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बंगाल में एसआईआर फॉर्म भरे वाहन को किया गया जब्त, भाजपा के दो कार्यकर्ता हुए गिरफ्तार

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया। खतड़ा इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक वाहन को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस वाहन में करीब 3,000 फॉर्म-7 भरे हुए मिले। यह फॉर्म मतदाता सूची में संशोधन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस घटना में पुलिस ने भाजपा के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

यह मामला राज्य में राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, भाजपा ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया और फॉर्म जबरन छीन लिए गए।

तृणमूल कार्यकर्ताओं ने वाहन रोककर पुलिस को सौंपा

बांकुड़ा जिले के खतड़ा इलाके में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। जब उन्होंने वाहन की जांच की तो उसमें एसआईआर के करीब 3,000 फॉर्म-7 मिले। यह फॉर्म भरे हुए थे और एक साथ ले जाए जा रहे थे। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने तुरंत इस वाहन को पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना में दो भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सभी फॉर्मों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म एक साथ क्यों भरे गए थे।

फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी का नाम शामिल किए जाने का विरोध करने या किसी मृत या स्थानांतरित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए किया जाता है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म भरना और ले जाना संदेह पैदा करता है।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता इन फॉर्मों का गलत इस्तेमाल करके वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रच रहे थे। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए इस साजिश को नाकाम कर दिया है।

पुलिस ने बताया कि वह सभी फॉर्मों की विस्तृत जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि इन फॉर्मों में किन-किन लोगों के नाम दर्ज हैं और क्या ये सभी लोग वास्तव में मृत हैं या उन्होंने अपना स्थान बदला है। इस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर भाजपा कार्यकर्ता ले जा रहे थे। उनका एकमात्र उद्देश्य वैध मतदाताओं के नाम हटाना था। ममता बनर्जी ने तृणमूल कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा की इस साजिश को नाकाम कर दिया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल वैध मतदाताओं के मताधिकार को छीनने की कोशिश कर रहे हैं। यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करती रही है। पार्टी किसी भी ऐसी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी जो लोगों के मताधिकार को प्रभावित करे। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें।

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी राजनीतिक दल मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ न कर सके। लोकतंत्र में हर नागरिक को वोट डालने का अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा करना जरूरी है।

ममता बनर्जी ने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार इस मामले की गहन जांच कराएगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी की गलती साबित होती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भाजपा ने सभी आरोपों को किया खारिज

वहीं, भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और भाजपा नेता सुभाष सरकार ने कहा कि तृणमूल इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के बीएलए यानी बूथ स्तरीय एजेंट जो बीएलओ यानी बूथ स्तरीय अधिकारी को फॉर्म-7 जमा नहीं करा पाए थे, वे उन्हें ईआरओ यानी चुनाव पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय में जमा कराने जा रहे थे।

सुभाष सरकार ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनकी पिटाई की और फॉर्म जबरन छीन लिए। यह एक राजनीतिक साजिश है जिसका उद्देश्य भाजपा को बदनाम करना है।

भाजपा नेता ने कहा कि फॉर्म-7 भरना और जमा कराना पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया है। किसी भी नागरिक या राजनीतिक दल के कार्यकर्ता को यह अधिकार है कि वे मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों या मृत व्यक्तियों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भर सकें। इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। पार्टी ने कहा कि विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को उनका काम करने से रोका जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

भाजपा ने अपने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। पार्टी ने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी है। भाजपा ने इस मामले को चुनाव आयोग के सामने भी उठाने का फैसला किया है।

West Bengal News: चुनाव आयोग ने की स्पष्टता

West Bengal News: BLO's with SIR Form
West Bengal News: BLO’s with SIR Form

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता प्रदान की है। चुनाव आयोग ने कहा है कि फॉर्म उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध है। कोई भी मतदाता फॉर्म-7 जमा कर सकता है। यह एक सामान्य और कानूनी प्रक्रिया है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 जमा करने मात्र से किसी का नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं हो जाता। फॉर्म में दी गई जानकारी के आधार पर दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किसी का नाम मतदाता सूची से बाहर किया जाता है। यह एक विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, जब कोई फॉर्म-7 जमा किया जाता है तो संबंधित अधिकारी पहले उसमें दी गई जानकारी की जांच करते हैं। अगर फॉर्म में यह दावा किया गया है कि कोई व्यक्ति मृत हो गया है तो उसका मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा जाता है। अगर यह कहा गया है कि व्यक्ति ने अपना पता बदल लिया है तो उसकी जांच की जाती है।

इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाता है। उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है। अगर व्यक्ति जवाब देता है और साबित करता है कि वह अभी भी उसी पते पर रहता है तो उसका नाम मतदाता सूची में बना रहता है। केवल पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही किसी का नाम हटाया जाता है।

चुनाव आयोग ने कहा कि वह मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, वह यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम गलती से न हटाया जाए। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है। बंगाल में यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

यह घटना राज्य में राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है। आने वाले समय में चुनाव की तैयारियों के बीच यह मुद्दा और गरमा सकता है। दोनों पार्टियां इस मामले को अपने-अपने तरीके से उठा रही हैं। जनता यह देख रही है कि आखिर सच्चाई क्या है और इस मामले में किसका पक्ष सही है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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