Why Weight Increases: आपने डाइटिंग शुरू की, तला-भुना खाना बंद किया, मिठाई से दूरी बना ली फिर भी हर हफ्ते तराजू का कांटा ऊपर की तरफ जा रहा है। यह सिर्फ आपकी समस्या नहीं है। देश में लाखों लोग इसी उलझन में हैं कि खाना कम करने के बाद भी वजन क्यों नहीं घट रहा, बल्कि और बढ़ता जा रहा है।
सच यह है कि वजन बढ़ने के पीछे हमेशा ज्यादा खाना जिम्मेदार नहीं होता। कई बार शरीर के अंदर चल रही कुछ ऐसी गड़बड़ियां होती हैं जो बाहर से दिखती नहीं, लेकिन धीरे-धीरे वजन बढ़ाती रहती हैं। इन वजहों को समझना जरूरी है , क्योंकि जब तक असली कारण पता नहीं चलेगा, तब तक कोई भी डाइट या एक्सरसाइज पूरा फायदा नहीं देगी।
आज हम आपको उन 5 अंदरूनी कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कम खाने के बावजूद वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
हार्मोन का गड़बड़ाना: सबसे बड़ी वजह जो अक्सर अनदेखी रह जाती है
हमारे शरीर में हार्मोन एक तरह के दूत होते हैं जो हर काम को कंट्रोल करते हैं, भूख से लेकर नींद तक, और मेटाबॉलिज्म से लेकर मूड तक। जब ये हार्मोन सही मात्रा में काम नहीं करते, तो शरीर में बहुत कुछ बदलने लगता है, और उसमें वजन बढ़ना भी शामिल है।
खासकर महिलाओं में थायरॉइड की समस्या बहुत आम है। जब थायरॉइड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म यानी कैलोरी जलाने की क्षमता धीमी पड़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि खाना उसी तरह खाने के बाद भी वजन तेजी से बढ़ने लगता है।
इसके अलावा पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम भी महिलाओं में वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह है। मेनोपॉज के दौरान भी हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और वजन बढ़ने लगता है। अगर आप कम खाने के बाद भी तेजी से वजन बढ़ते देख रहे हैं, तो एक बार थायरॉइड और हार्मोन की जांच करवाना समझदारी होगी।
इंसुलिन रेजिस्टेंस: शुगर जब दुश्मन बन जाए

इंसुलिन हमारे शरीर में एक बेहद जरूरी हार्मोन है। इसका काम है खून में मौजूद शुगर को उठाकर शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाना, जहां वह ऊर्जा में बदलती है। लेकिन जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के संकेत को ठीक से नहीं समझतीं, तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर के लिए खून की शुगर को ऊर्जा में बदलना मुश्किल हो जाता है। नतीजा यह होता है कि वह अतिरिक्त शुगर सीधे चर्बी के रूप में शरीर में जमा होने लगती है। इसीलिए ऐसे लोग भले ही कम खाएं, लेकिन जो खा रहे हैं वह चर्बी बनता रहता है।
यह स्थिति सिर्फ वजन ही नहीं बढ़ाती यह टाइप 2 डायबिटीज की दिशा में पहला कदम भी होती है। अगर आपको मीठा खाने के बाद बहुत थकान महसूस होती है, पेट के आसपास चर्बी जमा हो रही है या बार-बार भूख लगती है, तो एक बार इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच जरूर करवाएं।
उम्र बढ़ने के साथ धीमा पड़ता मेटाबॉलिज्म
30 की उम्र पार करते-करते बहुत से लोग यह नोटिस करते हैं कि पहले जो खाते थे वही खाने के बाद भी अब वजन बढ़ने लगा है। इसकी वजह है उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म का धीमा होना।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की मांसपेशियां कम होने लगती हैं। मांसपेशियां चर्बी के मुकाबले ज्यादा कैलोरी जलाती हैं। इसलिए जब मांसपेशियां घटती हैं, तो शरीर की कुल कैलोरी जलाने की क्षमता भी कम हो जाती है।
यही कारण है कि 20 साल की उम्र में जो डाइट काम करती थी, वही 40 साल की उम्र में काम नहीं करती। 40 के बाद तो यह और भी साफ दिखता है। शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं और अगर खानपान और जीवनशैली उसी हिसाब से न बदले, तो वजन अपने आप बढ़ता रहता है।
इसका इलाज है कि उम्र के साथ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जाए, और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाए।
नींद की कमी: यह भी बढ़ाती है वजन
रात को देर तक मोबाइल चलाना, कम सोना या नींद न आने की समस्या, ये सब वजन बढ़ाने में बड़ा रोल निभाते हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन नींद और वजन का गहरा संबंध है। जब हम पूरी नींद नहीं लेते, तो शरीर में दो अहम हार्मोन बदल जाते हैं। घ्रेलिन नाम का हार्मोन बढ़ जाता है। यही वह हार्मोन है जो भूख लगाता है। और लेप्टिन नाम का हार्मोन कम हो जाता है। यह वह हार्मोन है जो बताता है कि पेट भर गया है। इस उलटफेर का नतीजा यह होता है कि कम सोने वाले लोग ज्यादा खाते हैं और उन्हें पेट भरा हुआ कम महसूस होता है।
इसके अलावा नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल नाम का तनाव हार्मोन बढ़ जाता है। यह हार्मोन पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा करने में सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। इसीलिए जो लोग रात को कम सोते हैं, उनके पेट पर चर्बी जल्दी जमती है। रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद सिर्फ थकान दूर नहीं करती, यह वजन को कंट्रोल करने में भी बड़ी भूमिका निभाती है।
दवाओं का साइड इफेक्ट: जो कोई नहीं बताता
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि कुछ दवाएं वजन बढ़ाने का काम करती हैं। अगर आपने हाल ही में कोई नई दवा शुरू की है और उसके बाद से वजन बढ़ रहा है, तो दोनों के बीच संबंध हो सकता है।
कुछ एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं, मिर्गी की दवाएं, हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं और स्टेरॉयड, ये सभी शरीर में पानी रोकने या भूख बढ़ाने का काम कर सकती हैं। कुछ दवाएं सीधे मेटाबॉलिज्म पर असर डालती हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है।
इसका मतलब यह नहीं कि दवाएं लेना बंद कर दें, बल्कि अगर आपको लगे कि किसी दवा की वजह से वजन बढ़ रहा है, तो अपने डॉक्टर से बात करें। वे या तो दवा बदल सकते हैं या डोज एडजस्ट कर सकते हैं।
Why Weight Increases: तो अब क्या करें?
इन पांचों कारणों को समझने के बाद यह साफ हो जाता है कि वजन घटाना सिर्फ कम खाने का खेल नहीं है। अगर शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी चल रही है, तो पहले उसे ठीक करना जरूरी है। सबसे पहला कदम है डॉक्टर से मिलना और जरूरी जांच करवाना थायरॉइड, इंसुलिन, हार्मोन और नींद से जुड़ी समस्याओं की जांच से असली वजह सामने आ सकती है। दूसरा कदम है जीवनशैली में बदलाव नींद पूरी लेना, तनाव कम करना, रोजाना थोड़ी चलने-फिरने की आदत और प्रोटीन से भरपूर खाना। याद रखें बिना वजह वजन बढ़ना शरीर की एक चेतावनी है। इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। समय पर ध्यान दिया जाए तो न सिर्फ वजन कंट्रोल होगा, बल्कि कई बड़ी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
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