Jharkhand Politics: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) और झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। विवाद की शुरुआत उद्योगपति गौतम अदाणी की देवघर यात्रा से हुई। पप्पू यादव ने 22 फरवरी को एक पोस्ट में निशिकांत दुबे पर उद्योगपतियों के एजेंट होने और नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया। इस पर निशिकांत दुबे ने जोरदार पलटवार करते हुए दावा किया कि संसद सत्र के दौरान पप्पू यादव खुद उनसे मिलने आए थे और भाजपा में शामिल कराने की विनती की थी। दुबे ने उन्हें “अंगूर खट्टे हैं” वाली कहावत सुनाते हुए राजनीतिक मर्यादा रखने की नसीहत दी। यह विवाद पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा और भाजपा से जुड़ी पुरानी अफवाहों को फिर से चर्चा में ले आया है।
अदाणी की देवघर यात्रा से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 22 फरवरी 2026 को पप्पू यादव के एक X पोस्ट से हुई। उन्होंने उद्योगपति गौतम अदाणी की देवघर यात्रा का जिक्र करते हुए लिखा:
“देवघर में आज अदाणी मंदिर आए थे, फिर वह उद्योगपतियों के एक एजेंट MP के यहां गए! उद्योगपतियों की दलाली और नेहरू गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाना उस सांसद का मुख्य धंधा है, इस भेंट से साफ है गांधी जी, नेहरू जी, राहुल जी, इंदिरा जी आदि के विरुद्ध दुष्प्रचार का निवेशक कौन है!”
हालांकि पप्पू यादव ने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट था कि वे झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर इशारा कर रहे थे। देवघर गोड्डा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और निशिकांत दुबे यहां के सांसद हैं।
गौतम अदाणी 22 फरवरी को देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे थे। दर्शन के बाद उन्होंने निशिकांत दुबे से शिष्टाचार भेंट की। यह एक सामान्य राजनीतिक शिष्टाचर है जब कोई प्रमुख व्यक्ति किसी सांसद के क्षेत्र में आता है।
लेकिन पप्पू यादव ने इस भेंट को एक गहरे राजनीतिक और आर्थिक गठजोड़ के रूप में प्रस्तुत किया और निशिकांत दुबे पर “उद्योगपतियों की दलाली” का आरोप लगाया।
निशिकांत दुबे का करारा जवाब

निशिकांत दुबे ने पप्पू यादव के आरोपों को खारिज करते हुए उसी दिन एक पलटवार पोस्ट किया। उन्होंने लिखा:
“अभी संसद सत्र के दौरान मुझसे यही सज्जन लोकसभा के अंदर मुझसे मिलने आए थे, एक ही इनकी विनती थी कि मुझे भाजपा में शामिल करवा दीजिए। अंगूर खट्टे हैं, कुछ तो दिन ईमान होना चाहिए? आपके चुनाव क्षेत्र में हमारे परिवार की कितनी जमींदारी है, यह भी लोगों को बताइए, कांग्रेस पार्टी से मेरा भाई पूर्णिया से विधायक रहे, यह भी बताइए। राजनीति की मर्यादा रखिए।”
यह जवाब कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
भाजपा जॉइनिंग का दावा: निशिकांत दुबे ने दावा किया कि हाल के संसद सत्र में पप्पू यादव खुद उनसे मिलने आए थे और भाजपा में शामिल होने की विनती की थी। यह एक गंभीर आरोप है जो पप्पू यादव की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
“अंगूर खट्टे हैं”: दुबे ने एक मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा कि जब भाजपा में शामिल होने की बात नहीं बनी तो अब पप्पू यादव उन पर आरोप लगा रहे हैं।
पूर्णिया में जमींदारी: दुबे ने बताया कि उनके परिवार की पूर्णिया (पप्पू यादव का लोकसभा क्षेत्र) में जमींदारी है, जो दोनों के बीच एक स्थानीय कनेक्शन दर्शाता है।
कांग्रेस कनेक्शन: उन्होंने यह भी बताया कि उनका भाई कांग्रेस पार्टी से पूर्णिया से विधायक रहे हैं। यह दर्शाता है कि दुबे परिवार की राजनीतिक जड़ें पूर्णिया में भी हैं।
राजनीतिक मर्यादा की अपील: अंत में दुबे ने पप्पू यादव से राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
पप्पू यादव और भाजपा “पुरानी अफवाहें फिर चर्चा में”
निशिकांत दुबे के दावे ने पप्पू यादव और भाजपा के बीच के पुराने संबंधों और अफवाहों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
2015: आरजेडी से निष्कासन: पप्पू यादव 2015 तक राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से जुड़े थे। लेकिन पार्टी अनुशासन के मुद्दे पर उन्हें निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे भाजपा से संपर्क कर रहे हैं।
उस समय की खबरों के मुताबिक, पप्पू यादव भाजपा में शामिल होने या गठबंधन करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई गठबंधन नहीं होगा।
2024: कांग्रेस में विलय और फिर निर्दलीय: मार्च 2024 में पप्पू यादव ने अपनी जन अधिकार पार्टी को कांग्रेस में विलय कर दिया। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में सीट बंटवारे के कारण आरजेडी ने पूर्णिया सीट पर अपना दावा किया।
कांग्रेस ने आरजेडी के दबाव में पप्पू यादव को टिकट नहीं दिया। फलस्वरूप, पप्पू यादव ने पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए।
हाल के विवाद: हाल के महीनों में पप्पू यादव ने भाजपा की कड़ी आलोचना की है:
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अक्टूबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के सीट बंटवारे पर भाजपा को नीतीश कुमार को कमजोर करने का आरोप लगाया
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जनवरी 2026 में भाजपा को “बहुत जलील पार्टी” कहा और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए
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भाजपा-आरएसएस पर दलितों से नफरत का आरोप लगाया
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नीतीश कुमार को महागठबंधन में वापस आने का न्योता दिया
लेकिन कई मौकों पर पप्पू यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करते नजर आए, जिससे राजनीतिक अटकलें बढ़ीं।
राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?
राजनीतिक विश्लेषक ओमप्रकाश अश्क का मानना है कि यह विवाद बिहार की जटिल राजनीति का हिस्सा है। उनका कहना है, “2025 विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव रहा है। भाजपा और जेडीयू के बीच खींचतान सार्वजनिक है। इस संदर्भ में, पप्पू यादव जैसे स्वतंत्र सांसद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।”
वे आगे कहते हैं, “पप्पू यादव एक तरफ खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हैं और राहुल गांधी की प्रशंसा करते हैं। दूसरी तरफ, वे नीतीश कुमार को भी साधने की कोशिश करते हैं। उनकी राजनीति अवसरवादी दिख सकती है, लेकिन यह बिहार की राजनीतिक वास्तविकता भी है।”
“निशिकांत दुबे का भाजपा जॉइनिंग वाला दावा यदि सच है, तो यह पप्पू यादव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।”
Jharkhand Politics: नेहरू-गांधी परिवार की रक्षा में पप्पू यादव
पप्पू यादव के मूल आरोप का केंद्रबिंदु यह था कि निशिकांत दुबे नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए उद्योगपतियों से फंडिंग लेते हैं।
यह सच है कि निशिकांत दुबे संसद में अक्सर नेहरू-गांधी परिवार पर हमलावर रहते हैं। वे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के फैसलों की आलोचना करते रहे हैं। पप्पू यादव ने खुद को नेहरू-गांधी परिवार का रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है। वे राहुल गांधी की तारीफ करते हैं और महागठबंधन की जीत की बात करते हैं।
लेकिन उनकी अपनी राजनीतिक यात्रा इतनी सीधी नहीं है। आरजेडी से निकाले जाने, भाजपा से जुड़ने की अफवाहें, फिर कांग्रेस में शामिल होना, और अंततः निर्दलीय चुनाव लड़ा करना – यह सब उनकी छवि को जटिल बनाता है।
यह विवाद बिहार और झारखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि पप्पू यादव निशिकांत दुबे के भाजपा जॉइनिंग वाले दावे का क्या जवाब देते हैं।



