Rohini Acharya: बिहार की लड़कियों पर उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के विवादित बयान को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। इस मामले में अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और समाजसेवी रोहिणी आचार्य ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट के माध्यम से इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बेटियों के प्रति समाज और लोगों की सोच एवं दृष्टिकोण में अभी भी बड़े सुधार और बदलाव की आवश्यकता है।
रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में लिखा कि हाल ही में बिहार की बेटियों की कीमत और बोली लगाने वाला एक अति निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से यही साबित होता है कि बेटियों के प्रति समाज और लोगों की सोच एवं दृष्टिकोण में अभी भी बड़े सुधार और बदलाव की जरूरत है। समाज में महिलाओं के प्रति इस तरह की मानसिकता को बदलना जरूरी है।
बेटी बचाओ के नारे बेमानी हैं गलत मानसिकता के साथ
रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि बेटियों के प्रति कायम गलत मानसिकता को खत्म किए बिना बेटी बचाओ, बेटियों को आगे बढ़ाओ और पढ़ाओ जैसे नारे और प्रयास पूरी तरह से निरर्थक हैं। उन्होंने साफ किया कि जब तक समाज में बेटियों को लेकर सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक सरकारी योजनाएं और नारे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे। समाज को अपनी मानसिकता में बुनियादी परिवर्तन लाना होगा।
रोहिणी ने आगे कहा कि बेटियों की बोली लगाने वाले, उनकी कीमत आंकने वाले और बेटियों तथा बहनों का तिरस्कार करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज को ऐसे लोगों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और उन्हें स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हर भेद भुलाकर बेटियों के साथ खड़े हों सभी
समाजसेवी रोहिणी आचार्य ने कहा कि बेटियों और बहनों को अपमानित और प्रताड़ित करने वालों के विरुद्ध हर भेद भुलाकर हम में से हर एक व्यक्ति को बेटियों और बहनों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले लोगों को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह समाज के चरित्र और मूल्यों का सवाल है।
रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट के अंत में लिखा कि इतिहास के साथ साथ भूत एवं वर्तमान के हर एक दौर ने यह साबित किया है कि बेटियां और बहनें बेमिसाल होती हैं। वे दृढ़ निश्चय, निष्ठा, त्याग, विश्वास, संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल होती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां गौरवबोध होती हैं जो बेशकीमती होती हैं और जिनकी बोली कदापि नहीं लगाई जा सकती है। महिलाओं का सम्मान समाज की पहचान है और इसे बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है।
क्या है पूरा मामला और विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद एक वीडियो से शुरू हुआ है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में गिरधारी लाल साहू यह कहते सुने जा रहे हैं कि बिहार में बीस से पच्चीस हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुंवारों के लिए बिहार से लड़कियां लेकर आएंगे।
कथित तौर पर यह बयान 23 दिसंबर 2025 को अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्याहीदेवी मंडल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया बताया जा रहा है। यह वीडियो जनवरी 2026 में वायरल हुआ और इसके बाद से बिहार की राजनीति में तूफान मच गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की है।
बिहार की राजनीति में मचा है बवाल
गिरधारी लाल साहू के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने सत्ताधारी एनडीए गठबंधन पर जोरदार हमला बोला है। राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को बिहार की बेटियों का अपमान बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने मांग की है कि गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
राजद नेताओं ने कहा कि यह बयान न केवल बिहार की बेटियों का अपमान है बल्कि यह पूरे बिहार की अस्मिता पर हमला है। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियां देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। वे हर क्षेत्र में अव्वल हैं चाहे वह शिक्षा हो, खेल हो, राजनीति हो या कोई अन्य क्षेत्र। ऐसे में किसी का भी ऐसा बयान देना घोर निंदनीय है।
महिला संगठनों ने भी जताया विरोध
विभिन्न महिला संगठनों ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान महिलाओं के प्रति समाज की सोच को दर्शाता है। महिला संगठनों ने मांग की है कि गिरधारी लाल साहू को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए।
कुछ महिला संगठनों ने प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर गिरधारी लाल साहू ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ देंगी। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक बयान का मामला नहीं है बल्कि यह महिलाओं के प्रति समाज की सोच का प्रतिबिंब है।
बिहार की बेटियों ने दुनिया भर में बनाया मुकाम
बिहार की बेटियों ने देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा से सभी को चौंकाया है। शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की लड़कियां लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। यूपीएससी, बीपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार की बेटियां टॉप रैंक हासिल कर रही हैं। कई बार तो बिहार की लड़कियों ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में प्रथम स्थान हासिल किया है।
खेल के क्षेत्र में भी बिहार की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं। ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में बिहार की लड़कियों ने पदक जीते हैं। राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कला और संस्कृति जैसे हर क्षेत्र में बिहार की बेटियां अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी हो रही निंदा
सोशल मीडिया पर भी गिरधारी लाल साहू के बयान की जमकर निंदा हो रही है। लोग उनके बयान को शर्मनाक और अपमानजनक बता रहे हैं। कई हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं जिनमें बिहार की बेटियों के समर्थन में आवाजें उठाई जा रही हैं। लोग बिहार की बेटियों की उपलब्धियों को साझा कर रहे हैं और गिरधारी लाल साहू के बयान को गलत बता रहे हैं।
कई प्रभावशाली लोगों ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देते हैं। जब एक सार्वजनिक व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करता है तो समाज में गलत संदेश जाता है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी पर इसका बुरा असर पड़ता है।
सरकारी स्तर पर भी उठने चाहिए कदम
सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के मामलों में सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। महिलाओं के खिलाफ ऐसे बयानों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। जो लोग सार्वजनिक रूप से महिलाओं का अपमान करते हैं उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला सम्मान सिर्फ नारों और योजनाओं से नहीं आएगा। इसके लिए समाज की सोच में बुनियादी बदलाव लाना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में लैंगिक समानता और महिला सम्मान की शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चों को छोटी उम्र से ही सिखाया जाना चाहिए कि महिलाओं का सम्मान करना कितना जरूरी है।
Rohini Acharya: बिहार सरकार की भी होनी चाहिए प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार सरकार को भी इस मामले में सख्त रुख अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री को इस मामले पर स्पष्ट बयान देना चाहिए। बिहार की बेटियों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार को उत्तराखंड सरकार से इस मामले में कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के प्रति समाज की सोच का मुद्दा है। सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
रोहिणी आचार्य का यह बयान बिहार की बेटियों के सम्मान में एक मजबूत आवाज है। उनके शब्दों ने समाज को झकझोर दिया है और लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। यह मामला अभी थमने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में इस पर और भी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।



