Health News: भारत में चावल सिर्फ एक खाने की चीज नहीं है, यह करोड़ों लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। देश की करीब 55 फीसदी से ज्यादा आबादी रोज चावल खाती है। लेकिन हमेशा से एक बड़ी दिक्कत यह रही है कि पॉलिश किया हुआ सफेद चावल खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीजों को चावल खाने से मना किया जाता था। इसके अलावा चावल में प्रोटीन की मात्रा भी बहुत कम होती है। लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने इन दोनों समस्याओं का एक साथ हल खोज निकाला है।
CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और NIIST यानी नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खास डिजाइनर राइस तैयार किया है जो सामान्य सफेद चावल से तीन गुना ज्यादा प्रोटीन देता है, ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है और साथ में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है। सबसे खास बात यह है कि इस चावल का स्वाद और इसे पकाने का तरीका बिल्कुल आम चावल जैसा ही है। अब इस तकनीक को टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा है ताकि यह जल्द से जल्द आम लोगों की रसोई तक पहुंच सके।
क्यों पड़ी इस डिजाइनर राइस की जरूरत, समझें पूरी बात
CSIR-NIIST के वैज्ञानिकों ने यह डिजाइनर राइस दो बड़ी समस्याओं को एक साथ हल करने के लिए बनाया है। पहली समस्या है ब्लड शुगर की और दूसरी समस्या है पोषण की कमी की।
आम पॉलिश किए हुए सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है। इसका मतलब यह है कि यह खाने के तुरंत बाद पच जाता है और खून में शुगर की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों को सफेद चावल न खाने की सलाह दी जाती है। भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में एक बड़ी आबादी को अपनी सबसे पसंदीदा खाने की चीज छोड़नी पड़ रही थी।
दूसरी समस्या यह है कि एशिया और अफ्रीका में बहुत से लोग पेट भरने के लिए मुख्य रूप से चावल पर निर्भर हैं। वे कैलोरी तो पर्याप्त लेते हैं लेकिन उनके शरीर में प्रोटीन, आयरन और विटामिन की कमी बनी रहती है। इसे हिडन हंगर यानी छुपी हुई भूख कहते हैं जहां पेट भरा होता है लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलता। वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर चावल को ही ज्यादा पोषक बना दिया जाए तो लोगों की खाने की आदतें बदले बिना उनकी सेहत सुधर सकती है। इसी सोच से डिजाइनर राइस का आइडिया आया।
3 गुना प्रोटीन, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और विटामिन से भरपूर

CSIR-NIIST के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस डिजाइनर राइस की खासियतें इसे आम चावल से बिल्कुल अलग और बेहतर बनाती हैं।
सबसे पहली और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस चावल में सामान्य सफेद चावल के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा प्रोटीन होगा। भारत में बहुत से लोग अपनी ज्यादातर कैलोरी चावल से लेते हैं और उनके लिए प्रोटीन की जरूरत पूरी करना हमेशा मुश्किल रहा है। अब इसी चावल से तीन गुना ज्यादा प्रोटीन मिलेगा तो यह उनकी सेहत के लिए बड़ा बदलाव लाएगा।
दूसरी बड़ी खासियत है इसका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स। वैज्ञानिकों ने इस चावल की कार्बोहाइड्रेट संरचना में खास बदलाव किए हैं ताकि यह धीरे-धीरे पचे और खून में शुगर भी धीरे-धीरे जाए। इसका मतलब यह है कि डायबिटीज के मरीज भी अब यह चावल खा सकते हैं। ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ेगा बल्कि पाचन की प्रक्रिया धीमी और संतुलित होगी जो शरीर के लिए बेहतर होती है।
तीसरी खासियत है इसमें मिलाए गए खास पोषक तत्व। इस चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे जरूरी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। आयरन की कमी से खून की कमी यानी एनीमिया होती है जो भारत में बेहद आम है। फोलिक एसिड और विटामिन बी12 दिमाग और नर्व सिस्टम के लिए बेहद जरूरी हैं। यह सारे पोषक तत्व अब आपको रोज के चावल से ही मिलेंगे।
सबसे अच्छी बात जो इस डिजाइनर राइस को सबसे अलग और खास बनाती है वो यह है कि इसे पकाने का तरीका बिल्कुल सामान्य चावल जैसा ही है और इसका स्वाद भी वैसा ही है। यानी लोगों को अपनी खाने की आदतें बदलने की कोई जरूरत नहीं है। वही पसंदीदा चावल खाइए लेकिन उससे मिलने वाला पोषण कई गुना बढ़ जाएगा।
टाटा को दी गई तकनीक, जल्द मिलेगा बाजार में
CSIR-NIIST के वैज्ञानिकों ने इस डिजाइनर राइस की तकनीक को अब टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड जैसी बड़ी और भरोसेमंद कंपनी को सौंपा है। यह इसलिए किया गया है ताकि यह चावल जल्द से जल्द बड़े पैमाने पर तैयार होकर देश के हर कोने में आम लोगों तक पहुंच सके। एक बड़ी कंपनी के हाथ में तकनीक जाने के बाद इसका उत्पादन तेजी से बढ़ेगा और बाजार में यह आम चावल की तरह उपलब्ध होगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डिजाइनर राइस भारत में कुपोषण, डायबिटीज और प्रोटीन की कमी जैसी तीन बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से एक साथ लड़ने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। जब करोड़ों लोग रोज जो चावल खाते हैं वही उन्हें ज्यादा प्रोटीन, जरूरी विटामिन और कंट्रोल्ड शुगर देने लगे तो इसका असर देश की सेहत पर बहुत गहरा और बड़ा होगा। भारतीय विज्ञान की यह उपलब्धि सच में एक बड़ा कदम है।
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