Mohammad Junaid: झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर जिस मदद की उम्मीद कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के बड़े नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका से की जा रही थी, वह काम मोहम्मद जुनैद ने पूरा कर दिखाया है। गाजियाबाद निवासी मोहम्मद जुनैद, जो जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए एक महीने तक भोजन-पानी की व्यवस्था करते नजर आए थे, अब रांची पहुंचकर छात्र आंदोलन का साथ देने लगे हैं। उन्होंने साफ किया है कि जब तक आंदोलन खत्म नहीं होता, वह वहीं रहकर प्रदर्शनकारियों की सेवा में जुटे रहेंगे।
Mohammad Junaid: जंतर-मंतर आंदोलन में बने थे चर्चा का केंद्र
मोहम्मद जुनैद सीजेपी के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान काफी सुर्खियों में रहे थे। उस समय वह प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था संभालते हुए नजर आते थे, जिसकी वजह से उन्हें व्यापक पहचान मिली। हालांकि बाद में फंडिंग को लेकर उठे कुछ सवालों के चलते वह विवादों में भी घिर गए थे। जुनैद ने यह भी दावा किया था कि पुलिस ने उन्हें और उनके परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे जुनैद
गुरुवार को मोहम्मद जुनैद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर पहुंचे, जहां छात्र आंदोलन जारी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के हित के लिए खड़े होकर उनके भोजन-पानी की व्यवस्था की गई थी, उसी तर्ज पर अब रांची में भी यह प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह अभी वहां पहुंचे ही हैं और स्थिति को समझते हुए आगे की व्यवस्था करेंगे।
छात्रों की मांगों का किया समर्थन
मोहम्मद जुनैद ने रांची पहुंचकर छात्रों की मांगों का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जेपीएससी में छात्रों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। जुनैद ने सरकार से अपील की कि छात्रों की हर उचित मांग को स्वीकार किया जाए। उनके इस बयान से रांची में आंदोलनरत छात्रों के बीच एक नई उम्मीद जगी है।
सीजेपी की कोर टीम से नहीं मिला बुलावा
दिलचस्प बात यह है कि जंतर-मंतर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले मोहम्मद जुनैद को सीजेपी ने अपनी कोर टीम में जगह नहीं दी है। जुनैद के रांची पहुंचने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें छत्रपति संभाजीनगर में चल रही कोर कमिटी की बैठक में नहीं बुलाया गया, जहां अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रमुख सदस्य आगे की रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने सीजेपी के भीतर आंतरिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है।
Mohammad Junaid: सोशल मीडिया पर उठ रही थी झारखंड जाने की मांग
मोहम्मद जुनैद ऐसे समय पर रांची पहुंचे हैं जब सोशल मीडिया पर लगातार अभिजीत दीपके और सीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से अपील की जा रही थी कि जिस तरह उन्होंने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसी तरह झारखंड पहुंचकर वहां के छात्रों की भी मदद करें। इस मांग को लगातार सोशल मीडिया पर समर्थन मिल रहा था, जिससे नेताओं पर दबाव बढ़ता जा रहा था।
अभिजीत दीपके ने बताई थी बीमारी की वजह
रांची न जा पाने को लेकर एक दिन पहले ही अभिजीत दीपके ने सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनकी पूरी टीम फिलहाल बीमार है, जिसके चलते तुरंत झारखंड पहुंच पाना संभव नहीं हो सका। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही वहां पहुंचा जाएगा। इसी बीच उन्होंने फोन के माध्यम से रांची में मौजूद आंदोलनकारियों से बातचीत भी की थी, ताकि उनका मनोबल बना रहे।
Mohammad Junaid: आंदोलन को मिल रहा जमीनी समर्थन
मोहम्मद जुनैद के रांची पहुंचने और सक्रिय रूप से व्यवस्था संभालने की पहल से आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलती दिख रही है। जहां एक ओर बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे थे, वहीं जुनैद जैसे कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने आंदोलनकारी छात्रों को यह भरोसा दिलाया है कि उन्हें जमीनी स्तर पर समर्थन मिलता रहेगा।
रांची में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर मोहम्मद जुनैद की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि आंदोलनों की असली ताकत अक्सर बड़े नेताओं से ज्यादा जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से आती है। जंतर-मंतर पर मिली पहचान के बाद अब रांची में भी उनकी मौजूदगी छात्रों के लिए राहत का सबब बनती दिख रही है। हालांकि सीजेपी की कोर टीम से उन्हें दूर रखे जाने और अभिजीत दीपके की गैरमौजूदगी को लेकर संगठन के भीतर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं। फिलहाल जुनैद का पूरा फोकस छात्रों की मांगों के समर्थन और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है।
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