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Health News: इंदौर और देश के कई शहरों में पीलिया का प्रकोप, दूषित पानी से फैल रही बीमारी

Health News: इंदौर और देश के विभिन्न शहरों में दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इंदौर में दिसंबर 2025 से शुरू हुई पानी प्रदूषण की समस्या अब जानलेवा रूप ले चुकी है। इस घटना ने स्वच्छता के मामले में देश का सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर की असलियत सामने ला दी है। दूषित नल के पानी से पीलिया, दस्त और उल्टी की बीमारी फैल रही है जिसमें अब तक 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

Health News: इंदौर में पानी प्रदूषण से कितनी मौतें हुईं

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इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक छह महीने का बच्चा भी शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 200 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं जबकि कुल मिलाकर 2456 मरीजों की पहचान की गई है। स्थानीय पत्रकारों और निवासियों का दावा है कि मौत का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।

Health News: मोह में भी फैला पीलिया का संक्रमण

इंदौर की भागीरथपुरा घटना के कुछ हफ्ते बाद अब मोह तहसील में भी दूषित पानी से 24 लोग बीमार पड़ गए हैं। इनमें से 9 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। मोह के पट्टी बाजार और चंदर मार्ग इलाके से यह मामला सामने आया है। मरीजों में उल्टी, दस्त और पीलिया के लक्षण देखे गए हैं।

कक्षा 12 की छात्रा एलेना अपनी प्री बोर्ड परीक्षा में नहीं बैठ पाई क्योंकि वह संक्रमण से बीमार हो गई। 9 साल की लक्षिता और 12 साल के गीतांश पीलिया से पीड़ित होकर इलाज करा रहे हैं। बच्चों की यह दुर्दशा देखकर पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

कलेक्टर ने भी किया मौके का निरीक्षण

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा रात के समय मोह पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने रेड क्रॉस अस्पताल में भर्ती बच्चों और उनके परिवार वालों से बात की। कलेक्टर ने डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि समय पर और उचित इलाज सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भागीरथपुरा में कैसे फैली बीमारी

प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई कि नगरपालिका का पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण दूषित हो गया था। इस रिसाव से सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार पाइपलाइन में रिसाव के कारण बैक्टीरिया से पानी संक्रमित हो गया था। शुरुआती जांच में संकेत मिले कि बुनियादी ढांचे की विफलता के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी की आपूर्ति में घुस गया।

जांच में पता चला कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण सीधे 30 साल पुरानी पेयजल पाइपलाइन के ऊपर किया गया था। उचित सेप्टिक टैंक के बिना कच्चा मल एक गड्ढे में बह रहा था। यह गंदा पानी पाइपलाइन में रिसाव वाली जगह से रिसकर नगरपालिका की आपूर्ति को दूषित कर रहा था।

पीलिया के लक्षण और प्रभाव

पीलिया (Jaundice) एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह लीवर की समस्या या खून में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने से होता है।

पीलिया के मुख्य लक्षण:

  • त्वचा और आंखों में पीलापन।
  • गहरा पीला या भूरा पेशाब।
  • हल्के या सफेद रंग का मल।
  • बुखार, थकान और भूख न लगना।
  • पेट में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी।

दूषित पानी से फैलने वाली अन्य बीमारियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दूषित पानी केवल पीलिया ही नहीं बल्कि कई अन्य जानलेवा बीमारियां भी फैलाता है:

  1. हैजा (Cholera): तीव्र दस्त और डिहाइड्रेशन।
  2. टाइफाइड (Typhoid): लंबे समय तक तेज बुखार।
  3. हेपेटाइटिस A और E: लीवर का संक्रमण।
  4. पेचिश (Dysentery): पेट में ऐंठन और दस्त।

कैग (CAG) की रिपोर्ट में लापरवाही का खुलासा

कैग की रिपोर्ट में इंदौर नगर निगम की भारी लापरवाही का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • नगर निगम बिना किसी जांच के बोरवेल का पानी सप्लाई कर रहा था।
  • 20 बोरवेल के नमूनों में आयरन, नाइट्रेट और कैल्शियम बीआईएस 10500 मानदंडों से काफी अधिक पाया गया।
  • 2019 की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि 2013 से 2018 के बीच 8.95 लाख निवासियों को दूषित पानी की आपूर्ति की गई थी।

पानी को सुरक्षित कैसे बनाएं और बचाव के उपाय

घर में पानी को सुरक्षित बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • उबालना: पानी को कम से कम 15 से 20 मिनट तक उबालें।
  • क्लोरीन: पानी को क्लोरीन की गोलियों से शुद्ध करें।
  • वॉटर प्यूरीफायर: आरओ (RO) या यूवी (UV) तकनीक का उपयोग करें।
  • स्वच्छता: हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और बाहर का खुला खाना खाने से बचें।

सिस्टम में बदलाव जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि इंदौर की त्रासदी शहरी जल प्रबंधन में प्रणालीगत कमजोरियों का परिणाम है। बुनियादी ढांचे का सुधार, नियमित निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना अब अनिवार्य हो गया है। सामूहिक सतर्कता और सरकारी जवाबदेही से ही ऐसी त्रासदियों को भविष्य में रोका जा सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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