रांची: फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर राज्य के चिन्हित 14 जिलों के 91 प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के दौरान लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खिलायी जायेगी। स्वास्थ्यकर्मी, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों द्वारा योग्य लाभुकों को फाइलेरियारोधी दवा खिलायी जायेगी। सर्वजन दवा सेवन अभियान को लेकर राज्य वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक दिवसीय प्रशिक्षण के पहले दिन चार जिलों धनबाद, पाकुड़, देवघर तथा साहेबगंज के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग के स्वास्थ्य अधिकारी तथा कर्मी आदि शामिल हुए। अगले तीन दिनो तक चलने वाले
इस प्रशिक्षण में बचे अन्य ज़िलो के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, वीबीडी सलाहकार , प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा प्रखंड स्तरीय वीबीडी कर्मी, एफएलए, बीपीएम को प्रशिक्षण दिया जायेगा। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी—वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग, डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ अभिषेक पॉल, कंसल्टेंट विनय कुमार, नीलम कुमार, सज्ञा सिंह, जयंतदेव सिंह एंव डॉ इकबाल, पिरामल फांउडेशन के राज्य कार्यक्रम निदेशक अविनाश कात्यायन सहित वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग के अन्य वरीय स्वास्थ्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
दवा सेवन के लिए एडवाइजरी के नियमों का करें अक्षरश: पालन
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने प्रतिभागियों को निर्देश देते हुए कहा कि सर्वजन दवा सेवन अभियान को सफल बनाने के लिए सभी योग्य लाभुकों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन करायेंगे। राज्य की ओर से सर्वजन दवा सेवन अभियान की सफलता के लिए एडवाइजरी जारी की गयी है जिसमें दवा सेवन कराने संबंधी सभी आवश्यक नियमों की जानकारी दी गयी है। इस एडवाइजरी का अक्षरश: पालन करना है। दो साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं तथा अतिगंभीर बीमार व्यक्ति को दवा नहीं खिलानी है। उन्होंने कहा कि दवा पूरी तरह से सुरक्षित है और कहीं प्रतिकूल प्रभाव दिखता है तो इसका कारण उस व्यक्ति के शरीर में माइक्रोफाइलेरिया मौजूद हो सकता है। इससे घबराने की बात नहीं है। यह स्वयं ठीक हो जाता है और इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीम भी मौजूद है।
इन 14 जिलों में चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान
पाकुड़, कोडरमा और सिमडेगा में आइडीए के तहत तीन प्रकार प्रकार की दवा अल्बेंडाजोल, डीईसी के साथ आइवरमेक्टिन खिलायी जायेगी। जबकि रांची, गुमला, साहेबगंज, देवघर, धनबाद, बोकारो, गढ़वा, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, रामगढ़ तथा लोहरदगा में सिर्फ अल्बेंडाजोल तथा डीईसी की दवा खिलायी जायेगी।
स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने ही दवा का सेवन करायें :
प्रशिक्षण के दौरान स्टेट कंसल्टेंट विनय कुमार ने विभिन्न जिलों के डाटा को प्रस्तुत करते हुए कहा कि अभियान को लेकर माइक्रोप्लान की एनालिस अच्छी तरह करें। स्कूलों में कैंप लगाकर और घर—घर जाकर भी फाइलेरियारोधी दवा का सेवन कराना है। दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने ही करायेंगे। कंस्लटेंट एंटेमोलॉजी सज्ञा सिंह ने कहा कि मास ड्रस एडमिनिस्ट्रेशन के लिए उच्च प्राथमिकता वाले गांवों का चयन करें। ऐसे गांव का भी चयन करें जहां माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव लोगों की संख्या अधिक है। उन गांवों को विशेष रूप से चयन करना है जहां के लोगों में दवा सेवन करने के बाद उनमें प्रतिकूल प्रभाव सामने आये हैं। ऐसे गांवों का भी चयन करना आवश्यक है जहां के लोगों के द्वारा फाइलेरियारोधी दवा खाने से इंकार किया जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कॉर्डिनेटर डॉ अभिषेक पॉल ने कहा कि फाइलेरियारोधी दवा खाली पेट में नहीं खिलाना है। लाभुक से यह जरूर पूछना है कि दवा से पूर्व उन्होने कुछ खाया है अथवा नहीं। झारखंड के सभी जिले फाइलेरिया प्रभावित हैं। आइईसी कंस्लटेंट नीलम कुमार ने कहा सूचना शिक्षा व संचार की महत्वपूर्ण भूमिका है और इसका इस्तेमाल बेहतर तरीके से होना चाहिए। इसका प्रोटोटाइप राज्य से सभी जिलों को दिया गया है।इस मौके पर बीते वर्ष बेहतर करने वाले प्रखंड को पुरस्कृत किया गया.

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