Bihar News: बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में एक बार फिर चीनी की मिठास महकने वाली है। वर्षों से बंद पड़ी मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर सहकारिता विभाग इन मिलों का संचालन संभालेगा, जबकि गन्ना उद्योग विभाग ने इनके लिए कुल 2401 गांवों को गन्ना आपूर्ति क्षेत्र के रूप में आरक्षित कर दिया है। यह फैसला न केवल हजारों गन्ना उत्पादक किसानों के लिए स्थायी बाजार सुनिश्चित करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद भी जगाएगा।
बंद मिलों का पुनरुद्धार: किसानों और युवाओं के लिए नई उम्मीद

बिहार में चीनी उद्योग का इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में कई मिलें बंद होने से किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल पाया और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। अब ‘सात निश्चय-3’ के तहत समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने बंद मिलों को चालू करने का अभियान तेज कर दिया है। सकरी और रैयाम मिलें इसी क्रम में प्रमुख हैं, जो मिथिला क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।
गन्ना उद्योग विभाग ने शुक्रवार को दोनों मिलों के लिए अलग-अलग गांवों की सूची जारी की। सकरी चीनी मिल के लिए मधुबनी जिले के 686 गांव और दरभंगा जिले के 697 गांव आरक्षित किए गए हैं, यानी कुल 1383 गांव। इनमें मधुबनी के अंध्राथाढ़ी, बबुरही, घोघाडीहा, झंझारपुर, लडनिया, लखनउर, लौकहां, लौकही, माधेपुर, पंडौर, फुलपरास और राजनगर प्रखंड शामिल हैं। वहीं दरभंगा के बरही, मनिगांछी, टारडीह, अलिनगर, बेनीपुर, बिरौल, धनश्यामपुर, गौराबौराम, किरातपुर, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान (पूर्वी) और दरभंगा प्रखंड के गांव भी इस सूची में हैं।
इसी तरह रैयाम चीनी मिल के लिए मधुबनी जिले के 438 गांव और दरभंगा जिले के 580 गांव आरक्षित हैं, कुल 1018 गांव। मधुबनी के बासोपट्टी, बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर, कलुहीं, खजौली, रहिका और माधवापुर प्रखंड तथा दरभंगा के बहादुरपुर, हायाघाट, हनुमाननगर, जाले, सिंघवारा और कोइरी प्रखंड के किसान इनसे जुड़ेंगे। इस आरक्षण से मिलों को नियमित गन्ना मिलेगा और किसानों को परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
सहकारिता विभाग की भूमिका और उच्चस्तरीय समिति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य की सभी बंद चीनी मिलों को जल्द से जल्द चालू किया जाए। इस दिशा में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति सक्रिय है। सहकारिता विभाग इन मिलों को सहकारी मॉडल पर चलाएगा, जिससे किसानों का सीधा नियंत्रण और लाभ सुनिश्चित होगा। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर संघ (NFCSF) जैसे संगठनों से भी सहयोग की बात हुई है।
यह कदम न केवल पुरानी मिलों को नया जीवन देगा, बल्कि राज्य में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना की योजना को भी गति देगा। गन्ना मंत्री संजय कुमार पासवान ने बताया कि बंद मिलों के पुनरुद्धार से किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा। मिथिलांचल क्षेत्र में गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए बीज उपलब्धता और नर्सरी कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
आर्थिक प्रभाव: रोजगार और किसानों की आमदनी में वृद्धि
सकरी और रैयाम मिलों के चालू होने से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। पेराई सत्र में मजदूरों, तकनीशियनों, परिवहनकर्ताओं और संबंधित सेवाओं में काम बढ़ेगा। किसानों को गन्ने का बेहतर मूल्य मिलेगा, क्योंकि मिलें निकट होंगी और परिवहन खर्च कम होगा। इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ सकता है, जो वर्तमान में जग्गरी बनाने में जा रहा है।
मिथिला के किसान लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। बंद मिलों के कारण गन्ना बेचने में दिक्कत होती थी, लेकिन अब उम्मीद जगी है कि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था में मिठास लौटने से दुकानें, बाजार और अन्य गतिविधियां भी सक्रिय होंगी।
Bihar News: नई मिलों की स्थापना और चुनौतियां
सरकार का लक्ष्य 25 नई मिलें लगाना है, जिसके लिए 25 जिलों में भूमि चिह्नित की जा रही है। प्रत्येक मिल के आसपास कम से कम 5 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती सुनिश्चित करने की योजना है। हालांकि, पुरानी मिलों के पुनरुद्धार में मशीनरी अपडेट, फंडिंग और पर्यावरण मानकों का पालन चुनौतियां हैं, लेकिन सहकारी मॉडल और केंद्र से सहयोग से इन्हें पार किया जा सकता है।



