Bihar News: बिहार के मोतिहारी जिले में जहरीली शराब का तांडव एक बार फिर देखने को मिला है। रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा और आसपास के गांवों में अवैध शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, छह लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है और 15 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं। तीन मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
यह घटना शनिवार रात की बताई जा रही है, जब कई लोग कथित तौर पर सस्ती अवैध शराब पीने के बाद बीमार पड़ गए। परिजनों का आरोप है कि शराब में मिलाए गए जहरीले पदार्थ ने यह तबाही मचाई। स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे प्रशासन पर शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू न करने का आरोप लगा रहे हैं।
घटना की शुरुआत कैसे हुई
पूर्वी चंपारण जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बालगंगा गांव में सबसे पहले एक युवक की मौत की सूचना मिली। उसके बाद तुरकौलिया और आसपास के इलाकों में भी कई लोग बीमार पड़ गए। मृतकों में एक की पहचान प्रमोद यादव के रूप में हुई है, जो दूध का कारोबार करता था। परिजनों ने बताया कि शनिवार रात उसे पेट में तेज दर्द हुआ और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई।
इसी तरह छह अन्य लोगों ने शराब पीने के बाद अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी। डॉक्टरों का कहना है कि शराब में मेथिल अल्कोहल जैसे जहरीले पदार्थ मिले होने की आशंका है, जो आंखों और दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचाता है। 15 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से तीन की हालत अभी चिंताजनक है।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

मोतिहारी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। रघुनाथपुर और तुरकौलिया थाना क्षेत्रों में छापेमारी शुरू कर दी गई है। पुलिस ने अवैध शराब से भरे कई जार और अन्य सामान बरामद किए हैं। छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जिला प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। एसपी और डीएम स्तर पर टीम गठित की गई है जो पूरे मामले की जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है, जिसमें शराब के सैंपल की जांच होगी। पुलिस का कहना है कि अवैध शराब बनाने वाले और सप्लाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Bihar News: मोतिहारी में पिछली घटनाओं का साया
मोतिहारी जिला जहरीली शराब की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। कुछ साल पहले यहां एक बड़े हादसे में दर्जनों लोगों की जान गई थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि हर बार घटना के बाद प्रशासन आश्वासन देता है, लेकिन कुछ महीनों बाद फिर ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। गरीब और मजदूर वर्ग के लोग सस्ती शराब की ओर आकर्षित होते हैं, जो उन्हें मौत के मुंह में धकेल देती है।
परिवारों में मचा मातम, आक्रोश बढ़ रहा है
मृतकों के परिवार रो-रोकर बुरा हाल हैं। आंखों की रोशनी गंवाने वाले लोग अब जीवन भर के लिए अपंग हो गए हैं। उनका इलाज महंगा पड़ रहा है और परिवार आर्थिक संकट में फंस गया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी सिर्फ कागजों पर है, जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।
Bihar News: शराबबंदी पर उठ रहे सवाल
बिहार में साल 2016 से शराबबंदी लागू है। इसका मकसद महिलाओं और परिवारों को शराब के नुकसान से बचाना था। लेकिन अवैध शराब का कारोबार रुक नहीं पाया है। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की नीति फेल हो चुकी है। अगर सख्ती नहीं बरती गई तो ऐसे हादसे और बढ़ेंगे।
ऐसे हादसों से बचने के उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि जहरीली शराब में मेथिल अल्कोहल होता है, जो शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। इससे पेट दर्द, उल्टी, आंखों में धुंधलापन और फिर मौत हो सकती है। लोगों को सलाह दी जाती है कि कभी भी अनजान स्रोत से शराब न पीएं। जागरूकता अभियान की जरूरत है।
पीड़ितों को मिले न्याय और मुआवजा
अब मांग उठ रही है कि मृतकों के परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए। जिन लोगों की आंखों की रोशनी गई है, उन्हें सरकारी नौकरी या पेंशन का प्रावधान किया जाए। बीमार लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित हो। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को तोड़ा जाए।
निष्कर्ष: जमीन पर सख्ती की जरूरत
मोतिहारी की यह घटना पूरे बिहार के लिए चेतावनी है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाती है कि शराबबंदी को सिर्फ कानून बनाकर नहीं, बल्कि जमीन पर सख्ती से लागू करने की जरूरत है। मोतिहारी के इस हादसे ने पूरे राज्य में चर्चा छेड़ दी है और अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या एक्शन लेती है।
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