Amit Shah in Bihar: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बिहार दौरे की तैयारी जोरों पर है। 26 फरवरी को उनके किशनगंज आने की प्रबल संभावना है। गृहमंत्री वाइब्रेंट विलेज योजना (प्रगतिशील ग्राम योजना) की समीक्षा करेंगे और भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों का निरीक्षण करेंगे। जिला प्रशासन ने नेपाल बॉर्डर से सटे 22 गांवों को चिह्नित कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इन गांवों में ठाकुरगंज प्रखंड के 6, टेढ़ागाछ के 7 और दिघलबैंक के 9 गांव शामिल हैं। विदेशी घुसपैठ को रोकने के लिए खुफिया विभाग, पुलिस, सेना और IB के साथ साझा रणनीति बनाई जा रही है।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन सीमावर्ती गांवों में सड़क, दूरसंचार, शिक्षा, स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। युवाओं को रोजगार और कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे भटकाव से बचें। पूर्णिया के IG विवेकानंद और SP संतोष कुमार ने बॉर्डर इलाके का जायजा लिया है। DM विशाल राज ने सभी विभागों के साथ समेकित योजना तैयार की है।
22 सीमावर्ती गांवों में होगा विकास कार्य

केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत किशनगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे 22 गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे।
- ठाकुरगंज प्रखंड के 6 गांव: भेंदराही, ग्वालटोली, चुरली, सुखानी, भातगांव और झुलझुली।
- टेढ़ागाछ प्रखंड के 7 गांव: राहपुर, झाला, पिपरा, बरिया, चिचौरा, कंचनबाड़ी और झुलनबाड़ी।
- दिघलबैंक प्रखंड के 9 गांव: टप्पू, बैजनाथ पलसा, मलटोली, लोहागड़ा, पाचगछी, डोरिया, सिंघीमारी, तुलसिया और धनतोला।
इन 22 गांवों को वर्ष 2028-29 तक पूरी तरह से बदल दिया जाएगा। यहां बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास होगा और जीवन स्तर में सुधार लाया जाएगा। भारत सरकार ने पहले चरण में बिहार के सात जिलों के साथ देशभर के 662 गांवों का चयन किया है। आने वाले समय में यह योजना 2,967 गांवों में चलाई जाएगी।
क्या है वाइब्रेंट विलेज योजना?
वाइब्रेंट विलेज योजना (Vibrant Village Programme) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक केंद्रीय वित्तपोषित योजना है। इसका उद्देश्य देश की सीमाओं से सटे गांवों का समग्र विकास करना है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:
- सीमावर्ती गांवों का विकास: सीमा पर स्थित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास करना।
- निवासियों के जीवन स्तर में सुधार: स्थानीय लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर प्रदान करना।
- पलायन रोकना: विकास के माध्यम से युवाओं का पलायन रोकना और उन्हें गांव में ही रोजगार देना।
- सीमा सुरक्षा मजबूत करना: विकसित गांवों से सीमा सुरक्षा स्वतः मजबूत होती है क्योंकि स्थानीय लोग सीमा की निगरानी में मदद करते हैं।
- घुसपैठ रोकना: सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास से विदेशी घुसपैठ की समस्या कम होती है।
किन क्षेत्रों में होगा विकास
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चिन्हित 22 गांवों में निम्नलिखित क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे:
- सड़क संपर्क: सभी गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा ताकि आवागमन आसान हो।
- दूरसंचार कनेक्टिविटी: मोबाइल टॉवर और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी।
- शिक्षा: स्कूलों का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा। शिक्षकों की नियुक्ति और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
- स्वास्थ्य: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, चिकित्सकों की नियुक्ति और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- रोजगार के अवसर: स्थानीय लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
- बिजली: 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
- पेयजल: स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
- पर्यटन: स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देकर आय के नए स्रोत विकसित किए जाएंगे।
- सहकारी समितियां: किसानों और महिलाओं के लिए सहकारी समितियां, SHG और FPO का गठन किया जाएगा।
युवाओं के भटकाव को रोकने पर फोकस
सीमावर्ती क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या युवाओं का भटकाव है। रोजगार और अवसरों की कमी के कारण युवा या तो पलायन कर जाते हैं या गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। कुछ युवा अवैध गतिविधियों, तस्करी या अन्य अपराधों में लिप्त हो जाते हैं।
वाइब्रेंट विलेज योजना का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं को सही दिशा दिखाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- कौशल विकास प्रशिक्षण: युवाओं को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित किया जाएगा जैसे कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, कृषि तकनीक आदि।
- स्वरोजगार के अवसर: प्रशिक्षित युवाओं को ऋण और सहायता प्रदान कर स्वरोजगार स्थापित करने में मदद की जाएगी।
- खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां: युवाओं को खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल कर उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जाएगा।
- जागरूकता कार्यक्रम: युवाओं को अवैध गतिविधियों के परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
घुसपैठ रोकने की बनेगी साझा रणनीति
किशनगंज जिले की भारत-नेपाल सीमा से विदेशी घुसपैठ एक गंभीर समस्या रही है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के इस मार्ग से भारत में प्रवेश करने की कई रिपोर्ट आती रही हैं।
गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खुफिया विभाग, पुलिस, सेना (SSB – सशस्त्र सीमा बल), और IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के साथ साझा रणनीति बनाई जाएगी।
इस रणनीति में निम्नलिखित शामिल होंगे:
- सीमा पर निगरानी बढ़ाना: CCTV कैमरे, ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग।
- गश्त बढ़ाना: सीमा पर नियमित और यादृच्छिक गश्त।
- स्थानीय लोगों को शामिल करना: सीमावर्ती गांवों के लोगों को संवेदनशील बनाना और उन्हें किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना।
- दस्तावेजों की जांच: स्थानीय आबादी के दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करना।
- समन्वय: सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण।
Amit Shah in Bihar: तैयारी पूरी, अधिकारियों ने लिया जायजा
गृहमंत्री के संभावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयारी में जुट गई हैं। पूर्णिया रेंज के IG विवेकानंद और किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) संतोष कुमार ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र का व्यापक जायजा लिया है। उन्होंने चयनित 22 गांवों की स्थिति का भी निरीक्षण किया है।
जिलाधिकारी (DM) विशाल राज ने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की है। सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं और उन्हें समेकित कर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। यह कार्ययोजना गृहमंत्री को प्रस्तुत की जाएगी। इसमें प्रत्येक गांव के लिए विशिष्ट योजनाएं, बजट, समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं।
DM विशाल राज ने कहा, “अभी गृहमंत्री के आने की सिर्फ संभावना है। जिसकी तैयारी की जा रही है। विस्तृत कार्यक्रम अभी नहीं आया है। लेकिन हम पूरी तरह तैयार हैं।”
गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा किशनगंज जिले के सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। वाइब्रेंट विलेज योजना से इन उपेक्षित क्षेत्रों में विकास की नई किरण फूटेगी और स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।



