Jharkhand police: झारखंड में उग्रवाद और नक्सलवाद के खासे प्रभाव वाले इलाकों से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य पुलिस के चलाए जा रहे ‘नई दिशा-नई पहल’ अभियान के तहत कुल 16 खूंखार नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। पिछले दो महीनों के भीतर झारखंड पुलिस के लिए यह सबसे बड़ी और निर्णायक सफलता मानी जा रही है। सरेंडर करने वाले इन माओवादियों में एक रीजनल कमांडर भी शामिल है, जिसके ऊपर बड़ा इनाम घोषित था। इन सभी ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और हजारों राउंड कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे हैं, जिससे राज्य में लाल आतंक की कमर टूटती नजर आ रही है।
Jharkhand police: आत्मसमर्पण करने वाले दिग्गजों की सूची और उनके आपराधिक रिकॉर्ड
राजधानी रांची में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस पूरी सफलता की विस्तृत जानकारी साझा की। सरेंडर करने वालों में विभिन्न स्तरों के कमांडर शामिल हैं, जिनमें एक रीजनल कमांडर के अलावा तीन जोनल कमांडर, तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और तीन कैडर स्तर के सदस्य हैं। इनमें पंद्रह लाख का इनामी रीजनल कमांडर संतोष उरांव उर्फ बासुदेव दा भी शामिल है, जिसने अपने अन्य साथियों के साथ हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया है। इन तमाम नक्सलियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे और पुलिस लंबे समय से इनकी तलाश कर रही थी।
भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद कर सौंपे गए

आत्मसमर्पण के इस महत्वपूर्ण अवसर पर इन नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जमा करा दिए। कुल मिलाकर ग्यारह अत्याधुनिक हथियार, अड़तीस मैगजीन और पंद्रह सौ से अधिक राउंड कारतूस पुलिस के हवाले किए गए हैं। इन हथियारों में एके-47 राइफल, इंसास राइफल, एचके-33 राइफल, यूएस कार्बाइन और एम-16 जैसी खतरनाक बंदूकें शामिल हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों का समर्पण होना यह साबित करता है कि अब नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है और वे पुलिस के बढ़ते दबाव के आगे टिकने में असमर्थ हैं।
Jharkhand police: राज्य के विभिन्न जिलों में सिमटता जा रहा है नक्सल नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले इन सोलह माओवादियों में से चौदह अकेले चाईबासा जिले से ताल्लुक रखते हैं, जबकि दो नक्सली लातेहार जिले के रहने वाले हैं। इस सामूहिक सरेंडर के बाद अब चाईबासा जिले में सक्रिय नक्सलियों की संख्या सिमट कर केवल छह रह गई है, जबकि पूरे झारखंड राज्यभर में अब गिने-चुने सक्रिय नक्सली ही बचे हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों का कड़ा अभियान रंग ला रहा है। कभी दुर्दांत माने जाने वाले ये इलाके अब धीरे-धीरे शांति और विकास की पटरी पर लौट रहे हैं।
Jharkhand police: झारखंड सरकार की नई दिशा-नई पहल नीति का असर
झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ‘नई दिशा-नई पहल’ भटके हुए युवाओं और उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो रही है। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने उम्मीद जताई है कि जिन नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण किया है, उन्हें सरकार की इस कल्याणकारी नीति का पूरा लाभ मिलेगा ताकि वे एक सम्मानित और सामान्य जीवन जी सकें। सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद, सुरक्षा और रोजगार के अवसरों के कारण अब माओवादी संगठनों में घुटन महसूस कर रहे लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति का रास्ता चुन रहे हैं।
झारखंड पुलिस के समक्ष हुआ यह ऐतिहासिक आत्मसमर्पण राज्य में शांति और कानून व्यवस्था की स्थापना की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। रीजनल कमांडर समेत सोलह नक्सलियों का एक साथ हथियार डालना यह दर्शाता है कि राज्य से नक्सलवाद का साया अब तेजी से छंट रहा है। सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीतियों के मिले-जुले असर से आने वाले दिनों में झारखंड के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने की उम्मीद और अधिक मजबूत हो गई है। आम जनता और स्थानीय नागरिकों के लिए यह एक सुरक्षित और भयमुक्त भविष्य का संकेत है।
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