Top 5 This Week

Related Posts

Nainital Pari Tal Mystery: दिन में स्वर्ग जैसा खूबसूरत, रात में रहस्यमयी हो जाता है यह ताल, पूर्णिमा की रात परियों के उतरने की लोककथा से जुड़ा है रहस्य

Nainital Pari Tal Mystery: उत्तराखंड के नैनीताल को झीलों की नगरी के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। नैनी झील, भीमताल, सातताल और नौकुचियाताल जैसी मशहूर झीलों के बीच कुमाऊं की शांत वादियों में एक ऐसी भी झील छिपी है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से अधिक अपने अनसुलझे रहस्यों और लोककथाओं के लिए जानी जाती है। इसका नाम है परीताल। घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कलकल बहते झरनों के बीच स्थित यह ताल दिन के उजाले में जितना शांत और मनमोहक प्रतीत होता है, रात के अंधेरे में इसका वातावरण उतना ही रहस्यमयी और रोमांचक बन जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, हर पूर्णिमा की रात यहां आसमान से परियां उतरती हैं और इसके पवित्र जल में स्नान करती हैं।

नैनीताल के अनछुए इलाकों में स्थित होने के कारण यहां आम पर्यटकों की भीड़भाड़ देखने को नहीं मिलती। व्यावसायिक गतिविधियों से दूर होने की वजह से यह स्थान आज भी अपने मूल प्राकृतिक स्वरूप को संजोए हुए है। जो एडवेंचर प्रेमी और प्रकृति के साधक यहां तक पहुंचते हैं, वे इसके हरे पन्ना जैसे साफ पानी और इसके साथ जुड़ी अलौकिक कहानियों के सम्मोहन में बंध जाते हैं।

Nainital Pari Tal Mystery: पूर्णिमा की चांदनी रात और परियों के उतरने की लोक मान्यता

कुमाऊं अंचल में सदियों से यह लोक मान्यता प्रचलित है कि हर पूर्णिमा की चांदनी रात में परीताल पर अलौकिक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस रात परियां ताल के स्वच्छ जल में स्नान करने के लिए स्वर्ग से उतरती हैं और प्रकृति के सुरम्य वातावरण में नृत्य करती हैं। स्थानीय ग्रामीण इस मान्यता और ताल की पवित्रता का बेहद सम्मान करते हैं।

यही कारण है कि पूर्णिमा की रात ग्रामीण स्वयं भी इस झील के किनारे जाने से बचते हैं और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी रात के समय वहां न रुकने की सख्त सलाह देते हैं। दिन में जो पानी सूरज की किरणों के साथ चमकता है, वही रात के सन्नाटे में एक जादुई दुनिया का अहसास कराता है। यह रहस्यमयी आकर्षण ही आज कई ट्रेकर्स और शोधकर्ताओं को इस स्थान की ओर खींच रहा है।

झील की अथाह गहराई और काली चट्टानों का रहस्य

परीताल की सबसे हैरान करने वाली बात इसकी गहराई है। आज तक आधुनिक उपकरणों या स्थानीय तैराकों द्वारा इसकी वास्तविक गहराई की थाह नहीं लगाई जा सकी है। स्थानीय लोग इसे अथाह मानते हैं और इसी कारण ताल के गहरे पानी में उतरने या तैरने पर सख्त पाबंदी है। यह अनजानी गहराई इस ताल को और अधिक रोमांचक बनाती है।

इसके अलावा, झील के चारों ओर फैली विशाल काली चट्टानें भी लोगों का ध्यान खींचती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन चट्टानों में प्राकृतिक रूप से दुर्लभ शिलाजीत मौजूद है, जो आयुर्वेद में अत्यंत गुणकारी माना जाता है। ताल का पानी पन्ना (Emerald Green) जैसा साफ और हरा दिखाई देता है। ताल के ऊपरी हिस्से से गिरता एक प्राकृतिक झरना इसके दृश्य को और अधिक अलौकिक बना देता है।

दिल्ली से कैसे पहुंचें परीताल: रूट और ट्रेकिंग गाइड

दिल्ली और अन्य मैदानी इलाकों से परीताल पहुंचना बेहद सुगम है, हालांकि यात्रा का अंतिम चरण रोमांचक ट्रेक पर आधारित है:

  • सड़क मार्ग: दिल्ली से गाजियाबाद, मुरादाबाद, रामपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी होते हुए पहले नैनीताल या भीमताल पहुंचें।

  • ट्रेक का शुरुआती बिंदु: भीमताल से धानाचूली मार्ग होते हुए चाफी गांव पहुंचना होता है।

  • पैदल ट्रेक: चाफी गांव से परीताल तक लगभग 3 से 5 किलोमीटर का पैदल ट्रेक है, जो घने बांज और बुरांश के जंगलों से होकर गुजरता है।

ट्रेक के रास्ते में ब्रिटिश काल का एक प्राचीन लोहे और पत्थर का पुल भी मिलता है। अंग्रेजों के दौर का यह ऐतिहासिक ढांचा आज भी ट्रेकर्स के बीच फोटोग्राफी के लिए एक लोकप्रिय पड़ाव है। पूरा ट्रेकिंग रूट पक्षियों की चहचहाहट, नदी की कलकल और ठंडी हवाओं से भरा रहता है।

Nainital Pari Tal Mystery: एडवेंचर प्रेमियों और शांति चाहने वालों के लिए आदर्श ठिकाना

परीताल उन घुमक्कड़ों के लिए बिल्कुल सही विकल्प है जो नैनीताल की पारंपरिक भीड़भाड़ और मॉल रोड की हलचल से दूर एकांत तलाशते हैं। यहां न तो कंक्रीट के बड़े होटल हैं और न ही दुकानें। ट्रेक के दौरान छोटी नदियों को पार करना और प्राकृतिक पगडंडियों पर चलना रोमांच को दोगुना कर देता है।

स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों द्वारा इस क्षेत्र को ‘इको-टूरिज्म’ के नियमों के तहत संरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। यहां आने वाले पर्यटकों से अपील की जाती है कि वे प्लास्टिक या कचरा न फैलाएं और ताल के जल की पवित्रता बनाए रखें। यदि आप नैनीताल की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस छिपे हुए प्राकृतिक अजूबे और इसकी रहस्यमयी लोककथाओं का अनुभव करने के लिए परीताल का रुख अवश्य करें।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles