डेस्क – भारत ने बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की हालिया हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने वाली हाल की घटनाओं की कड़ी को “चिंताजनक” बताया है और चेतावनी दी है कि ऐसी हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली ने सीमा पार हो रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की निंदा की और उम्मीद जताई कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाएगी।
घटनाओं का विवरण
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में 18 दिसंबर 2025 को 25 साल के दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू फैक्ट्री वर्कर की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। भीड़ ने उन्हें फैक्ट्री से बाहर घसीटा, मार डाला और फिर शव को आग लगा दी। यह घटना ईशनिंदा के आरोप पर हुई। इसके कुछ दिनों बाद, 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पंशा इलाके में 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना है कि यह रंगदारी के आरोप में हुई, लेकिन हिंदू समुदाय इसे सांप्रदायिक हमला मान रहा है। इन दो हत्याओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 26 दिसंबर 2025 को इन घटनाओं पर सख्त बयान जारी किया। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों सहित अल्पसंख्यकों पर चरमपंथियों के हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हिंसा को “मीडिया की अतिशयोक्ति” या “राजनीतिक हिंसा” कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। भारत ने बांग्लादेश सरकार से अपराधियों को सजा देने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। भारत ने बांग्लादेश में फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव को भी खारिज किया। मंत्रालय का कहना है कि हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और बांग्लादेशी अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं।
भारत में प्रदर्शन और गुस्सा
इन हत्याओं के विरोध में भारत के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया। कोलकाता, हैदराबाद, गुवाहाटी और पुरी में भी रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस की तस्वीरें जलाईं और हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर लक्षित हमलों से भारत के हिंदू बहुत आहत हैं। कई जगहों पर बाजार बंद रखे गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए।
बांग्लादेश की स्थिति क्यों बिगड़ी?
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। चरमपंथी ताकतें सक्रिय हो गई हैं। दिसंबर में ही कई मंदिरों पर हमले, घर जलाने और धमकियां देने की घटनाएं हुईं। अंतरिम सरकार पर आरोप है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही है। कुछ घटनाओं को सांप्रदायिक बताने से भी सरकार बच रही है।मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे हमले रुके नहीं तो देश में अस्थिरता बढ़ेगी।
दोनों देशों के रिश्तों पर असर
ये घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों को और खराब कर रही हैं। पहले ही हसीना के भारत भागने के बाद तनाव था। अब वीजा सेंटर बंद होने और राजनयिकों को तलब करने जैसी घटनाएं हो रही हैं। भारत चाहता है कि बांग्लादेश में शांति बहाल हो और अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें।
निष्कर्ष :
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले सिर्फ एक देश की समस्या नहीं हैं। यह मानवाधिकार और पड़ोसी देशों के रिश्तों का मामला है। भारत की चेतावनी साफ है कि ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बांग्लादेश सरकार को चाहिए कि वह अपराधियों को सजा दे और अल्पसंख्यकों की रक्षा करे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। शांति और सद्भावना ही आगे का रास्ता है, ताकि दोनों देशों के लोग सुरक्षित और खुशहाल रहें। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हर लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव से बांग्लादेश में हालात जल्द सुधरेंगे।



