Raj Thackeray on UP-Bihar: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। बीएमसी चुनाव के बीच दिए गए उनके तीखे बयानों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। रविवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने यूपी और बिहार से आने वाले लोगों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पर हिंदी थोपने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज ठाकरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हिंदी आपकी भाषा नहीं है। मुझे किसी भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर इसे हम पर थोपा गया तो लात मारकर बाहर कर दूंगा।” उन्होंने इस बयान को मराठी अस्मिता की रक्षा से जोड़ा और कहा कि महाराष्ट्र के संसाधनों पर बाहर से आने वाले लोग कब्जा कर रहे हैं।
बीएमसी चुनाव को मराठी अस्मिता की आखिरी लड़ाई बताया
राज ठाकरे ने 15 जनवरी 2026 को होने वाले बीएमसी चुनाव को मराठी मानुष की ‘आखिरी लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर मराठी लोग आज एकजुट नहीं हुए तो उनकी पहचान और अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “हर तरफ से लोग महाराष्ट्र आ रहे हैं और आपका हिस्सा छीन रहे हैं। अगर जमीन और भाषा चली गई, तो आप भी खत्म हो जाएंगे। यह मराठी मानुष का आखिरी चुनाव है। आज अगर मौका चूक गए, तो भविष्य नहीं बचेगा।”
राज ठाकरे ने मतदान के दिन सतर्क रहने और कथित फर्जी वोटरों को रोकने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने मराठी और महाराष्ट्र के नाम पर एकजुट होने की अपील की।
उद्धव ठाकरे ने भी भाजपा पर साधा निशाना

संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए दोनों भाइयों ने पुराने मतभेद भुला दिए हैं। उन्होंने कहा कि मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के हित में साथ आना जरूरी था।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर महाराष्ट्र के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव से पहले नकली हिंदुत्व और बांटने वाली राजनीति करती है। उद्धव ने सवाल किया कि क्या कोई ऐसा चुनाव है जहां भाजपा ने हिंदू-मुस्लिम राजनीति नहीं की हो।
उन्होंने तमिलनाडु भाजपा नेता के अन्नामलाई के बयान पर भी निशाना साधा। अन्नामलाई ने कहा था कि बॉम्बे महाराष्ट्र का नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर है। उद्धव ने पूछा कि क्या भाजपा मुंबई का नाम फिर से बॉम्बे करने की योजना बना रही है।
बिहार से आई तीखी प्रतिक्रिया
राज ठाकरे के बयान पर बिहार से भी प्रतिक्रिया आई है। जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने कहा कि भाषा को लेकर संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
तेज प्रताप यादव ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है और यहां सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि क्षेत्रीय अस्मिता के नाम पर किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें नहीं की जानी चाहिए।
बीएमसी चुनाव में भाषा और अस्मिता का मुद्दा गर्म
बीएमसी चुनाव नजदीक आते ही महाराष्ट्र में भाषा, पहचान और अस्मिता को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के संयुक्त मंच से दिए गए बयानों ने राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है।
एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ही मराठी अस्मिता को बचाने का दावा कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इन बयानों को विभाजनकारी करार दे रहे हैं। चुनावी माहौल में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह बयानबाजी महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है और आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।



