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जीएसटी दर कटौती से महंगाई को बड़ा झटका: SBI रिपोर्ट में दावा – CPI मुद्रास्फीति 0.35% तक घटेगी, आम आदमी की जेब को मिलेगी राहत!

वाराणसी –देश में जीएसटी दरों में हालिया कटौती और युक्तिकरण से आम लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इससे खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) में कमी आ रही है। रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी के कारण CPI मुद्रास्फीति करीब 35 आधार अंक (0.35 प्रतिशत) कम हो सकती है। यह आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालेगा, क्योंकि रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी।

जीएसटी कटौती का अब तक का असर

SBI रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर से नवंबर 2025 के बीच जीएसटी दरों में बदलाव से CPI मुद्रास्फीति में करीब 25 आधार अंक की कमी आई है। पहले अनुमान था कि इसका असर 85 आधार अंक तक हो सकता है, लेकिन वस्तु-दर-वस्तु गणना करने पर यह 25 आधार अंक निकला।रिपोर्ट कहती है कि यह आंकड़ा ई-कॉमर्स पर मिलने वाली अतिरिक्त छूट को ध्यान में नहीं रखता। ऑनलाइन शॉपिंग में जीएसटी कम होने से डिस्काउंट ज्यादा हो सकते हैं, जिससे कुल असर और बढ़ेगा। इसलिए पूरे वित्त वर्ष में 35 आधार अंक की कमी की उम्मीद है।

वर्तमान मुद्रास्फीति की स्थिति

नवंबर 2025 में CPI मुद्रास्फीति थोड़ी बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई, जो अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत थी। इसका कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में कम गिरावट और सोने की महंगाई है। सोने की मुद्रास्फीति 58 प्रतिशत तक पहुंच गई, लेकिन सोने को हटाकर देखें तो कुल CPI नेगेटिव (-0.12 प्रतिशत) है।मार्च 2026 तक मुद्रास्फीति 2.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, रुपए के कमजोर होने से आगे महंगाई बढ़ने का खतरा है।

SBI की भविष्यवाणी: कम महंगाई का दौर

SBI रिसर्च ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 1.8 प्रतिशत रखा है, जबकि 2026-27 में यह 3.4 प्रतिशत हो सकती है। इसका मुख्य कारण अच्छी फसल है:

. खरीफ उत्पादन ज्यादा होना

. रबी बुवाई अच्छी चल रही है

. जलाशयों में पानी का स्तर ठीक है

. मिट्टी में नमी अनुकूल है

इनसे खाद्य महंगाई कम रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी दिसंबर की नीति में FY26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है।

राज्य स्तर पर अलग-अलग तस्वीर

रिपोर्ट में कुछ राज्यों का जिक्र है। जैसे, नवंबर में केरल में मुद्रास्फीति 8.27 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में 9.34 प्रतिशत और शहरी में 6.33 प्रतिशत। यहां सोने, चांदी और तेल-वसा की कीमतें तेजी से बढ़ीं, क्योंकि इनका इस्तेमाल ज्यादा होता है। कुल मिलाकर, देश में महंगाई का ट्रेंड अलग-अलग राज्यों में भिन्न है।

RBI की नीति पर क्या असर?

SBI रिपोर्ट कहती है कि कम महंगाई के बावजूद RBI फरवरी की मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। repo rate 5.25 प्रतिशत पर लंबे समय तक कम रह सकता है। RBI ने दर कटौती के लिए दरवाजा खुला रखा है, लेकिन अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।

आम लोगों के लिए क्या मतलब?

जीएसटी कटौती से कई रोजमर्रा की चीजें – जैसे खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान और सेवाएं – सस्ती हुई हैं। इससे घरेलू खर्च कम होगा और बचत बढ़ेगी। ई-कॉमर्स पर अतिरिक्त डिस्काउंट से त्योहारों और रोज की खरीदारी में और फायदा होगा। कुल मिलाकर, यह सरकार का एक बड़ा कदम है जो महंगाई को काबू में रखने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष:

SBI की यह रिपोर्ट साफ बताती है कि जीएसटी दरों में कटौती और युक्तिकरण एक सकारात्मक बदलाव है। इससे न सिर्फ महंगाई कम हो रही है, बल्कि आम आदमी को सीधी राहत मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 0.35 प्रतिशत की कमी का अनुमान अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। अच्छी फसल और स्थिर नीतियों से आगे भी महंगाई नियंत्रण में रहेगी। यह कदम उपभोग बढ़ाने, विकास को गति देने और लोगों की जेब को हल्का करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुल मिलाकर, यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत है कि कम महंगाई का दौर जारी रहेगा।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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