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Thyroid Symptoms: थायरॉइड के 7 शुरुआती संकेत, इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें, समय पर जांच से बच सकती है बड़ी बीमारी

Thyroid Symptoms: आज की तेज रफ्तार वाली जिंदगी में सेहत की कई समस्याएं आम हो गई हैं। इनमें से एक है थायरॉइड की समस्या। थायरॉइड गले में तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल, हार्ट बीट, तापमान और हार्मोन को नियंत्रित करती है। अगर यह ग्रंथि ठीक से काम न करे, तो पूरे शरीर पर असर पड़ता है। भारत में लाखों लोग थायरॉइड से पीड़ित हैं, खासकर महिलाएं। अच्छी बात यह है कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर और समय पर जांच करवाकर इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।

अगर आपको बेवजह थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना या मूड में बदलाव जैसी शिकायतें हैं, तो यह थायरॉइड का संकेत हो सकता है। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। आइए, थायरॉइड के 7 शुरुआती संकेतों को विस्तार से समझते हैं।

1. बेवजह थकान और कमजोरी का लगना

थायरॉइड की सबसे आम शिकायत है हमेशा थका-थका महसूस करना। अगर आप पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुबह उठकर ताजगी नहीं महसूस करते और दिन भर सुस्ती रहती है, तो यह हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड कम काम करना) का संकेत हो सकता है। शरीर में एनर्जी बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। छोटा-मोटा काम करने पर भी थकान हो जाती है। कई लोग इसे काम का तनाव समझते हैं, लेकिन अगर यह लक्षण महीनों से है, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।

2. वजन का बिना कारण बढ़ना या घटना

थायरॉइड का दूसरा बड़ा लक्षण है वजन में अचानक बदलाव। अगर आप खान-पान और व्यायाम में कोई बदलाव नहीं किए, फिर भी वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो यह हाइपोथायरॉइडिज्म का संकेत है। मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे कैलोरी जल्दी नहीं जलती और फैट जमा होने लगता है। वहीं, अगर ज्यादा खाने के बावजूद वजन घट रहा है, तो यह हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड ज्यादा काम करना) का लक्षण है। दोनों ही स्थिति में शरीर असंतुलित हो जाता है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।

3. बालों का तेजी से झड़ना और त्वचा का रूखा होना

थायरॉइड की समस्या में बाल बहुत प्रभावित होते हैं। बाल पतले, कमजोर और रूखे हो जाते हैं। कंघी करते ही मुट्ठी भर बाल हाथ में आ जाते हैं। त्वचा भी रूखी और बेजान हो जाती है। एड़ियां फटने लगती हैं, होंठ सूखते हैं और नाखून कमजोर हो जाते हैं। कई लोग महंगे शैंपू और क्रीम लगाते रहते हैं, लेकिन फायदा नहीं होता। अगर आपके साथ भी ऐसा है, तो थायरॉइड टेस्ट करवाना जरूरी है। यह लक्षण महिलाओं में जल्दी नजर आता है।

4. मूड में बार-बार बदलाव और चिड़चिड़ापन

थायरॉइड हार्मोन दिमाग पर भी असर डालते हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म में डिप्रेशन, चिंता, भूलने की आदत और उदासी जैसी समस्या होती है। छोटी बात पर रोना आ जाता है। वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्म में चिड़चिड़ापन, घबराहट और नींद न आने की शिकायत रहती है। रात भर करवटें बदलते रहते हैं। कई लोग इसे मानसिक तनाव समझते हैं, लेकिन यह थायरॉइड का लक्षण भी हो सकता है। परिवार वाले भी परेशान हो जाते हैं कि व्यक्ति पहले जैसा क्यों नहीं रहा।

5. ठंड या गर्मी का असामान्य लगना

थायरॉइड शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है। हाइपोथायरॉइडिज्म में व्यक्ति को हमेशा ठंड लगती है। सर्दियों में हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे रहते हैं। गर्म कपड़े पहनने पर भी राहत नहीं मिलती। वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्म में गर्मी ज्यादा लगती है। पसीना बहुत आता है, भले ही मौसम सामान्य हो। अगर घर के बाकी लोग सामान्य महसूस कर रहे हों और आपको अलग लग रहा हो, तो यह थायरॉइड का संकेत है।

6. महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता

महिलाओं में थायरॉइड की समस्या सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कभी ज्यादा ब्लीडिंग, कभी कम, कभी देर से आना या जल्दी आ जाना। कई महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत होती है। अगर पहले पीरियड्स नियमित थे और अब बदलाव आया है, तो थायरॉइड टेस्ट जरूर करवाएं। गर्भवती महिलाओं में थायरॉइड का असर बच्चे पर भी पड़ता है, इसलिए विशेष ध्यान रखें।

7. गर्दन में सूजन या गले में अटकन का अहसास

थायरॉइड ग्रंथि गर्दन में होती है। अगर यह बढ़ जाए (गॉइटर कहते हैं), तो गर्दन में सूजन दिखाई देती है। गले में कुछ अटकने जैसा महसूस होता है। निगलने में दिक्कत या आवाज भारी हो जाना भी लक्षण है। कई बार यह सूजन बाहर से नहीं दिखती, लेकिन अंदर से दबाव महसूस होता है। यह दोनों प्रकार के थायरॉइड में हो सकता है। अगर गर्दन पर हाथ रखकर सूजन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

थायरॉइड क्यों होती है और जोखिम किसे ज्यादा?

थायरॉइड की समस्या कई कारणों से होती है

  • आयोडीन की कमी
  • ऑटोइम्यून डिसीज (शरीर खुद ग्रंथि पर हमला करता है)
  • जेनेटिक (परिवार में किसी को हो तो जोखिम ज्यादा)
  • तनाव, गलत खान-पान
  • गर्भावस्था या मेनोपॉज के बाद

महिलाओं में पुरुषों से 5-8 गुना ज्यादा होती है। 30 साल के बाद जोखिम बढ़ जाता है।

जांच और इलाज कैसे होता है?

  • टेस्ट: TSH, T3, T4 का ब्लड टेस्ट। बहुत साधारण और सस्ता टेस्ट है।
  • इलाज: दवाओं से आसानी से कंट्रोल हो जाता है। हाइपो में थायरॉइड हार्मोन की गोली, हाइपर में दवा जो ग्रंथि को शांत करे।
  • जिंदगी भर दवा खानी पड़ सकती है, लेकिन कोई दिक्कत नहीं होती। लाखों लोग दवा लेकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

Thyroid Symptoms: घरेलू उपाय और सावधानियां

  • आयोडीन युक्त नमक खाएं।
  • हरी सब्जियां, दूध, दही, अंडा, नट्स लें।
  • तनाव कम करें, योग और व्यायाम करें।
  • ज्यादा प्रोसेस्ड फूड न खाएं।
  • नियमित जांच करवाएं।

थायरॉइड के लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें। शुरुआती इलाज से डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, बांझपन जैसी बड़ी बीमारियां रुक सकती हैं। अपनी और परिवार की सेहत का ध्यान रखें। अगर कोई लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से मिलें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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