नई दिल्ली – दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधरने के बाद ग्रेप के चौथे चरण के प्रतिबंध हटने से कक्षा 6 से 9 और 11 के छात्रों के लिए स्कूल फिर से खुल गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को फिजिकल कक्षाएं संचालित करने का निर्देश दिया है। कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं हाइब्रिड मोड में जारी रहेंगी। कक्षा 10 और 12 की कक्षाएं पहले की तरह फिजिकल मोड में ही चलेंगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दिल्ली में दिसंबर महीने में प्रदूषण बहुत बढ़ गया था। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया था, जिससे GRAP-4 लागू हो गया। इस वजह से स्कूलों में पहले हाइब्रिड मोड शुरू किया गया, फिर छोटे बच्चों की क्लासेस पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गईं। लेकिन अब हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। तेज हवाओं और अच्छे मौसम की वजह से AQI कम हो गया। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP-4 हटा दिया। इसके बाद दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को नया आदेश जारी किया। इस आदेश में साफ कहा गया है कि कक्षा 6 से 9 और 11 के लिए अब पूरी तरह स्कूल में आकर पढ़ाई होगी। कक्षा 10 और 12 की क्लासेस पहले से ही ऑफलाइन चल रही थीं, वे जारी रहेंगी। छोटे बच्चों (नर्सरी से कक्षा 5) की सेहत का ध्यान रखते हुए उनके लिए हाइब्रिड मोड रखा गया है। यानी ये बच्चे स्कूल आ सकते हैं या घर से ऑनलाइन पढ़ सकते हैं, जहां ऑनलाइन की सुविधा हो।
कौन-कौन से स्कूलों पर लागू है यह नियम?
यह नियम दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू है। इसमें दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूल भी शामिल हैं। स्कूल प्रधानों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अभिभावकों और शिक्षकों को यह जानकारी दें।
अभिभावकों और बच्चों की प्रतिक्रिया
कई अभिभावक खुश हैं कि बड़े बच्चों की ऑफलाइन क्लासेस शुरू हो गईं। वे कहते हैं कि घर पर ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों का ध्यान नहीं लगता और दोस्तों से मिलने का मौका भी नहीं मिलता। एक अभिभावक ने कहा, “मेरा बेटा कक्षा 8 में है। वह स्कूल जाने के लिए बहुत उत्सुक था। अब फिर से रूटीन बनेगा।” लेकिन छोटे बच्चों के माता-पिता अभी चिंतित हैं। वे कहते हैं कि ठंड और प्रदूषण अभी भी है, इसलिए हाइब्रिड मोड अच्छा है। इससे वे अपनी सुविधा के अनुसार बच्चे को स्कूल भेज सकते हैं या घर पर रख सकते हैं। शिक्षक भी कहते हैं कि ऑफलाइन क्लासेस में पढ़ाना आसान होता है, क्योंकि बच्चे सीधे सवाल पूछ सकते हैं और गतिविधियां करवाई जा सकती हैं।
हाइब्रिड मोड क्या है और क्यों जरूरी?
हाइब्रिड मोड का मतलब है कि क्लासेस दोनों तरीके से चलेंगी – स्कूल में और ऑनलाइन। छोटे बच्चे ज्यादा नाजुक होते हैं। प्रदूषण से उन्हें खांसी, आंखों में जलन या सांस की तकलीफ हो सकती है। इसलिए सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था रखी है। स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस की सुविधा रखी गई है, ताकि कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे। पहले जब GRAP-4 लगा था, तो नर्सरी से कक्षा 5 तक पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया था। कक्षा 6 से 9 और 11 के लिए हाइब्रिड था। अब सुधार होने पर बड़े बच्चों को पूरी ऑफलाइन की इजाजत मिल गई।
आगे क्या होगा?
शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि हवा की गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। अगर फिर से प्रदूषण बढ़ा तो नियम बदल सकते हैं। साथ ही, सर्दी की छुट्टियां 1 जनवरी 2026 से शुरू होंगी, जो 15 जनवरी तक चलेंगी। तब तक स्कूल इसी तरह चलेंगे। स्कूलों में साफ-सफाई, पानी और वेंटिलेशन का ध्यान रखने को कहा गया है। बच्चों को मास्क पहनने और हाथ धोने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष :
दिल्ली के स्कूलों में ऑफलाइन क्लासेस की वापसी बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है। प्रदूषण से लड़ाई में यह कदम संतुलित है – बड़े बच्चे स्कूल जाकर अच्छे से पढ़ सकेंगे, जबकि छोटे बच्चों की सेहत का पूरा खयाल रखा गया है। शिक्षा जारी रहनी चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य सबसे पहले। उम्मीद है कि हवा और साफ हो और सभी बच्चे जल्द ही पूरी तरह स्कूल आ सकें। यह फैसला दिखाता है कि सरकार बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों का ध्यान रख रही है।



