News Delhi: भारत में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम FCRA में प्रस्तावित संशोधन और नए नियमों को लेकर चर्चा तेज है। इसकी वजह सिर्फ देश की राजनीति नहीं, बल्कि अमेरिका के सांसदों की प्रतिक्रिया भी है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।
अभी चर्चा में क्यों है FCRA?
1.अमेरिका की चिंता: वेस्ट वर्जीनिया के रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने कहा कि नए संशोधनों से भारत सरकार को चर्च और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में दखल का अधिकार मिल सकता है। उन्होंने इसे ईसाई समुदाय पर हमला बताया।
2. विपक्ष का विरोध: केरल के CM वीडी सतीशन और तमिलनाडु के पूर्व CM एमके स्टालिन ने कहा कि इससे चर्च, ईसाई स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, अनाथालय जैसी संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। मामूली चूक पर पंजीकरण रद्द होने पर उनकी संपत्तियां भी जा सकती हैं।
3. सरकार का जवाब: CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया।
FCRA है क्या?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2010 यह तय करता है कि भारत में कोई NGO, ट्रस्ट, स्कूल, धार्मिक संगठन, कंपनी विदेश से पैसा किन शर्तों पर ले सकता है और उसका इस्तेमाल कैसे करेगा।
मुख्य उद्देश्य:
- विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता
- निगरानी करना
- यह सुनिश्चित करना कि विदेशी धन से राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या लोकतंत्र को नुकसान न हो
इस कानून को गृह मंत्रालय चलाता है।
अब तक कब-कब बदला FCRA?
- 1976: पहला FCRA कानून
- 2010: नया FCRA कानून आया
- 2016, 2018, 2020: संशोधन हुए
- 2026: नया संशोधन विधेयक और नए नियम

2026 के नए नियम क्या हैं? ये लागू हो चुके हैं
22 जून 2026 को FCRA नियम 2026 अधिसूचित हो चुके हैं।
प्रमुख बदलाव:
- उद्देश्य और राज्य तय करना जरूरी: अब संस्था को बताना होगा कि पैसा किस काम और किन राज्यों में खर्च होगा। पहले से रजिस्टर्ड संस्थाओं को 1 साल में ये जानकारी देनी है।
- धार्मिक गतिविधियों के नियम साफ: पहली बार बताया गया है कि विदेशी फंड किन धार्मिक गतिविधियों में लग सकता है।
- नवीनीकरण के लिए 10 लाख की शर्त: रिन्यू कराने के लिए संस्था को दिखाना होगा कि पिछले 2 साल में उसने कम से कम 10 लाख रुपये विदेशी फंड खर्च किए हैं।
- मकसद: निष्क्रिय NGOs को हटाना।
- रिपोर्टिंग सख्त: अब प्रोजेक्ट-वार खर्च, वेबसाइट और सोशल मीडिया की जानकारी, और अंतिम विदेशी दानदाता का नाम देना जरूरी।
2026 का प्रस्तावित संशोधन विधेयक – क्या बदलेगा?
ये विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश हुआ है। अभी संसद में विचाराधीन है।
6 बड़े प्रस्ताव:
1. नामित प्राधिकारी: अगर किसी संस्था का लाइसेंस रद्द होता है तो विदेशी फंड से बनी संपत्ति को संभालने के लिए प्राधिकारी बनेगा। दोबारा रजिस्ट्रेशन मिला तो संपत्ति वापस, नहीं तो सरकार के पास जाएगी।
2. धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: सरकार का दावा – किसी भी धार्मिक स्थल का धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जाएगा। चर्च, मंदिर, मस्जिद सब सुरक्षित।
3. अपील का अधिकार: नामित प्राधिकारी के फैसले के खिलाफ पहले पुनर्विचार, फिर जिला कोर्ट में अपील हो सकेगी।
4. ऑटो समाप्ति: समय पर नवीनीकरण नहीं हुआ तो रजिस्ट्रेशन अपने आप खत्म।
5. सजा कम: अधिकतम सजा 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव।
6. जांच के लिए केंद्र की मंजूरी: राज्य सरकार को FCRA मामले में जांच से पहले केंद्र से इजाजत लेनी होगी।
सरकार क्या कह रही है?
सरकार का कहना है कि इसका मकसद FCRA के मूल ढांचे में बदलाव नहीं है। 2010 वाले सिस्टम को ही ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जा रहा है। प्रशासनिक कमियों को दूर किया जा रहा है।
FCRA से जुड़े आंकड़े
- 2024-25 में विदेशी फंड: 16,200 संस्थाओं को 22,963 करोड़ रुपये मिले
- पिछले 10 साल में: 22,000 संस्थाओं का पंजीकरण रद्द, 15,000 की अवधि खत्म
- पंजीकरण वैधता: 5 साल
- खर्च की सीमा: विदेशी फंड का अधिकतम 20% प्रशासनिक खर्च, 80% प्रोजेक्ट पर


