Budget 2026: शुक्रवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक का सबसे निचला स्तर छू लिया। दिन के कारोबार में रुपया 92.02 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ। हालांकि आखिर में हल्की रिकवरी के साथ 91.97 पर बंद होने में सफल रहा। मजबूत अमेरिकी मुद्रा और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच रुपये पर लगातार दबाव बना रहा। फॉरेक्स बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है।
कैसी रही कारोबार की शुरुआत
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.89 पर खुला। शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाते हुए यह 91.82 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह एक सकारात्मक संकेत था। लेकिन बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने लगी। इसके चलते रुपया अपने अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर 92.02 तक फिसल गया। यह एक ऐतिहासिक निम्न स्तर था। हालांकि दिन के अंत में कुछ रिकवरी हुई। अंततः रुपया पिछले बंद स्तर की तुलना में महज 2 पैसे की बढ़त के साथ 91.97 पर बंद हुआ। यह मामूली सुधार था लेकिन स्थिति गंभीर बनी रही।
पिछले दिनों का प्रदर्शन
इससे पहले गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने तब तक के सबसे निचले स्तर 91.99 पर स्थिर बंद हुआ था। रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी था। इससे पहले रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर 23 जनवरी को 92 प्रति डॉलर दर्ज किया गया था। यानी पिछले कुछ दिनों से रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है। बाजार विशेषज्ञों ने इस गिरावट को कई कारकों से जोड़ा है।
कच्चे तेल में गिरावट से मिली राहत
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने बताया कि कच्चे तेल और कमोडिटी कीमतों में आई गिरावट से रुपये को कुछ राहत मिली। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 70.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतें कम होने से भारत के आयात बिल में कमी आती है। यह रुपये के लिए सकारात्मक है क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक देश है। लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
हालांकि डॉलर इंडेक्स में मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी के चलते रुपये में तेज उछाल सीमित रहा। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.57 पर कारोबार करता दिखा। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राएं कमजोर हो जाती हैं। यही रुपये के साथ हो रहा है। डॉलर की मजबूती रुपये के लिए दबाव बन रही है।
ट्रंप के बयान का असर
अमेरिकी डॉलर को उस समय और समर्थन मिला जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा करने का संकेत दिया। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में हैं। इससे डॉलर को बल मिलता है। साथ ही ट्रंप के टैरिफ संबंधी बयान भी बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ रही है। यह सब रुपये के लिए नकारात्मक है।
विदेशी निवेशकों की निकासी

विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। जनवरी महीने में उन्होंने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं। जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं। इससे रुपये की मांग कम होती है और डॉलर की मांग बढ़ती है। परिणामस्वरूप रुपया कमजोर हो जाता है। घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी ने भी निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
आर्थिक सर्वेक्षण की टिप्पणी
संसद में गुरुवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण टिप्पणी है। सर्वेक्षण के अनुसार ऐसे समय में जब महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक वृद्धि का परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, भारत में निवेश को लेकर निवेशकों की झिझक पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यह इंगित करता है कि रुपये की कमजोरी मूलभूत कारकों की बजाय बाजार की धारणा से अधिक प्रभावित है।
रुपये की कमजोरी के नुकसान और फायदे
रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिससे तेल की कीमतें और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। विदेश यात्रा और शिक्षा भी खर्चीली हो जाती है। हालांकि, इसके कुछ फायदे भी हैं—भारतीय निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाता है, जिससे आईटी और सेवा क्षेत्र को लाभ मिलता है। साथ ही, विदेश से आने वाले रेमिटेंस (प्रेषण) का मूल्य भी बढ़ जाता है।
आरबीआई की भूमिका और भविष्य का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की चाल पर पैनी नजर रखता है और अत्यधिक गिरावट की स्थिति में अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। रविवार को पेश होने वाले बजट 2026 से बाजारों को काफी उम्मीदें हैं। यदि बजट में विकासोन्मुख घोषणाएं होती हैं, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और रुपये को मजबूती मिल सकती है।
Budget 2026: निष्कर्ष
रुपये का 92.02 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिरना चिंताजनक है। मजबूत डॉलर, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताएं इसके प्रमुख कारण हैं। अब सबकी निगाहें कल पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं, जो रुपये की अगली दिशा तय कर सकता है।



