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चुनाव तारीख घोषित होते ही बंगाल में सियासी भूचाल! EC ने एक झटके में हटाए 4 बड़े अधिकारी, ममता आज सड़क पर उतरेंगी

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राज्य की सियासत में एक बड़ा भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा के महज कुछ घंटों के भीतर ही एक बेहद कड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए राज्य के चार सबसे ताकतवर नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को एक साथ हटा दिया। मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा ये वो चार नाम हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश दिया। इस फैसले ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है और आज शाम 4 बजे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। तृणमूल ने राज्यसभा से पूरे दिन के लिए वॉकआउट भी किया।

चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, रात के अंधेरे में हटाए गए राज्य के शीर्ष अफसर

पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को और नतीजे 4 मई को आएंगे। लेकिन चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद जो हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया। चुनाव आयोग ने उसी रात राज्य के सबसे अहम प्रशासनिक और पुलिस पदों पर बैठे अधिकारियों को हटाने का आदेश जारी कर दिया। तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रात के अंधेरे में मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस प्रमुख को हटाना पूरी तरह से अनुचित है।

चुनाव आयोग की तरफ से इस फैसले की सफाई भी आई। आयोग ने कहा कि राज्य की चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इससे पहले रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण माहौल में कराए जाएंगे। आयोग का तर्क है कि इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव किया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है वो चुनाव पूरा होने तक किसी भी चुनावी पद या जिम्मेदारी पर तैनात नहीं किए जाएंगे। आयोग ने इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों से शाम 3 बजे तक रिपोर्ट भी मांगी।

हटाए गए अधिकारियों की जगह नई तैनातियां भी कर दी गई हैं। दुष्यंत नरियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। सिद्ध नाथ गुप्ता को नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस का नया आयुक्त बनाया गया है जबकि संघमित्रा घोष को राज्य का नया गृह एवं पहाड़ी मामलों की प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

West Bengal Election 2026: ममता का शंखनाद BJP पर मिलीभगत का आरोप

West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026

चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस ने जो प्रतिक्रिया दी वो बेहद तीखी रही। पार्टी ने इसे सिरे से राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा कि यह सब भारतीय जनता पार्टी की मिलीभगत से हो रहा है ताकि बंगाल चुनाव को प्रभावित किया जा सके। तृणमूल सांसद शताब्दी रॉय ने सीधे आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए सरकारी संसाधनों और संस्थाओं का बेशर्मी से दुरुपयोग कर रही है और जनता इसका जवाब देगी।

तृणमूल ने संसद में भी इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया। पार्टी ने राज्यसभा से पूरे दिन के लिए वॉकआउट किया जो उनके गुस्से और नाराजगी का साफ संकेत है। हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर पलटवार किया और कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके फैसलों पर संसद के भीतर सवाल उठाना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरे मामले में सबसे मुखर हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यह बंगाल की जनता और राज्य सरकार के खिलाफ एक सोची-समझी चाल है। ममता ने आज शाम 4 बजे कोलकाता में विरोध मार्च करने का ऐलान किया है जिसमें पार्टी के सांसद, विधायक और बड़े नेता शामिल होंगे। यह साफ है कि तृणमूल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाना चाहती है और चुनावी माहौल में इसे एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनाना चाहती है।

बंगाल चुनाव में क्या है असली दांव और कितना असरदार होगा यह प्रशासनिक फेरबदल

पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हमेशा से देश के सबसे ज्यादा चर्चित और संवेदनशील चुनावों में से एक रहा है। यहां चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है और इसीलिए हर बार चुनाव आयोग बंगाल के लिए अलग से तैयारी करता है। इस बार आयोग ने पहले ही दिन से कड़ा रुख अख्तियार करते हुए यह संकेत दे दिया है कि वो किसी भी तरह की बेनियमी बर्दाश्त नहीं करेगा।

लेकिन तृणमूल का कहना है कि यह प्रशासनिक फेरबदल निष्पक्षता की आड़ में एक पक्षपाती कदम है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि जो अधिकारी हटाए गए हैं वो राज्य सरकार के भरोसेमंद और अनुभवी लोग थे और उनकी जगह लाए गए अधिकारी केंद्र सरकार के करीबी हैं। इस तर्क में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त बताएगा लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल ने चुनावी माहौल को पहले दिन से ही गरमा दिया है।

बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान से पहले यह लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं बल्कि राज्य के प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर नियंत्रण की भी है। ममता बनर्जी जानती हैं कि अगर मैदान में उनके विश्वासपात्र अधिकारी नहीं हैं तो खेल मुश्किल हो सकता है। इसीलिए उन्होंने तुरंत सड़क पर उतरने का फैसला किया। आने वाले दिनों में यह लड़ाई और तेज होने वाली है और बंगाल का सियासी पारा अब चुनाव के दिन तक नीचे आने वाला नहीं है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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