Mumbai/GOA: 2013 के गोवा रेप केस में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने उन्हें दोषी करार दे दिया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को पलट दिया है। अब सजा पर बहस होगी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की बेंच ने गुरुवार को फैसला सुनाया। बेंच ने कहा, “हमने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है।”
कोर्ट ने तेजपाल को IPC की धाराओं 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी ठहराया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सजा सुनाए जाने के समय तेजपाल कोर्ट में मौजूद रहें। जस्टिस गोखले ने तेजपाल की कानूनी टीम से सजा की अवधि पर दलील रखने को कहा।
गोवा सरकार की अपील पर आया फैसला
ये फैसला गोवा सरकार की अपील पर आया है। मापुसा की सेशन कोर्ट ने मई 2021 में तेजपाल को “संदेह का लाभ” देकर बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते फैसला सुरक्षित रख लिया था।
तुषार मेहता की दलील – माफी वाला ईमेल बना अहम सबूत
गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के व्यवहार का गलत आकलन किया।
मुख्य बिंदु:
1. व्यवहार का मानक नहीं होता: यौन उत्पीड़न की शिकार महिला का व्यवहार कैसा होना चाहिए, इसका कोई तय पैमाना नहीं है। ये शिक्षा, पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।
2. माफी वाला ईमेल: तेजपाल ने घटना के बाद शिकायतकर्ता को ईमेल भेजकर “गलतफहमी” के लिए माफी मांगी थी। इसे “दुखद” बताया था। मेहता ने कहा अगर कुछ हुआ ही नहीं तो माफी और शर्म की बात क्यों करते।
3. गवाही में मामूली अंतर: मेहता ने कहा गवाही में छोटे अंतर स्वाभाविक हैं। इससे गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठता।
बचाव पक्ष का तर्क
तेजपाल की ओर से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कहा कि माफी वाले ईमेल में किसी शारीरिक संबंध को स्वीकार नहीं किया गया। सिर्फ आपसी सहमति से हुई “बातचीत” का जिक्र था, किसी कृत्य का नहीं।
2013 में क्या हुआ था?
तरुण तेजपाल पर आरोप था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा में ‘तहलका’ पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में उन्होंने अपनी एक महिला सहयोगी का यौन उत्पीड़न किया।
2021 में गोवा की अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया है।
अब मामले में सजा पर बहस के बाद हाईकोर्ट सजा का ऐलान करेगा।


