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Jharkhand News: झारखंड में विकास की सुस्त चाल, 14 महीने में 68 में से सिर्फ 8 नई योजनाएं धरातल पर उतरीं, 60 अब भी अधूरी

Jharkhand News: राज्य के विकास को रफ्तार देने के लिए बजट में की जाने वाली बड़ी-बड़ी घोषणाएं और हकीकत के बीच का फासला एक बार फिर सामने आ गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में झारखंड सरकार ने पूरे उत्साह के साथ 68 नई योजनाओं का ऐलान किया था। उम्मीद थी कि ये योजनाएं राज्य की तस्वीर बदलेंगी, लेकिन 14 महीने बीत जाने के बाद की जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। सरकार के अलग-अलग विभागों की सुस्ती का आलम यह है कि इन 14 महीनों में 68 में से मात्र आठ योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जबकि 60 योजनाएं आज भी फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझी हुई हैं।

इस लेटलतीफी का खुलासा विभिन्न विभागों द्वारा वित्त विभाग को सौंपे गए ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) से हुआ है। योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही इस भारी देरी ने प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है।

Jharkhand News: कृषि और पथ निर्माण जैसे अहम विभाग पूरी तरह फिसड्डी

किसी भी राज्य की तरक्की की रीढ़ वहां की कृषि और आधारभूत संरचना यानी सड़कें होती हैं। लेकिन झारखंड में इन्हीं दो विभागों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। विभागीय रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कृषि विभाग के लिए बजट में पांच नई योजनाओं की घोषणा की गई थी। 14 महीने बाद इनमें से एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी है। सभी पांच योजनाएं अभी तक प्रक्रियाधीन हैं।

कमोबेश यही हाल पथ निर्माण विभाग का भी है। राज्य में नई सड़कों के जाल और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पांच नई योजनाएं लाई गई थीं। एटीआर के मुताबिक, पथ निर्माण विभाग की भी एक भी योजना धरातल पर पूरी तरह से नहीं उतर पाई है। कृषि और सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी योजनाओं का शून्य पर अटका रहना विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पर्यटन और कला-संस्कृति में सबसे ज्यादा घोषणाएं, पर काम के नाम पर सिर्फ दो

सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में पर्यटन, कला-संस्कृति और खेलकूद को बढ़ावा देने पर काफी जोर दिया था। इसी रणनीति के तहत इस विभाग के हिस्से में सबसे ज्यादा 12 नई योजनाएं आई थीं। घोषणाओं के वक्त माहौल ऐसा था मानो राज्य में पर्यटन और खेल के क्षेत्र में कोई बड़ी क्रांति आने वाली है। मगर जब काम का हिसाब मांगा गया, तो पता चला कि 12 में से केवल दो योजनाएं ही अब तक पूरी हो पाई हैं। बाकी की 10 योजनाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं और उनके पूरा होने का कोई स्पष्ट समय तय नहीं है।

ग्रामीण विकास विभाग (आरईओ) का प्रदर्शन भी उत्साहजनक नहीं है। आरईओ के तहत 4 नई योजनाएं शुरू होनी थीं, जिनमें से 3 पूरी हो चुकी हैं, जबकि एक अभी प्रक्रिया में है। ग्रामीण विकास विभाग की 3 योजनाओं में से केवल 1 पूरी हुई है।

वित्त विभाग की सख्ती, विकास आयुक्त के नेतृत्व में बनी कमेटी

विकास योजनाओं के इस हश्र को वित्त विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। बजट घोषणाओं के बावजूद काम का जमीन पर न उतरना सरकारी खजाने और विकास की गति, दोनों के लिए नुकसानदायक है। इसे देखते हुए अब राज्य सरकार ने योजनाओं में आ रहे गतिरोध को दूर करने के लिए कमर कस ली है।

इस पूरी स्थिति की पड़ताल के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर काम करेगी। पहला- उन कारणों और बाधाओं की पहचान करना, जिनकी वजह से योजनाएं लटकी हुई हैं। दूसरा- विभागीय समन्वय बढ़ाकर इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए ठोस सुझाव देना।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अगस्त महीने में इस नवगठित कमेटी की पहली अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में सभी 60 अधूरी योजनाओं की अद्यतन स्थिति (करंट स्टेटस) की फाइलें खोली जाएंगी। एक-एक योजना की बारीकी से समीक्षा की जाएगी कि आखिर फाइल कहां और क्यों अटकी है।

Jharkhand News: किस विभाग का क्या है हाल?

विभिन्न विभागों की एक्शन टेकन रिपोर्ट से जो तस्वीर उभरी है, वह यह बताने के लिए काफी है कि लेटलतीफी किसी एक विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था इसका शिकार है। नीचे दिए गए आंकड़ों से इसे आसानी से समझा जा सकता है:

विभाग का नाम कुल नई घोषणाएं पूरी हुई योजनाएं प्रक्रियाधीन योजनाएं
कृषि 5 0 5
भवन निर्माण 1 1 0
पेयजल व स्वच्छता 2 0 2
मंत्रिमंडल सचिवालय व निगरानी 1 0 1
ऊर्जा 1 0 1
खाद्य आपूर्ति 1 0 1
वन एवं पर्यावरण 1 0 1
स्वास्थ्य 3 0 3
उच्च व तकनीकी शिक्षा 5 0 5
गृह, कारा व आपदा 4 0 4
उद्योग 4 0 4
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) 1 1 0
योजना व विकास 2 0 2
पंचायती राज 1 0 1
पथ निर्माण 5 0 5
ग्रामीण विकास 3 1 2
आरईओ 4 3 1
स्कूली शिक्षा 3 0 3
पर्यटन व कला-संस्कृति 12 2 10
नगर विकास व आवास 4 0 4
जल संसाधन 2 0 2
कल्याण विभाग 2 0 2

Jharkhand News: शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, हर जगह इंतजार

सूची पर गौर करें तो स्वास्थ्य विभाग की तीनों नई योजनाएं अभी प्रक्रिया में ही हैं। उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए लाई गईं पांचों योजनाएं अधूरी हैं। स्कूली शिक्षा की तीन योजनाएं भी पूरी होने की बाट जोह रही हैं। उद्योग, गृह, नगर विकास और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का खाता भी ‘पूर्ण’ योजनाओं के कॉलम में शून्य ही दिखा रहा है। दूसरी तरफ, भवन निर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ऐसे विभाग रहे, जिन्होंने अपने जिम्मे आई एक-एक योजना को पूरा कर लिया है।

अब सबकी निगाहें अगस्त में होने वाली विकास आयुक्त की बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार की इस नई कवायद के बाद फाइलों में दबी योजनाओं की रफ्तार कितनी बढ़ती है और आम जनता को बजट में किए गए वादों का असली फायदा कब तक मिल पाता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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