केंद्र सरकार ने बुधवार को बिहार समेत पूर्वी भारत के लिए बड़ी सौगात का ऐलान कर दिया है। यूनियन कैबिनेट की बैठक में एक साथ पांच बड़े फैसले लिए गए, जिनमें चार रेलवे परियोजनाएं और एक फोर लेन हाईवे का निर्माण शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद इन फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन सभी परियोजनाओं पर कुल मिलाकर करीब 13,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सवाल यह है कि आखिर इन परियोजनाओं से आम लोगों की जिंदगी में किस तरह का बदलाव आने वाला है?
इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार को मिलने वाले हाईवे तोहफे की हो रही है, वहीं रेल परियोजनाओं का सीधा असर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लाखों यात्रियों पर पड़ेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर कैबिनेट ने किन-किन प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है।
Modi Cabinet: बिहार को मिला फोर लेन हाईवे का तोहफा
मोदी कैबिनेट ने बिहार के लिए मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा फोर लेन हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 3591 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह हाईवे बनने के बाद उत्तर बिहार के इन जिलों के बीच आवाजाही काफी आसान हो जाएगी, जिसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ व्यापार और आवागमन से जुड़े लोगों को भी मिलेगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर आमतौर पर उस इलाके के आर्थिक विकास पर भी सीधा पड़ता है, इसलिए इसे बिहार के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
हावड़ा-चेन्नई रूट को मिलेगी नई रफ्तार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के रेलवे नेटवर्क में सात प्रमुख ट्रंक रूट मौजूद हैं, जिनमें दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-चेन्नई, चेन्नई-मुंबई और मुंबई-दिल्ली जैसे अहम मार्ग शामिल हैं। इनमें से हावड़ा-चेन्नई रूट को अब पूरी तरह चार-लेन यानी क्वार्डुपल बनाने की योजना पर काम चल रहा है। हाल ही में मंजूर हुई परियोजनाओं में से तीन इसी हावड़ा-चेन्नई मुख्य लाइन से जुड़ी हैं, जबकि चौथी परियोजना पारादीप-कटक रेल खंड के लिए स्वीकृत की गई है। यहीं पर एक दिलचस्प बात सामने आती है, इस बदलाव से न सिर्फ ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, बल्कि माल ढुलाई भी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।
खड़गपुर-भद्रक रूट बनेगा चार-लेन कॉरिडोर
पहली बड़ी परियोजना के तहत खड़गपुर से भद्रक तक के 173 किलोमीटर लंबे रेल खंड को चार-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह रूट बालासोर और रूपसा से होते हुए भद्रक तक जाता है, और इसी रास्ते से कोयला व आयरन-ओर उत्पादक क्षेत्रों से भारी मालगाड़ियां गुजरती हैं। इसके अलावा हावड़ा से चेन्नई के बीच चलने वाली मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों का भी इस मार्ग पर भारी आवागमन रहता है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,352 करोड़ रुपये रखी गई है, और निर्माण के दौरान इस मार्ग पर 41 बड़े और 169 छोटे पुल भी बनाए जाएंगे।
कटक शहर को जाम से मिलेगी राहत
दूसरी अहम परियोजना भद्रक से हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण से जुड़ी है। हावड़ा-खड़गपुर-भद्रक रूट पर पहले से ही तीसरी लाइन का काम तेजी से चल रहा है और कई हिस्सों में यह पूरा भी हो चुका है, जिसके बाद अब यहां चौथी लाइन भी बनाई जाएगी। जानकार बताते हैं कि करीब 5,000 साल पुराने ऐतिहासिक शहर कटक को रेल यातायात की वजह से होने वाली भीड़भाड़ और जाम से बचाने के लिए इस परियोजना के तहत खास रेल-ओवर-रेल और रेल फ्लाई-ओवर ढांचे भी डिजाइन किए गए हैं।
इस परियोजना पर करीब 1,533 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे कटक शहर के भीतर ट्रेनों की भीड़भाड़ काफी हद तक कम हो जाएगी। इतना ही नहीं, इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद देश को हर साल करीब 433 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स लागत की बचत होने का अनुमान है।
निर्माण से खुलेंगे रोजगार के भी नए रास्ते
इस पूरे प्रोजेक्ट का एक ऐसा पहलू भी है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। सरकार के मुताबिक भद्रक-हरिदासपुर रेल लाइन के निर्माण कार्य से स्थानीय स्तर पर करीब 26 लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। यह आंकड़ा बताता है कि यह परियोजना सिर्फ रेल कनेक्टिविटी सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सीधा फायदा पहुंचेगा।
Modi Cabinet: आम जनता के लिए क्यों अहम है यह फैसला
बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों के लिए यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है। बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी से न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत भी कम होगी, जिसका असर आखिरकार आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है। साथ ही निर्माण कार्यों से बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद स्थानीय युवाओं के लिए भी राहत की खबर है।
कुल मिलाकर मोदी कैबिनेट के इस फैसले ने पूर्वी भारत के तीन बड़े राज्यों को बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर बड़ी सौगात दी है। बिहार को जहां नया फोर लेन हाईवे मिलेगा, वहीं बंगाल और ओडिशा में रेल नेटवर्क को मजबूती मिलेगी, जिससे यात्री और माल ढुलाई, दोनों तरह की आवाजाही आसान होगी। हावड़ा-चेन्नई रूट को चार-लेन बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले वर्षों में देश के रेल यातायात की तस्वीर बदल सकता है। अब देखना यह है कि इन परियोजनाओं पर काम कितनी रफ्तार से आगे बढ़ता है। इनसे जुड़ी आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है।
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