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Coal Pension Scheme: न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपये तय, सरकार ने फिलहाल किसी भी नए बदलाव से किया इनकार

Coal Pension Scheme: देशभर के कोयला खदानों से जुड़े लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हाथ फिलहाल निराशा लगी है। लंबे समय से पेंशन नियमों में बड़े बदलाव और राहत की उम्मीद लगाए बैठे पूर्व कर्मियों को केंद्र सरकार की तरफ से साफ संकेत मिल गए हैं कि फिलहाल कोयला खान पेंशन योजना-1998 में किसी भी प्रकार का नया संशोधन करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकार ने कहा है कि पात्र लाभार्थियों की मांगों पर पहले ही विचार करते हुए न्यूनतम मासिक पेंशन की राशि बढ़ाई जा चुकी है, इसलिए तत्काल किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले से देश भर के उन पौने पांच लाख से अधिक पेंशनभोगियों की उम्मीदों पर विराम लगता दिख रहा है जो महंगाई के इस दौर में पेंशन नियमों में व्यापक सुधार की आस लगाए बैठे थे।

Coal Pension Scheme: संसद में सरकार की तरफ से आया आधिकारिक जवाब

लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित सवाल के लिखित उत्तर में कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने यह पूरी जानकारी साझा की। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि पिछले साल आठ मार्च से ही कोयला खान पेंशन योजना के तहत न्यूनतम मासिक भुगतान को बढ़ाकर एक हजार रुपये किया जा चुका है।

इससे पहले काफी बड़ी संख्या में ऐसे पूर्व कर्मचारी थे जिन्हें तय सीमा से भी कम राशि मिलती थी। सरकार का तर्क है कि इस संशोधन के लागू होने के बाद से हजारों बुजुर्ग पेंशनभोगियों को आर्थिक संबल मिला है और उनकी न्यूनतम आय में सुधार दर्ज किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से निचले पायदान पर मौजूद पेंशनभोगियों को राहत मिल चुकी है, इसलिए फिलहाल नई व्यवस्था लाने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

अधिकतम पेंशन पर नहीं है कोई ऊपरी सीमा

योजना के दूसरे पहलुओं पर बात करते हुए सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि इस व्यवस्था के अंतर्गत अधिकतम पेंशन पाने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। किसी भी कर्मचारी को मिलने वाली अंतिम पेंशन राशि पूरी तरह से उसके आखिरी मूल वेतन, सेवाकाल के दौरान दिए गए अंशदान, कुल नौकरी की अवधि और पेंशन योग्य वर्षों के गणित पर निर्भर करती है।

कोयला खान भविष्य निधि संगठन यानी सीएमपीएफओ के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल मई महीने तक देश भर में ऐसे पांच सौ पंद्रह पेंशनभोगी मौजूद हैं जिन्हें हर महीने दस हजार रुपये से ज्यादा की पेंशन मिल रही है। यह उन कर्मचारियों के लिए है जिनका वेतन और सेवाकाल लंबा रहा है।

Coal Pension Scheme: लगातार बढ़ रही है कुल पेंशनभोगियों की संख्या

सीएमपीएफओ की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस साल जून महीने के अंत तक कुल चार लाख एकासी हजार चार सौ अड़सठ लोग इस योजना के तहत नियमित रूप से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। यदि पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों का आकलन किया जाए तो इसमें लगातार हल्की बढ़ोतरी ही दर्ज की गई है।

इसी साल अप्रैल के महीने में जहां कुल लाभार्थियों की संख्या चार लाख अठहत्तर हजार नौ सौ انचास थी, वहीं मई में यह बढ़कर चार लाख اکاسی हजार चार सौ सड़सठ हो गई और जून के आंकड़े चार लाख اکاسی हजार चार सौ अड़सठ पर पहुंच गए। इन सभी आंकड़ों के भीतर सामान्य सेवानिवृत्त कर्मियों के साथ-साथ विकट यानी डिसेबलमेंट और पारिवारिक पेंशन पाने वाले लोग भी शामिल हैं।

Coal Pension Scheme: श्रमिक संगठनों की मांग और जमीनी हकीकत

दूसरी तरफ, विभिन्न पेंशनभोगी संगठन और पूर्व कर्मचारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मौजूदा न्यूनतम राशि बेहद कम है। उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम पेंशन की राशि को और अधिक बढ़ाने, पेंशनभोगियों पर महंगाई का असर कम करने के लिए महंगाई राहत यानी डीआर को तत्काल प्रभाव से लागू करने और वर्ष 1998 से लंबित पड़े संशोधनों को पूरा करने जैसी बातें शामिल हैं।

संगठनों का तर्क है कि आज के समय में एक हजार रुपये में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद सरकार के इस ताज़ा और स्पष्ट रुख से यह बात पूरी तरह शीशे की तरह साफ हो गई है कि निकट भविष्य में नियमों में किसी राहत या बड़े बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं बची है, और पूर्व कर्मियों को फिलहाल मौजूदा व्यवस्था के साथ ही संतोष करना होगा।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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