Jharkhand News: झारखंड विधानसभा में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे ध्यानाकर्षण सूचनाओं के माध्यम से उठाए गए। पहला मामला मुरी स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज द्वारा बिना पर्यावरणीय अनुमति के रेड मड की आपूर्ति से जुड़ा है जबकि दूसरा मामला बोकारो जिले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीन की हेराफेरी का है। दोनों मामलों में सरकार ने सदन में जांच कराने का आश्वासन दिया है।
हिंडाल्को रेड मड मामला – नई कमेटी से होगी दोबारा जांच

सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM के विधायक अमित कुमार ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से मुरी स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के रेड मड आपूर्ति मामले को सदन में उठाया। विधायक अमित कुमार ने आरोप लगाया कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति के रेड मड की आपूर्ति की है जो पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि रेड मड तालाब से जुड़ी एक घटना में 25 से 30 लोगों की मौत हुई थी जिसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
हिंडाल्को पर लग चुका है 37.96 लाख का जुर्माना
इस मामले में प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने सदन को जानकारी दी कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पहले ही बिना पर्यावरणीय अनुमति के लगभग दो लाख टन रेड मड की आपूर्ति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI को किए जाने के मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज पर 37 लाख 96 हजार 875 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड लगाया है।
कथित मौतों की घटना के बारे में मंत्री ने कहा कि अब तक न तो किसी मीडिया में इसकी प्रमाणित रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई है। पहले गठित जांच टीम की रिपोर्ट में भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हो सकी।
हालांकि विधायक अमित कुमार ने पहले की जांच टीम की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए विधानसभा की कमेटी से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार मामले की गंभीरता को देखते हुए नई कमेटी गठित करके दोबारा जांच कराएगी।
बोकारो में 21 एकड़ सरकारी जमीन की हेराफेरी
विधानसभा में दूसरा बड़ा मुद्दा चंदनक्यारी से JMM विधायक उमाकांत रजक ने उठाया। उन्होंने बोकारो जिले के चास अंचल स्थित नारायणपुर मौजा की 21 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि संबंधित 21 एकड़ जमीन सर्वे के अनुसार गैर आबाद मालिक की श्रेणी में दर्ज थी और इसमें से 1.98 एकड़ जमीन भूमिहीनों को दानपत्र के माध्यम से दी गई थी।
विधायक रजक ने आरोप लगाया कि गैर आबाद जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा किया गया और सादा हुकूमनामा बनाकर रजिस्ट्री कर ली गई। उनके अनुसार धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के सहारे सुनियोजित साजिश के तहत यह सरकारी जमीन हड़पी गई है।
Jharkhand News: रिजॉर्ट निर्माण और न्यायालय का हस्तक्षेप
विधायक रजक ने यह भी बताया कि लगभग 2.8 एकड़ जमीन पर एक रिजॉर्ट का निर्माण कर लिया गया है। इस पर विधायक अरूप चटर्जी ने स्पष्ट किया कि न्यायालय ने केवल 2.8 एकड़ जमीन पर कार्रवाई पर रोक लगाई है जबकि बाकी 21 एकड़ जमीन पर कोई न्यायिक रोक नहीं है।
मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने बताया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और इसकी विभागीय जांच भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव द्वारा कराई जाएगी। बोकारो जिला प्रशासन ने इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कर ली है। न्यायालय का फैसला आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।
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