SC Questions Madras HC: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के केस लिस्टिंग और सुनवाई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। करूर भगदड़ मामले में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट में कुछ गड़बड़ हो रही है। यह टिप्पणी रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट पर आधारित थी। कोर्ट ने नोटिस जारी कर रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया और विस्तृत जवाब मांगा। SC Madras HC case listing की इस जांच से न्यायिक पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। तमिलनाडु सरकार ने CBI जांच की मांग की है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर फोकस किया।
करूर भगदड़ मामले का पूरा संदर्भ
करूर भगदड़ मामला 27 सितंबर 2025 को TVK (तमिलनाडु वंचितों की आवाज) की रैली से जुड़ा है। भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई और 60 से ज्यादा घायल हुए। मदुरै बेंच ने CBI जांच का आदेश दिया, लेकिन चेन्नई बेंच ने SIT गठित की। TVK की याचिका रोड शो दिशानिर्देश मांगती थी, लेकिन कोर्ट ने सीधे जांच का फैसला सुना। सुप्रीम कोर्ट ने इस विरोधाभास पर नाराजगी जताई। तमिलनाडु सरकार ने CBI जांच पर रोक लगाई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर रोक हटाने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: हाई कोर्ट में कुछ गड़बड़
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा, हाई कोर्ट में कुछ गड़बड़ हो रही है, हमें यह देखना होगा। बेंच ने TVK याचिका पर पहले नाराजगी जताई थी। अब रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट के आधार पर जांच तेज हो गई। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की CBI मांग पर बाद में फैसला करने का संकेत दिया। न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन के एक सदस्यीय आयोग को काम जारी रखने को कहा। यह कदम हाई कोर्ट की लिस्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
न्यायिक प्रक्रिया पर व्यापक प्रभाव: पारदर्शिता की मांग बढ़ी
यह मामला न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर डालेगा। SC Madras HC case listing में सुधार की जरूरत उजागर हुई। Judicial misconduct की आशंका से हाई कोर्टों को रिपोर्टिंग मजबूत करनी पड़ेगी। Karur stampede case में दोहरे आदेशों से भविष्य में CBI या SIT जांच प्रभावित हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई न्यायिक जवाबदेही बढ़ाएगी।



