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Bihar Budget 2026: एक रुपये से समझें पूरा हिसाब-किताब, कहां से आता है पैसा और कहां होता है खर्च

Bihar Budget 2026: बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589.76 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। यह पिछले वर्ष 2025-26 के बजट से 30,694.74 करोड़ रुपये अधिक है। आइए एक रुपये के हिसाब से समझते हैं कि बिहार सरकार को पैसा कहां से आता है और वह उसे कहां खर्च करती है।

सरकार की आमदनी का गणित

Bihar Budget 2026: Finance Minister Reading Budget in Vidhansabha
Bihar Budget 2026: Finance Minister Reading Budget in Vidhansabha

मान लीजिए कि बिहार सरकार के पास कुल एक रुपया है। इस एक रुपये में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी 45.49 पैसे केंद्रीय करों में राज्य के अंश से आता है। यह सबसे बड़ा राजस्व स्रोत है जो केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों में से बिहार का हिस्सा है।

दूसरा सबसे बड़ा स्रोत राज्य द्वारा लगाए गए कर हैं जिनसे 18.92 पैसे की आमदनी होती है। इसमें जीएसटी, उत्पाद शुल्क, स्टांप ड्यूटी और अन्य राज्य कर शामिल हैं।

तीसरा बड़ा स्रोत केंद्र सरकार की सब्सिडी है जो 14.92 पैसे के बराबर है। विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और अनुदान के रूप में यह राशि मिलती है।

चौथे स्थान पर ऋण यानी लोन से 17.81 पैसे की आमदनी होती है। सरकार विकास कार्यों के लिए उधार लेती है।

राजस्व से 2.70 पैसे और ऋण की वसूली से मात्र 0.15 पैसे की आमदनी होती है। राजस्व में सरकारी संपत्तियों से होने वाली आय और विभिन्न शुल्क शामिल हैं।

सरकार का खर्च

अब बात करते हैं कि सरकार का एक रुपया कहां खर्च होता है। सबसे बड़ा खर्च सामाजिक योजनाओं में होता है। एक रुपये में से लगभग आधा यानी 41.55 पैसा सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर खर्च होता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला और बाल विकास, सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं।

दूसरा सबसे बड़ा खर्च सामान्य सेवाओं में 28.12 पैसे का होता है। इसमें प्रशासनिक खर्च, पुलिस, न्यायपालिका और अन्य सामान्य सेवाएं आती हैं।

तीसरे स्थान पर आर्थिक सेवाओं में 23.39 पैसे खर्च होते हैं। इसमें कृषि, उद्योग, सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। ऋण चुकाने में 6.52 पैसे खर्च होते हैं। यह पिछले लिए गए ऋणों के ब्याज और मूलधन की अदायगी के लिए है।

ऋण और पेशगियां में 0.41 पैसा जबकि सहायता अनुदान और अंशदान में मात्र 0.01 पैसा खर्च होता है।

बजट की अन्य महत्वपूर्ण बातें

वित्तीय वर्ष 2026-27 का कुल व्यय बजट अनुमान 3,47,589.76 करोड़ रुपये है। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के 3,16,895.02 करोड़ रुपये से 30,694.74 करोड़ रुपये अधिक है। यह वृद्धि लगभग 9.7 प्रतिशत है।

स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय का बजट अनुमान 2,25,434.34 करोड़ रुपये है। यह पिछले वर्ष के 2,00,135.42 करोड़ रुपये से 25,298.92 करोड़ रुपये अधिक है। स्थापना व्यय में वेतन, पेंशन और अन्य निश्चित खर्चे शामिल हैं।

वार्षिक योजनाओं का कुल बजट अनुमान 1,22,155.42 करोड़ रुपये रखा गया है। यह विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवंटित राशि है।

सात निश्चय योजना

सुशासन के कार्यक्रम 2025-30 के अंतर्गत विकसित बिहार के सात निश्चय-3 (2025-30) के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 14,800 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रमुख योजना है जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है।

ऐतिहासिक वृद्धि

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस बजट को ऐतिहासिक, भविष्योन्मुखी एवं समावेशी बताया। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व, जनहितैषी सोच और विकसित बिहार के संकल्पों का प्रतिबिंब है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-05 में बिहार का बजट मात्र 23,885 करोड़ रुपये का था। आज यह बढ़कर 3,47,589 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 14.5 गुना की वृद्धि है जो बिहार के विकास की गाथा बयान करती है।

सामाजिक न्याय पर जोर

यह बजट सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रगति और समावेशी विकास के प्रति एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बिहारवासियों के हितों को केंद्र में रखकर प्रस्तुत किया गया यह बजट सभी वर्गों के विकास को सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

आर्थिक दृष्टिकोण

बजट के आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार अभी भी केंद्रीय हस्तांतरण पर काफी निर्भर है। 45.49 पैसे केंद्रीय करों से और 14.92 पैसे सब्सिडी से मिलकर कुल 60.41 पैसे केंद्र से आते हैं। राज्य के अपने कर राजस्व से केवल 18.92 पैसे की आमदनी होती है।

यह बिहार की आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है। राज्य को अपने कर संग्रह को बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने की जरूरत है।

Bihar Budget 2026: विकास की दिशा

41.55 पैसे सामाजिक योजनाओं और 23.39 पैसे आर्थिक सेवाओं में खर्च करना सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। सामाजिक कल्याण पर जोर देना अच्छी बात है लेकिन आर्थिक सेवाओं पर भी पर्याप्त ध्यान देना जरूरी है ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

यह बजट बिहार के विकास की एक नई दिशा तय करता है और राज्य को विकसित बनाने के संकल्प को दर्शाता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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