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प्रियंका गांधी-इजरायली राजदूत विवाद: कांग्रेस का तीखा पलटवार, भाषा को बताया ‘अप्रिय और अस्वीकार्य’

गाजा में चल रहे संघर्ष पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। प्रियंका गांधी ने इजरायल पर गाजा में नरसंहार का आरोप लगाया था, जिसके जवाब में इजरायली राजदूत की टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी भड़क गई है। कांग्रेस नेताओं ने अजार के बयान को ‘गैर-राजनयिक’, ‘अप्रिय’ और ‘आपत्तिजनक’ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

आनंद शर्मा बोले- मानवीय संकट को नकारना निंदनीय

पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने एक्स पर लिखा, “गाजा में मानवीय संकट को सरेआम नकारना और 60,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों—खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों—की क्रूर हत्याओं को सही ठहराना बेहद निंदनीय है।” उन्होंने कहा कि राजदूत की भाषा गैर-राजनयिक और अस्वीकार्य है।

पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री से की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा, “क्या भारत में बोलने की आजादी अब तेल अवीव से नियंत्रित होगी? नरसंहार के आरोपी देश का राजदूत अगर एक मौजूदा सांसद को निशाना बनाएगा, तो यह भारतीय लोकतंत्र की गरिमा पर हमला है।” उन्होंने पूछा कि क्या जयशंकर इस धमकी जैसे बयान पर प्रतिक्रिया देंगे या नहीं।

गौरव गोगोई बोले- संसद को चुप नहीं रहना चाहिए

लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने इस टिप्पणी को ‘विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन’ बताया और कहा कि भले ही केंद्र सरकार चुप रहे, लेकिन संसद मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।

प्रियंका गांधी का आरोप

प्रियंका गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा था, “इजरायल ने 60,000 से ज्यादा लोगों की हत्या की है, जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं। सैकड़ों को भूख से मार डाला गया है और लाखों लोग भूख से मरने के खतरे में हैं।” उन्होंने भारत सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि यह रवैया अपराध को बढ़ावा देने जैसा है।

राजदूत रुवेन अजार का जवाब

अजार ने एक्स पर लिखा, “शर्मनाक क्या है, आपका धोखा। इजरायल ने 25,000 हमास आतंकवादियों को मारा है।” उन्होंने दावा किया कि मानवीय संकट के लिए हमास जिम्मेदार है, जो नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करता है और भागने या मदद पाने वालों पर गोलीबारी करता है।

ये भी पढ़ें: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बयान – “राष्ट्रहित सर्वोपरि, किसानों के साथ कोई समझौता नहीं”

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