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धनबाद में LPG गैस संकट, 72 घंटे में कीमत दोगुनी, कोयले की अंगीठी पर लौटा स्ट्रीट फूड का जायका जानें पूरी कहानी

Jharkhand News: कभी अपनी चटपटी चाट, गरमागरम पकौड़ों और देर रात तक जगमगाते फूड स्टॉल्स के लिए मशहूर धनबाद की शामें इन दिनों बेरौनक हो गई हैं। गैस बर्नर की नीली लौ की जगह कोयले के धुएं ने ले ली है। यह बदलाव किसी पसंद से नहीं, बल्कि मजबूरी से आया है।

72 घंटे में कैसे बदल गई तस्वीर?

Jharkhand News - LPG gas crisis in Dhanbad, price doubles in 72 hours
Jharkhand News – LPG gas crisis in Dhanbad, price doubles in 72 hours

तीन दिन पहले तक धनबाद के स्ट्रीट फूड विक्रेता सामान्य दरों पर गैस लेकर अपना कारोबार चला रहे थे। छोटू सिलेंडर की रिफिलिंग 95 रुपये प्रति किलो के भाव पर हो रही थी। 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 97 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध था।

लेकिन महज 72 घंटों के भीतर पूरी तस्वीर पलट गई। छोटू सिलेंडर रिफिलिंग 160 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई यानी 68 फीसदी की बढ़ोतरी। कमर्शियल गैस 310 रुपये प्रति किलो हो गई यानी तीन गुने से भी अधिक।

कमर्शियल उपयोग पर पाबंदी लगने के बाद अब दुकानदारों को मात्र 5 से 10 किलो के छोटे सिलेंडर ही मिल रहे हैं, वह भी मनमानी कीमत पर।

कालाबाजारी ने तोड़ी फूड मार्केट की कमर

रिफिलिंग सेंटर्स पर जारी कालाबाजारी ने पुलिस लाइन से लेकर बैंक मोड़ तक के पूरे फूड मार्केट को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई रिफिलिंग सेंटर्स पर ताले लटक गए हैं। जहां गैस मिल रही है वहां मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।

स्थानीय कारोबारियों के अनुसार पिछले तीन दिनों में इस इलाके के 40 से 50 फूड स्टॉल संचालकों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

दुकानदारों की जुबानी सुनिए उनकी पीड़ा

स्ट्रीट फूड विक्रेता कमल महतो ने बताया कि तीन दिन पहले तक 95 रुपये किलो गैस मिल रही थी, आज रिफिलिंग सेंटर पर ताले लटके हैं। जहां मिल भी रही है वहां 160 रुपये मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “छोटू सिलेंडर अब हमारी औकात से बाहर हो गया है। इतनी लागत में नाश्ता बेचना घाटे का सौदा है।”

साउथ का स्वाद दुकान चलाने वाले जयदेव कुमार ने बताया कि 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर तीन दिन पहले तक 97 रुपये प्रति किलो के भाव पर मिल रहा था। उन्होंने कहा, “आज बड़ी मुश्किल से दस किलो का सिलेंडर मिला है जिसकी कीमत 310 रुपये प्रति किलो के भाव पर पड़ा है। ऐसे में दुकानदारी चलाना संभव नहीं।”

कोयले पर लौटा धनबाद का जायका

यह विडंबना ही है कि कोयला नगरी धनबाद में एक बार फिर कोयला ही जिंदगी का सहारा बन गया है। जिस कोयले को आधुनिकता के इस दौर में बीते कल की बात मानकर छोड़ दिया गया था, आज वही कोयला छोटे दुकानदारों की रसोई में वापस लौट आया है।

गैस बर्नर पर फटाफट ऑर्डर तैयार करने वाले दुकानदार अब घंटों कोयले की अंगीठी सुलगाने में बिताते हैं। इससे खाना बनाने का समय बढ़ा है, गुणवत्ता प्रभावित हुई है और ग्राहकों की संख्या घटी है।

आम ग्राहकों पर क्या असर?

गैस संकट का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं है। बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए कई विक्रेताओं ने खाने के दाम 10 से 20 रुपये प्रति प्लेट बढ़ा दिए हैं।

कोयले की अंगीठी पर बना खाना गैस पर बने खाने जितना साफ और सुरक्षित नहीं होता। धुएं से स्वाद और सेहत दोनों पर असर पड़ता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की स्थानीय महंगाई सीधे निम्न और मध्यम वर्ग की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है।

प्रशासन क्या कर रहा है?

अभी तक जिला प्रशासन या गैस वितरण एजेंसियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए स्थानीय व्यापारी प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो धनबाद के फूड मार्केट का यह संकट और गहरा सकता है।

दुकानदार क्या करें जरूरी सुझाव

गैस संकट में फूड कारोबारी कुछ व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करें। स्थानीय व्यापार मंडल के माध्यम से सामूहिक आवाज उठाएं। कालाबाजारी की शिकायत सीधे जिला प्रशासन या हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराएं। इंडक्शन कुकर जैसे वैकल्पिक उपकरणों के उपयोग पर विचार करें जो बिजली से चलते हैं।

Jharkhand News: निष्कर्ष

धनबाद का यह गैस संकट सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है। यह उस बड़ी व्यवस्था की खामी की कहानी है जहाँ नीतिगत फैसलों की मार सबसे पहले छोटे कारोबारियों और आम आदमी पर पड़ती है। कोयला नगरी का जायका गैस की लौ से कोयले के धुएं में लौट आए यह खबर नहीं, एक चेतावनी है।

प्रशासन को चाहिए कि कालाबाजारी पर तुरंत शिकंजा कसे और उचित मूल्य पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करे वरना धनबाद के फूड मार्केट की रौनक और गहरे धुएं में खोती चली जाएगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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