CWG 2026: ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार शानदार बना हुआ है। बुधवार को भारतीय स्टार लंबी कूद खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लॉन्ग जंप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश की झोली में 13वां मेडल डाल दिया। स्कॉटलैंड के स्कॉटस्टन स्टेडियम में हुए फाइनल में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई और दूसरा स्थान हासिल किया।
CWG 2026: गोल्ड से सिर्फ छह सेंटीमीटर दूर
श्रीशंकर स्वर्ण पदक से बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन जमैका के टेजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर उन्हें पीछे छोड़ दिया। महज छह सेंटीमीटर के अंतर से भारतीय एथलीट स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए। फिर भी रजत पदक उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ।
फाइनल में कैसा रहा प्रदर्शन?
फाइनल में श्रीशंकर ने पहले प्रयास में 8.02 मीटर की छलांग लगाकर शानदार शुरुआत की। इस प्रयास के बाद वह दूसरे स्थान पर थे। दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर की छलांग लगाई और सीधे पहले स्थान पर पहुंच गए। इसके बाद उनके लगातार दो प्रयास फाउल रहे। इसी दौरान टेजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर लीड संभाल ली। श्रीशंकर ने अंतिम प्रयासों में वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन 8.15 मीटर का आंकड़ा पार नहीं कर सके और सिल्वर मेडल के साथ प्रतियोगिता समाप्त की।
लगातार दूसरी बार सिल्वर मेडल
इस जीत के साथ मुरली श्रीशंकर कॉमनवेल्थ गेम्स की लॉन्ग जंप स्पर्धा में लगातार दो बार पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले बर्मिंघम 2022 में उन्होंने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता था। इस बार उन्होंने अपनी दूरी में मामूली सुधार करते हुए 8.09 मीटर तक पहुंच बनाई लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण फिर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
चोट के बाद दमदार वापसी
पिछले करीब दो वर्षों से मुरली श्रीशंकर चोटों से जूझ रहे थे। इसी कारण वह कई अहम प्रतियोगिताओं से बाहर रहे। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स उनके लिए वापसी का सबसे बड़ा मंच साबित हुआ। क्वालिफाइंग राउंड में उन्होंने पहले ही प्रयास में फाइनल का टिकट हासिल कर लिया था। फाइनल में भी उन्होंने बिना दबाव के शानदार प्रदर्शन किया और आखिर तक पदक की दौड़ में बने रहे।
लोकेश सत्यनाथन रहे पांचवें
भारत की ओर से पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में लोकेश सत्यनाथन ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 7.97 मीटर की छलांग लगाई। हालांकि यह दूरी उन्हें पदक की दौड़ में नहीं ला सकी और वह प्रतियोगिता में पांचवें स्थान पर रहे।
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
मुरली श्रीशंकर का यह सिल्वर मेडल भारत के लिए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 13वां पदक है। एथलेटिक्स में देश की बड़ी उम्मीदों में शामिल श्रीशंकर ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा साबित की। लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शुमार है। इससे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊर्जा मिली है।
आगे की उम्मीदें
श्रीशंकर की यह वापसी भारतीय लंबी कूद के लिए सकारात्मक संकेत है। चोट से उबरकर इतने बड़े मंच पर पदक जीतना उनकी मेहनत और मानसिक मजबूती को दर्शाता है। आने वाले दिनों में एथलेटिक्स के अन्य इवेंट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों से मेडल की उम्मीदें बनी हुई हैं।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लॉन्ग जंप में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। जमैका के टेजे गेल ने 8.15 मीटर के साथ गोल्ड हासिल किया। यह श्रीशंकर का लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ सिल्वर है और भारत का 13वां मेडल। चोट से वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन सराहनीय रहा। लोकेश सत्यनाथन पांचवें स्थान पर रहे। भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह बड़ी उपलब्धि है।
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