रांची: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मंगलवार को झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि यह महोत्सव न केवल हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण विकास और स्वरोजगार के लिए एक सशक्त मंच भी है. उन्होंने खादी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों का प्रतीक बताते हुए कहा कि खादी आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा का प्रतिनिधित्व करती है. यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रतीक रही है और आज भी हमारे कारीगरों को रोजगार देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को सशक्त बना रही है.

खादी को मिली वैश्विक पहचान-राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खादी को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है. ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से खादी को जनआंदोलन बनाने की उनकी पहल से ग्रामीण कारीगरों और श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. खादी मेले के माध्यम से महिला उद्यमियों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों से महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हो सकती हैं, बल्कि देश की आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान कर सकती हैं.
रांची के मोरहाबादी मैदान में 20 दिसंबर से लगा था खादी मेला
20 दिसंबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में खादी मेले का शुभारंभ किया गया था. पहले छह जनवरी को इसका समापन था, लेकिन किसी कारणवश इसकी तारीख बढ़ा दी गयी और सात जनवरी को खादी मेले का समापन हो गया. हर दिन सांस्कृति कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं को आयोजन किया गया. देश के कई राज्यों से कारीगर और उद्यमी खादी मेले में पहुंचे. यहां करीब 500 स्टॉल लगे थे. लोगों ने मनोरंजन के साथ जमकर खरीदारी की.

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