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Jharkhand News: झारखंड में CM डैशबोर्ड 2.0 से हेमंत सोरेन खुद रखेंगे हर योजना पर नजर, डिजिटल क्रांति से बदलेगा शासन का तरीका

Jharkhand News: झारखंड सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी फैसला किया है जो राज्य में सरकारी योजनाओं के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। अब राज्य की सभी सरकारी योजनाओं और विभागों की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर से होगी। इसके लिए इंटीग्रेटेड सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म यानी सीएम डैशबोर्ड 2.0 को लागू किया जाने वाला है। यह एक आधुनिक डिजिटल सिस्टम है जिसके जरिए किसी भी योजना की असली जमीनी स्थिति रियल-टाइम में देखी जा सकेगी। इसके साथ ही राज्य में कौशल विकास के लिए एक नई संस्था बनाने, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और लाभार्थियों का एकीकृत डेटा तैयार करने की योजनाएं भी सामने आई हैं।

क्या है सीएम डैशबोर्ड 2.0 और कैसे करेगा काम

सीएम डैशबोर्ड 2.0 दरअसल एक ऐसा डिजिटल मंच है जो राज्य के सभी सरकारी विभागों को एक जगह जोड़ेगा। इस प्लेटफॉर्म पर हर विभाग की हर परियोजना की ताजा स्थिति मुख्यमंत्री के सामने एक क्लिक में सामने आ जाएगी। पहले जब किसी योजना की समीक्षा होती थी तो अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करके भेजनी पड़ती थी, फैसले में दिन लग जाते थे और कई बार सही जानकारी ऊपर तक पहुंचती ही नहीं थी। सीएम डैशबोर्ड 2.0 इस पूरी प्रक्रिया को बदल देगा।

इस सिस्टम में हर विभाग के लिए खास परफॉर्मेंस इंडिकेटर यानी केपीआई तय किए जाएंगे। इनके जरिए यह मापा जाएगा कि कोई योजना कितने फीसदी पूरी हुई है, कितने लोगों तक उसका फायदा पहुंचा है और कहां काम अटका हुआ है। जब कोई काम तय रफ्तार से नहीं हो रहा होगा तो उसकी जानकारी तुरंत मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी और वे सीधे दखल दे सकेंगे।

इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाला जैप-आईटी एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार कर रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पूरे सिस्टम को लागू किया जाएगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही होगी सुनिश्चित

झारखंड सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता और जवाबदेही में आएगा। अभी तक यह होता था कि योजना कागज पर तो बन जाती थी लेकिन जमीन पर उसका असर दिखने में काफी समय लगता था या कभी-कभी असर दिखता ही नहीं था। अधिकारी अच्छी-अच्छी रिपोर्ट भेजते थे और असल तस्वीर छुपी रह जाती थी।

सीएम डैशबोर्ड 2.0 में यह मुमकिन नहीं होगा क्योंकि डेटा सीधे जमीनी स्तर से आएगा और किसी के हाथ से गुजरे बिना ऊपर तक पहुंचेगा। इससे अधिकारी भी ज्यादा जिम्मेदार होंगे क्योंकि उन्हें पता होगा कि उनके काम पर सीधे मुख्यमंत्री की नजर है। फैसले लेने की प्रक्रिया भी तेज होगी क्योंकि जब समस्या तुरंत दिखेगी तो उसका हल भी जल्दी निकाला जा सकेगा।

यह व्यवस्था उन लाखों लोगों के लिए भी फायदेमंद होगी जो सरकारी योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं। जब किसी योजना में देरी होगी तो तुरंत पकड़ में आएगी और जल्दी ठीक की जाएगी।

कौशल विकास के लिए बनेगा नया संस्थान JKCL

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सीएम डैशबोर्ड 2.0 के साथ-साथ झारखंड सरकार ने एक और बड़ी पहल की घोषणा की है। राज्य में डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए झारखंड नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी जेकेसीएल बनाने का प्रस्ताव है।

यह संस्था राज्य सरकार, महाराष्ट्र नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एमकेसीएल और राज्य के विश्वविद्यालयों के संयुक्त सहयोग से काम करेगी। इसमें आईटी और ई-गवर्नेंस विभाग की 45 फीसदी हिस्सेदारी होगी, एमकेसीएल की 15 फीसदी और विश्वविद्यालयों की 40 फीसदी।

इस संस्था का मुख्य काम झारखंड के युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशल सिखाना होगा। खासतौर पर ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में रहने वाले युवाओं को डिजिटल कोर्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इन कोर्सों को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि जो पढ़ाई होगी वह सीधे रोजगार से जुड़ी हो।

झारखंड के युवाओं के लिए यह बेहद अहम कदम है। राज्य में अच्छी डिजिटल शिक्षा की कमी की वजह से कई होनहार युवा पिछड़ जाते थे। जेकेसीएल बनने से इस कमी को दूर करने की कोशिश होगी।

स्टार्टअप के सपने को मिलेगा असली सहारा

झारखंड सरकार ने युवा उद्यमियों के लिए भी एक बड़ा कदम उठाया है। झारखंड स्टार्टअप पॉलिसी 2023 के तहत राज्य में इनोवेशन और इन्क्यूबेशन सेंटर खोले जाएंगे। ये केंद्र उन युवाओं के लिए हैं जिनके पास कोई नया और अच्छा आइडिया है लेकिन उसे जमीन पर उतारने के लिए जरूरी सुविधाएं और संसाधन नहीं हैं।

इन सेंटरों में स्टार्टअप्स को तकनीकी मदद, टेस्टिंग की सुविधा और एक बेहतर काम का माहौल मिलेगा। यहां एफएबी लैब, आईओटी यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं होंगी। यहां आकर कोई भी युवा अपने प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप बना सकेगा और उसे टेस्ट कर सकेगा।

यह पहल इसलिए खास है क्योंकि झारखंड में अभी तक स्टार्टअप कल्चर उतना नहीं पनप पाया जितना होना चाहिए था। संसाधनों और सुविधाओं की कमी के कारण कई अच्छे आइडिया कागज से बाहर नहीं आ पाते थे। अब इन सेंटरों के जरिए उन्हें एक असली मौका मिलेगा।

यूडीडीपी से एक जगह मिलेगा सभी लाभार्थियों का डेटा

झारखंड सरकार की चौथी और बेहद अहम पहल है यूनिफाइड डिजिटल डेटा प्लेटफॉर्म यानी यूडीडीपी। इस प्लेटफॉर्म के जरिए राज्य और केंद्र सरकार की सभी योजनाओं के लाभार्थियों का एकीकृत डेटा एक ही जगह तैयार किया जाएगा।

अभी तक जो होता है वह यह है कि हर विभाग का डेटा अलग-अलग होता है। किसी के पास राशन कार्ड का डेटा है, किसी के पास पेंशन का, किसी के पास स्वास्थ्य योजना का। इन्हें आपस में जोड़ने में बहुत समय और मेहनत लगती है। इसकी वजह से एक ही व्यक्ति को कई जगह रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है और विभागों के बीच समन्वय नहीं हो पाता।

यूडीडीपी एक केंद्रीय डेटा भंडार की तरह काम करेगा जहां सारे विभागों का डेटा एक साथ होगा और आपस में जुड़ा होगा। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला, योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा और धांधली की गुंजाइश कम होगी। दूसरा, विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा जिससे योजनाओं को लागू करने में तेजी आएगी।

झारखंड की डिजिटल क्रांति का क्या होगा असर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार जो डिजिटल क्रांति ला रही है, उसका असर बहुत दूर तक जाएगा। सीएम डैशबोर्ड 2.0 से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी, जेकेसीएल से युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे, इन्क्यूबेशन सेंटर से नई उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा और यूडीडीपी से सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी।

यह सब मिलकर झारखंड को एक ऐसे राज्य की दिशा में ले जाएंगे जहां सरकार और जनता के बीच की दूरी कम हो, शासन पारदर्शी हो और युवाओं के पास आगे बढ़ने के असली मौके हों। तकनीक को जब सही नीयत और सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो वह सरकार और जनता दोनों के लिए गेम चेंजर साबित होती है और झारखंड इसी रास्ते पर चलता दिख रहा है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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