रांची-सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजी वार्ड में भर्ती अमन कुमार मिश्रा (20 वर्ष) ने सोमवार को इलाज के क्रम में दम तोड़ दिया. मरीज पलामू जिले के पांकी का रहने वाला था. बेटे की मौत की सूचना पाकर मां की भी तबीयत बिगड़ गयी. बेसुध होने पर उन्हें भी आईसीयू में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने बताया कि मरीज एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित था. समय से इलाज नहीं होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका. परिजनों ने मरीज की मौत पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और इसकी शिकायत अस्पताल के वरीय पदाधिकारियों से की. परिजन इस कदर बदहवास थे कि एहतियातन सदर अस्पताल प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी.
एप्लास्टिक एनीमिया नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था मरीज-डॉ बिमलेश
एनआईटी के छात्र अमन को 18 जनवरी को मेडिका अस्पताल से सदर अस्पताल लाया गया था. इस मामले में सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ बिमलेश कुमार सिंह ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही के आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि मरीज एप्लास्टिक एनीमिया नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था. उसे मेडिका अस्पताल से यहां लाया गया था. उसका इलाज हेमेटोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक कर रहे थे. मरीज का ब्लड और प्लेटलेट्स बहुत कम था.
मृतक के चाचा ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया
मृतक के चाचा कौशल मिश्रा ने बताया कि पहले निजी अस्पताल में लाखों खर्च हुआ. डॉक्टर के आश्वासन के बाद भतीजे को सदर अस्पताल में भर्ती कराया. एक से सवा लाख की दवा बाहर से मंगवायी गयी और 58 हजार रुपए की जांच करायी गयी. जब अमन की तबीयत बिगड़ने लगी, तो डॉक्टर के कहने पर अस्पताल के वार्ड में ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को ऑक्सीजन देने नहीं आ रहा था और पूरा सिस्टम नीचे से लीक कर रहा था. सूचना देने के बावजूद डॉ अभिषेक कई घंटे बाद अस्पताल पहुंचे. परिजनों ने अस्पतालकर्मियों पर अभद्रता और अव्यवस्था का आरोप लगाया.
डॉक्टर ने आरोप को बताया गलत
सदर अस्पताल में इलाज कर रहे हेमेटोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक रंजन ने मीडिया को बताया कि गंभीर बीमारी और इलाज के दौरान होने वाले जोखिम के बारे में सारी जानकारी परिजनों को दे दी गयी थी. रविवार होने के बावजूद वे मरीज को देखने और इलाज करने सदर अस्पताल आये थे. मरीज का बोन मैरो पूरी तरह से ड्राई हो गया था. खून और प्लेटलेट्स में कमी आ गयी थी, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है. उन्होंने बताया कि मरीज को संक्रमण से बचाने के लिए इलाज जनरल वार्ड में किया जा रहा था. हालत ज्यादा गंभीर होने पर ही मरीज को आईसीयू में ले जाया जाता है. उन्होंने बताया कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गयी है. सदर अस्पताल पर भरोसा जताते हुए ब्लड डिसऑर्डर के करीब 25 मरीज अभी भी इस वार्ड में इलाजरत हैं.
क्या होता है एप्लास्टिक एनीमिया
एप्लास्टिक एनीमिया दुर्लभतम श्रेणी की अतिगंभीर बीमारी है. इस बीमारी से ग्रसित मरीज के शरीर में पर्याप्त ब्लड सेल यानी रक्त कोशिकाओं का बनना बंद हो जाता है. रक्त-मज्जा या बोनमैरो क्षतिग्रस्त हो जाता है. परिणामस्वरूप मरीज में अत्यधिक थकान, ब्लड इंफेक्शन का उच्च जोखिम और अनियंत्रित ब्लीडिंग होने लगता है. ऐसे में स्वस्थ व्यक्ति से बोनमैरो लेकर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है.

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