West Bengal Election: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में कॉलेज स्ट्रीट पर इकट्ठा हुए और ‘गो बैक अमित शाह’ के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री का पुतला भी फूंका। यह विरोध उस समय हुआ जब अमित शाह 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में भाजपा की रैली को संबोधित करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कोलकाता पहुंचे थे।
कांग्रेस का जोरदार विरोध प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट इलाके में एकत्रित हुए। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की।
‘गो बैक अमित शाह’, ‘अमित शाह वापस जाओ’ और ‘भाजपा वापस जाओ’ जैसे नारे लगाए गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री पर झूठ फैलाने और बंगाल की जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला बनाया और उसे फूंक दिया। यह कार्रवाई उनके आक्रोश को दर्शाती है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अमित शाह बंगाल में नफरत और विभाजन की राजनीति फैला रहे हैं।
शुभंकर सरकार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल की जनता भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को खारिज करती है। बंगाल में प्रेम, सद्भाव और विकास की राजनीति चलती है।
कांग्रेस ने क्यों किया विरोध
कांग्रेस ने अमित शाह के बंगाल दौरे का विरोध कई कारणों से किया। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्री बार-बार बंगाल आकर झूठे आरोप लगा रहे हैं और राज्य सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अमित शाह घुसपैठ का मुद्दा उठाकर बंगाल की जनता को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल चुनावी राजनीति के लिए है। असल में केंद्र सरकार ही सीमा सुरक्षा में नाकाम रही है।
कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भाजपा धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही है। बंगाल में हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बनाकर वोट बटोरना चाहती है। लेकिन बंगाल की जनता बहुत समझदार है और इस चाल को समझती है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास में बाधा डाल रही है। राज्य का हक मार रही है। केंद्रीय योजनाओं का पैसा नहीं दे रही है।
अमित शाह का बंगाल दौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे थे। यह उनका बंगाल का कई दौरों में से एक था। भाजपा बंगाल में सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
अमित शाह ने कोलकाता में एक बड़ी रैली को संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि 2026 में भाजपा बंगाल में दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगी। टीएमसी और ममता बनर्जी का शासन खत्म हो जाएगा।
गृह मंत्री ने बंगाल सरकार पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममता सरकार बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है। इसलिए सीमा पर फेंसिंग नहीं होने दे रही है।
शाह ने वादा किया कि भाजपा सरकार बनते ही सभी घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा। एक मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड बनाई जाएगी। बंगाल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
टीएमसी का भी पलटवार
तृणमूल कांग्रेस ने भी अमित शाह के आरोपों का जवाब दिया। टीएमसी नेताओं ने कहा कि भाजपा के सभी दावे खोखले हैं। 2021 में भी इसी तरह के दावे किए गए थे, लेकिन परिणाम सबके सामने है।
बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि अमित शाह एक पर्यटक की तरह आते-जाते रहेंगे। इससे भाजपा को कोई फायदा नहीं होगा। 2026 में भाजपा 50 सीटें भी नहीं जीत पाएगी।
टीएमसी प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि अमित शाह जो दावे कर रहे हैं, वे सब झूठ हैं। भाजपा हर बार धर्म की राजनीति करती है। मंदिर-मस्जिद का मुद्दा बनाती है। लेकिन बंगाल की जनता इसे खारिज कर देती है।
टीएमसी का कहना है कि बंगाल में विकास हो रहा है। गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। ममता बनर्जी की लोकप्रियता बरकरार है। 2026 में भी टीएमसी की ही सरकार बनेगी।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
अमित शाह के दौरे और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से बंगाल में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। 2026 के चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बना रही हैं।
भाजपा का फोकस घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे पर है। पार्टी का मानना है कि यह मुद्दा उन्हें चुनाव जिताएगा। खासकर सीमावर्ती इलाकों में यह मुद्दा प्रभावी हो सकता है।
टीएमसी विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का दावा है कि राज्य में काफी विकास हुआ है। गरीबों को फायदा पहुंचा है।
कांग्रेस अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश में है। पार्टी कभी बंगाल में मजबूत स्थिति में थी, लेकिन अब काफी कमजोर हो गई है। 2026 में कांग्रेस की भूमिका क्या होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
विरोध प्रदर्शन में पुलिस की भूमिका
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती की गई थी। कोलकाता पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी सतर्कता बरती।
प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर रहने के लिए कहा गया। पुलिस ने सुनिश्चित किया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। किसी भी तरह की हिंसा न हो।
जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला फूंका तो पुलिस ने स्थिति को संभाला। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण में रखा गया। कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।
पुलिस ने यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया। प्रदर्शन की वजह से आम लोगों को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा गया।
बंगाल में चुनावी समीकरण
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 213 सीटें मिली थीं। भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी थी। कांग्रेस-वाम गठबंधन का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था।
2026 के चुनाव में समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा लगातार बंगाल में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को अच्छी सफलता मिली थी।
लेकिन विधानसभा चुनाव अलग होते हैं। स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार भी महत्वपूर्ण होते हैं। टीएमसी की जमीनी ताकत बहुत मजबूत है। बूथ स्तर पर पार्टी का संगठन बहुत अच्छा है।
कांग्रेस और वाम दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अगर वे एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो वोटों का बंटवारा कम हो सकता है। लेकिन अभी तक कोई ठोस गठबंधन नहीं बना है।
जनता की राय क्या है?
बंगाल की जनता इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों को बड़े ध्यान से देख रही है। लोग विभिन्न पार्टियों के दावों और वादों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि टीएमसी की सरकार ने अच्छा काम किया है। गरीबों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया है। विकास के काम हुए हैं।
वहीं कुछ लोगों को लगता है कि बदलाव की जरूरत है। लंबे समय तक एक ही पार्टी की सरकार रहने से भ्रष्टाचार बढ़ता है। नए नेतृत्व से राज्य को फायदा हो सकता है।
घुसपैठ का मुद्दा भी कुछ लोगों को चिंतित करता है। खासकर सीमावर्ती इलाकों में लोग इस पर चर्चा करते हैं। वे सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
विपक्षी एकता का सवाल
बंगाल में विपक्षी पार्टियों की एकता एक बड़ा सवाल है। भाजपा, कांग्रेस और वाम – सभी टीएमसी के विरोधी हैं, लेकिन उनमें आपस में भी मतभेद हैं।
कांग्रेस और वाम कभी गठबंधन में थे, लेकिन 2021 में उनका प्रदर्शन बहुत खराब रहा। दोनों को मिलाकर भी बहुत कम सीटें मिलीं। इसलिए अब वे अलग-अलग रणनीति बना रहे हैं। भाजपा अकेले चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उसकी ताकत काफी बढ़ गई है। गठबंधन की जरूरत नहीं है।
अगर विपक्षी पार्टियां एकजुट हो जाएं तो टीएमसी को चुनौती दे सकती हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। सभी अपनी-अपनी राह चल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
अमित शाह के दौरे और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की खबर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही। लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
भाजपा समर्थकों ने कहा कि कांग्रेस का विरोध निराशा को दर्शाता है। पार्टी जानती है कि उसका कोई भविष्य नहीं है। इसलिए ऐसे नाटक कर रही है।
टीएमसी समर्थकों ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह बंगाल में नफरत फैलाने आते हैं। उनका विरोध जरूरी है। कांग्रेस समर्थकों ने अपनी पार्टी के साहस की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही असली विपक्ष है। वही भाजपा का सामना कर सकती है।
कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक नाटक बताया। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां केवल वोट के लिए ड्रामा कर रही हैं। विकास की कोई बात नहीं करते।
West Bengal Election: आने वाले महीनों में क्या होगा
2026 के बंगाल चुनाव में अभी करीब तीन-चार महीने बाकी हैं। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। सभी पार्टियां पूरी ताकत लगाएंगी।
अमित शाह और अन्य भाजपा नेता बार-बार बंगाल आएंगे। रैलियां और जनसभाएं होंगी। पार्टी संगठन को मजबूत किया जाएगा। घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। टीएमसी भी अपनी तैयारियां तेज कर देगी। ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरेंगी। सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएंगी। नई योजनाओं की घोषणा हो सकती है।
कांग्रेस और वाम दल भी अपनी रणनीति बनाएंगे। वे अपने पुराने वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश करेंगे। कुछ नए मुद्दे उठाए जा सकते हैं।
बंगाल चुनाव इस बार होगा रोचक
कोलकाता में अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन बंगाल की गरमाती राजनीति का एक और उदाहरण है। 2026 का विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है और सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटी हैं।
‘गो बैक अमित शाह’ के नारे और पुतला दहन कांग्रेस के आक्रोश को दर्शाता है। पार्टी भाजपा की विभाजनकारी राजनीति का विरोध कर रही है। लेकिन कांग्रेस की अपनी स्थिति बंगाल में कमजोर है।
असली मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच दिखता है। दोनों पार्टियां जीत के दावे कर रही हैं। घुसपैठ, विकास, कल्याण – कई मुद्दे हैं। जनता अंततः किसे चुनती है, यह अप्रैल 2026 में पता चलेगा।
फिलहाल तो बंगाल की राजनीति पूरी गर्मी में है। आने वाले महीने और भी दिलचस्प होने वाले हैं।



