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सर्राफा बाजार में तूफान, चांदी 24,000 रुपए सस्ती, सोना भी लुढ़का, फेड नीति और वैश्विक कारकों ने बिगाड़ा खेल

Gold-Silver Price Today: गुरुवार को सर्राफा बाजार में भूकंप आ गया। कीमती धातुओं में भारी गिरावट दर्ज की गई जिसने निवेशकों को चौंका दिया। वायदा बाजार में चांदी ने करवट ली और एक ही झटके में 24,000 रुपए से अधिक सस्ती हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर मार्च डिलीवरी अनुबंध के लिए चांदी बीते कारोबारी सत्र के मुकाबले 9.03 प्रतिशत यानी करीब 36,000 रुपए की भारी गिरावट के साथ 2,44,562 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई। सोने ने भी निवेशकों को निराश किया। अप्रैल डिलीवरी अनुबंध के लिए सोने के भाव में 1.27 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई और यह 1,51,106 रुपए प्रति 10 ग्राम पर सिमट गया।

यह गिरावट काफी अप्रत्याशित थी। पिछले कुछ दिनों से दोनों धातुओं में उतार चढ़ाव का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना एक प्रतिशत से अधिक लुढ़ककर 4,880 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति में अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक संकेत इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।

चांदी में लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट

Gold-Silver Price - Silver Price Down
Gold-Silver Price – Silver Price Down

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गुरुवार सुबह 10 बजकर 27 मिनट पर चांदी में भारी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। यह लगातार तीसरा दिन था जब चांदी में तेज गिरावट दर्ज की गई। मार्च डिलीवरी के लिए चांदी 9.03 प्रतिशत टूटकर 2,44,562 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट बेहद तीव्र और अचानक थी। कुछ हफ्ते पहले चांदी के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे जब यह 2,80,000 रुपए प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई थी। लेकिन अब तेजी से सुधार हो रहा है। वैश्विक कारकों का सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। चांदी का उपयोग केवल आभूषण बनाने में ही नहीं होता। इसका औद्योगिक क्षेत्र में भी व्यापक उपयोग है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, सोलर पैनल, बैटरी और अन्य तकनीकी उत्पादों के निर्माण में चांदी आवश्यक है। जब औद्योगिक उत्पादन में कमी आती है तो चांदी की मांग घटती है। चीन में औद्योगिक उत्पादन धीमा होने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग में कमी के संकेतों से चांदी पर दबाव बना। निवेशक भी जोखिम से बचने के लिए चांदी बेच रहे हैं।

सोना भी नहीं बचा गिरावट से

चांदी के साथ सोने में भी जोरदार गिरावट देखी गई। एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी अनुबंध के लिए सोने के भाव में बीते सत्र के मुकाबले 1.27 प्रतिशत की गिरावट आई। सोना 1,51,106 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि सोने की गिरावट चांदी की तुलना में कम रही लेकिन फिर भी यह महत्वपूर्ण है। सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश का साधन माना जाता है। जब शेयर बाजार में अस्थिरता होती है या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या आर्थिक स्थिति में सुधार आता है तो सोने की चमक फीकी पड़ती है।

इन दिनों अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता है। फेड गवर्नर लिसा कुक के बयान से संकेत मिला कि ब्याज दरों में जल्दी कटौती नहीं होगी। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि निवेशक बैंकों में बेहतर रिटर्न पा सकते हैं। यही कारण है कि सोने की मांग घट रही है।

प्रमुख शहरों में सोने के आज के भाव

देश के विभिन्न शहरों में सोने के हाजिर भाव अलग अलग हैं। गुडरिटर्न्स के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 24 कैरेट सोना 15,457 रुपए प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 14,170 रुपए प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,597 रुपए प्रति ग्राम पर है। मुंबई में 24 कैरेट सोना 15,442 रुपए, 22 कैरेट 14,155 रुपए और 18 कैरेट 11,582 रुपए प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। कोलकाता में भाव मुंबई के समान हैं।

चेन्नई में सोना सबसे महंगा है जहां 24 कैरेट 15,622 रुपए, 22 कैरेट 14,320 रुपए और 18 कैरेट 12,250 रुपए प्रति ग्राम है। बैंगलुरु में भाव मुंबई और कोलकाता के बराबर हैं। अलग अलग शहरों में कीमतों का अंतर स्थानीय करों, परिवहन खर्च, स्थानीय मांग और सर्राफा व्यापारियों के मार्जिन के कारण होता है। दक्षिण भारत में सोने की मांग अधिक होने से कीमतें कुछ ऊंची रहती हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट का दौर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को सोना एक प्रतिशत से अधिक टूटकर लगभग 4,880 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इससे पिछले दो दिन की रिकवरी से मिली बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई। फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती पर सावधानी बरतने की बात से बाजार में बिकवाली का दबाव बना। फेड गवर्नर लिसा कुक ने स्पष्ट किया कि वह अतिरिक्त ब्याज दर कटौती का समर्थन नहीं करेंगी। उन्होंने श्रम बाजार में धीमेपन के संकेतों को नजरअंदाज करते हुए लगातार बढ़ती महंगाई के जोखिमों को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को अगले फेड चेयरमैन के रूप में नामित किए जाने से भी बाजार में हलचल मची। वॉर्श को अन्य दावेदारों की तुलना में अधिक कठोर यानी हॉकिश माना जाता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वॉर्श की नियुक्ति का मतलब है कि ब्याज दर कटौती की गति धीमी रहेगी। इस हफ्ते की शुरुआत में सोने में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई थी जो 2008 के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी उछाल थी। यह तेजी गिरावट में खरीदारी से आई थी लेकिन अब फिर से गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सबक

सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है। जो निवेशक ऊंचे भाव पर खरीदारी करते हैं उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। दूसरी ओर जो निवेशक गिरावट में खरीदारी करते हैं उन्हें बाद में अच्छा मुनाफा मिलता है। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि कीमती धातुओं में निवेश करते समय धैर्य रखना अत्यंत आवश्यक है। एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय समय समय पर छोटी छोटी रकम निवेश करना बेहतर रणनीति है।

इसे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान कहते हैं। सोने और चांदी में निवेश हमेशा दीर्घकालिक नजरिए से करना चाहिए। अल्पकालिक उतार चढ़ाव देखकर घबराना या जल्दबाजी में फैसले लेना नुकसानदेह हो सकता है। कीमती धातुएं महंगाई के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करती हैं। निवेश पोर्टफोलियो में 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा सोने और चांदी में रखना समझदारी है।

Gold-Silver Price Today: कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक

सोने और चांदी की कीमतें कई महत्वपूर्ण कारकों से प्रभावित होती हैं। दुनिया भर में मांग और आपूर्ति की स्थिति सबसे प्रमुख कारक है। भारत और चीन जैसे देशों में त्योहारों और शादी के मौसम में सोने की मांग काफी बढ़ जाती है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी सीधे असर डालती है। डॉलर मजबूत होने पर सोना सस्ता होता है क्योंकि अन्य मुद्राओं में इसकी खरीद शक्ति कम हो जाती है।

वैश्विक भूराजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और युद्ध जैसी स्थितियों में निवेशक सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने में गिरावट आती है। तेल की कीमतें, शेयर बाजार का प्रदर्शन और औद्योगिक उत्पादन भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित करते हैं।

सर्राफा बाजार में आई यह भारी उथल पुथल निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी देती है। कीमतों में तेज बदलाव हो रहे हैं इसलिए सोच समझकर और विशेषज्ञों की सलाह लेकर निवेश करना उचित है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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