SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की सुनवाई के दौरान मंगलवार को कई जगहों पर बड़े पैमाने पर हंगामा हुआ। लोगों ने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान उन्हें परेशान किया जा रहा है और घंटों कतार में खड़ा रखा जा रहा है। इस विरोध के दौरान दक्षिण और उत्तर चौबीस परगना जिलों में बीडीओ कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। कई इलाकों में टायर जलाकर सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं।
बासंती में बीडीओ कार्यालय में तोड़फोड़
दक्षिण चौबीस परगना जिले के बासंती इलाके में सुनवाई केंद्र के रूप में खोले गए बीडीओ कार्यालय में कुछ लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्हें सुबह से बुलाकर देर शाम तक कतार में खड़ा रखा जा रहा है। कई लोगों को तो पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी सुनवाई का मौका नहीं मिला।
गुस्साए लोगों ने कार्यालय के फर्नीचर और कुछ उपकरणों को नुकसान पहुंचाया। कार्यालय में तैनात कर्मचारियों को भी धमकाया गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस बल को बुलाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
संदेशखाली में भी हुआ हंगामा

उत्तर चौबीस परगना जिले के संदेशखाली-1 नंबर बीडीओ कार्यालय में भी इसी तरह की घटना हुई। यहां भी लोगों ने परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा है और हर बार अलग-अलग दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
संदेशखाली पहले से ही विवादों में रहा है। यहां पिछले साल भी राजनीतिक तनाव देखा गया था। अब SIR की सुनवाई को लेकर फिर से यहां हालात बिगड़ गए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर उन्हें परेशान किया जा रहा है ताकि उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें।
ढोलाहाट में सड़कें अवरुद्ध
दक्षिण चौबीस परगना जिले के ढोलाहाट इलाके में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर सड़कें अवरुद्ध कर दीं। घंटों तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि उन्हें न्याय चाहिए। उनका कहना था कि वे वैध मतदाता हैं लेकिन उन्हें साजिश के तहत परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने लंबी बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों को समझाया और सड़कें खुलवाईं। पुलिस ने आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों को उपयुक्त अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
हल्दिया में अल्पसंख्यकों का आरोप
पूर्व मेदिनीपुर जिले के हल्दिया इलाके के देभोग ग्राम पंचायत में अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ निवासियों ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें साजिश के तहत SIR की सुनवाई का नोटिस भेजा गया है। उनका परिवार यहां पीढ़ियों से रह रहा है लेकिन अचानक उनके नाम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इन लोगों ने कहा कि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं। उनके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सभी प्रमाण हैं जो उनकी नागरिकता साबित करते हैं। फिर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं राजनीतिक कारणों से उनके नाम मतदाता सूची से न हटा दिए जाएं।
हुगली में तृणमूल का विरोध
हुगली जिले के पोलबा इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने फॉर्म-7 लेकर विरोध प्रदर्शन किया। फॉर्म-7 वह फॉर्म है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया जाता है।
तृणमूल कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के लोग अलोकतांत्रिक तरीके से फॉर्म-7 जमा करके वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मतदाताओं के साथ धोखा है। जो लोग वास्तव में वैध मतदाता हैं उनके नाम राजनीतिक कारणों से हटाए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही निर्वाचन आयोग को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि SIR प्रक्रिया के तहत तार्किक विसंगतियों की श्रेणी में रखे गए लोगों का सत्यापन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि इस प्रक्रिया में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या तनाव न हो। अदालत ने कहा था कि जिन लोगों के नाम तार्किक विसंगतियों के कारण प्रभावित हुए हैं उन्हें उचित मौका दिया जाए। उन्हें अपना पक्ष रखने और दस्तावेज जमा करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
लेकिन जमीनी स्तर पर जो हो रहा है वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बिल्कुल विपरीत दिख रहा है। लोगों को परेशान किया जा रहा है और उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा है।
पुलिस की भूमिका
विभिन्न जगहों पर हुई इन घटनाओं के बाद पुलिस बल को तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाया और उनसे शांत रहने की अपील की। पुलिस ने कहा कि उनकी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि किसी को गलत तरीके से परेशान नहीं किया जाएगा। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने अनुचित व्यवहार किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन प्रदर्शनकारियों को भी कानून व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए और हिंसा नहीं करनी चाहिए।
SIR in Bengal: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरे मामले में राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश कर रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि राज्य में फर्जी मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है और SIR से उनकी पहचान हो रही है।
यह मामला आगामी चुनावों को देखते हुए और भी संवेदनशील हो गया है। दोनों पक्ष इसे अपने-बेहतर तरीके से पेश कर रहे हैं। लेकिन बीच में फंसे हुए हैं वे आम लोग जिन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बार-बार सुनवाई केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पहले से ही विवादों में है। अब मंगलवार को हुई इन घटनाओं ने विवाद को और बढ़ा दिया है। देखना होगा कि प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है।



