Sawan Purnima 2026: सावन पूर्णिमा श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस पावन दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती है तथा व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से शुभ फल मिलते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस बार सावन पूर्णिमा पर सुकर्मा योग का शुभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार पूर्णिमा तिथि दो दिनों में फैली हुई है इसलिए व्रत और स्नान-दान की तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी जरूरी है। सही मुहूर्त में पूजा करने से फल अधिक मिलता है।
Sawan Purnima 2026: सावन पूर्णिमा 2026 की सही तारीख
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा का विस्तार दो दिनों तक होने के कारण व्रत और अन्य कार्यों की तिथि अलग-अलग निर्धारित की गई है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रोदय और सूर्योदय के आधार पर व्रत तथा स्नान का निर्णय लिया जाता है। इस बार का योग विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।
सावन पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाएगा?
सावन पूर्णिमा का व्रत 27 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि में चंद्रोदय होगा इसलिए व्रत इसी तारीख को करने का विधान है। व्रत में चंद्रमा की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 18 मिनट के बाद भाद्रपद मास की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए व्रत 27 अगस्त को ही संपन्न किया जाएगा। व्रत रखने वाले भक्त दिन भर नियम का पालन करते हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद पारण करते हैं।
स्नान और दान की सही तिथि
सावन पूर्णिमा का स्नान और दान 28 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय होगा। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय होने पर स्नान-दान का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना सबसे शुभ माना गया है। गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य बढ़ता है। नदियों या पवित्र जलाशयों में स्नान का भी विशेष माहात्म्य बताया गया है।
सावन पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष सावन पूर्णिमा पर कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 28 मिनट से 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक चलेगा। लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल 27 अगस्त को शाम 6 बजकर 48 मिनट से शुरू होगा। चंद्रोदय 27 अगस्त को शाम 6 बजकर 27 मिनट पर होगा। पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के साथ प्रदोष काल प्रारंभ होने के कारण यही समय लक्ष्मी पूजा के लिए उत्तम रहेगा।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व
सावन पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष विधान है। चंद्रोदय के समय जल, दूध या चंदन मिश्रित जल से अर्घ्य दिया जाता है। इससे मन की शांति और जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ चंद्र आराधना करने से व्रत का फल मिलता है। शाम के समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने की परंपरा है। सही समय पर अर्घ्य देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
सुकर्मा योग का शुभ संयोग
इस वर्ष सावन पूर्णिमा पर सुकर्मा योग का शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार सुकर्मा योग 27 अगस्त को सुबह 7 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर रात तक रहेगा। ज्योतिष में इस योग को पूजा, दान, जप और अन्य शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है। सुकर्मा योग में किए गए धार्मिक कार्य फलदायी होते हैं। भक्त इस योग का लाभ उठाकर अधिक से अधिक पुण्य कार्य कर सकते हैं।
पूजा का विधान और महत्व
सावन पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रमा की आराधना की जाती है। घर को साफ करके पूजा स्थल पर इन देवताओं की मूर्ति या चित्र स्थापित किए जाते हैं। दीप जलाकर फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। मंत्र जाप और कथा श्रवण का भी विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान और सेवा कार्य जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
Sawan Purnima 2026: व्रत रखने वाले भक्तों के लिए सलाह
व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सात्विक भोजन का नियम अपनाएं। दिन भर मन को शुद्ध रखकर भक्ति भाव से रहें। शाम को चंद्रोदय के बाद ही पारण करें। व्रत के दौरान झूठ, क्रोध और नकारात्मक बातों से बचें। जरूरतमंदों की सहायता करने से व्रत का फल बढ़ता है। सही मुहूर्त में पूजा संपन्न करने से मान्यता के अनुसार मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सावन पूर्णिमा 2026 की तिथि 27 अगस्त सुबह 8:21 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:18 बजे समाप्त होगी। व्रत 27 अगस्त को रखा जाएगा क्योंकि उसी दिन चंद्रोदय होगा जबकि स्नान-दान 28 अगस्त को सूर्योदय वाले दिन किया जाएगा। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। सुकर्मा योग के शुभ संयोग के कारण इस बार का पर्व और भी फलदायी माना जा रहा है। सही समय पर पूजा, अर्घ्य और दान करके भक्त इस पावन अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
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