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बिहार में 11 फरवरी को बनेगा विश्व रिकॉर्ड, एक करोड़ जीविका दीदियों को एक दिन में फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य, मेगा अभियान शुरू

Bihar News: बिहार स्वास्थ्य विभाग ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 11 फरवरी 2026 को राज्य में मेगा अभियान चलाया जाएगा। इस दिन राज्य के करीब एक करोड़ जीविका दीदियों और उनके परिवार के सदस्यों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का हिस्सा है। विभाग का दावा है कि अगर यह लक्ष्य पूरा हुआ तो यह किसी भी पब्लिक हेल्थ कार्यक्रम में एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों को दवा देने का विश्व रिकॉर्ड होगा।

यह मेगा अभियान राज्य के 34 जिलों में 40 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थाओं के माध्यम से चलाया जाएगा। जीविका दीदियां (स्वयं सहायता समूह की महिलाएं) इस अभियान में मुख्य भूमिका निभाएंगी। एक करोड़ लोगों को दवा देने से राज्य के कुल लक्षित 8.97 करोड़ आबादी का 30 से 40 प्रतिशत कवरेज एक ही दिन में हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इसे बड़ी सफलता मान रहा है।

17 दिनों का सर्वजन दवा सेवन अभियान

Bihar News - lymphatic filariasis
Bihar News – lymphatic filariasis

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी से 28 फरवरी तक राज्य में सर्वजन दवा सेवन (Mass Drug Administration) अभियान चलेगा। इस दौरान कुल 8.97 करोड़ लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा दी जाएगी। 11 फरवरी को विशेष मेगा अभियान होगा। राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत ने बताया कि 17 दिनों में पूरी आबादी को कवर करने का लक्ष्य है।

अभियान में दो तरह की दवाएं दी जाएंगी:

  • 19 जिलों में दो दवाएं: अल्बेंडाजोल और डीईसी (डाइएथाइलकार्बामाजीन)

    • जिले: बांका, भागलपुर, पूर्वी-पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया, कैमूर, मुंगेर, सीतामढ़ी, सुपौल, सीवान, भोजपुर, बक्सर, मधुबनी, नालंदा, नवादा और पटना।

  • 15 जिलों में तीन दवाएं: आइवरमेक्टिन, अल्बेंडाजोल और डीईसी

    • जिले: औरंगाबाद, बेगूसराय, गया, जमुई, मुजफ्फरपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सहरसा, वैशाली, दरभंगा, लखीसराय, पूर्णिया, रोहतास और समस्तीपुर।

दवाएं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में दी जाएंगी। इससे दवा का सही सेवन सुनिश्चित होगा।

मेगा अभियान का लक्ष्य और महत्व

11 फरवरी को विशेष फोकस जीविका दीदियों पर रहेगा। ये महिलाएं ग्रामीण स्तर पर संगठित हैं। उनके परिवार के सदस्यों को भी दवा दी जाएगी। विभाग का अनुमान है कि एक करोड़ लोगों का कवरेज एक दिन में हो जाएगा। यह संख्या किसी भी स्वास्थ्य अभियान में एक दिन का सबसे बड़ा लक्ष्य होगा।

फाइलेरिया एक परजीवी बीमारी है जो मच्छरों से फैलती है। इसमें पैरों और अन्य अंगों में सूजन आ जाती है। बिहार में यह समस्या गंभीर है। दवा से बीमारी को रोका जा सकता है। अगर राज्य में लगातार कई साल दवा दी जाए तो फाइलेरिया उन्मूलन संभव है।

तैयारी और चुनौतियां

स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के लिए पूरी तैयारी की है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बूथ लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा और जीविका दीदियां दवा वितरण में शामिल होंगी। जागरूकता के लिए ग्राम स्तर पर मीटिंग और प्रचार किया जा रहा है।

विभाग का कहना है कि मेगा अभियान से राज्य में फाइलेरिया नियंत्रण की रफ्तार बढ़ेगी। अगर एक करोड़ लोग एक दिन में दवा ले लें तो यह विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बनेगा।

Bihar News: फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा क्यों जरूरी

फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा साल में एक बार लेनी जरूरी है। दवा से परजीवी मर जाते हैं और बीमारी नहीं फैलती। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को दवा दी जाती है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार लोगों को छूट मिलती है

बिहार में पिछले कई सालों से यह अभियान चल रहा है। अब मेगा अभियान से कवरेज बढ़ेगा। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य जल्द फाइलेरिया मुक्त हो। 11 फरवरी को बिहार स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा इतिहास रचने की तैयारी में है। एक करोड़ जीविका दीदियां और उनके परिवार इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। अगर लक्ष्य पूरा हुआ तो यह पब्लिक हेल्थ में विश्व रिकॉर्ड बनेगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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