West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद अब पार्टी की नजर बंगाल पर टिकी है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने उत्तर प्रदेश से 54 अनुभवी नेताओं को बंगाल की चुनावी जमीन पर उतार दिया है। इन नेताओं में मंत्री से लेकर संगठन के जानकार चेहरे शामिल हैं जो पार्टी के लिए बंगाल में जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बंगाल की 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों की जिम्मेदारी सीधे यूपी के इन नेताओं को सौंपी गई है। हर सीट पर इन नेताओं को पूरी तरह से कैंप लगाकर चुनावी तैयारियों को मजबूत करने का काम दिया गया है। राज्य ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के लिए बंगाल का यह चुनाव नाक का सवाल बन गया है और देशभर की नजर इस चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई है।
तीन बड़े नेताओं को मिली अहम कमान

भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल को छह अलग-अलग क्षेत्रों में बांट दिया है। इन छह क्षेत्रों में से तीन की कमान तीन बड़े नेताओं को सौंपी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश सरकार में कमान सरकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत शामिल हैं। इन तीनों नेताओं के साथ एक-एक राज्य के संगठन महामंत्री भी लगाए गए हैं जो जमीनी स्तर पर काम करने में मदद कर रहे हैं।
जेपीएस राठौर को कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का दायित्व मिला है। राठौर उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रहे हैं और उनकी संगठन की गहरी समझ को देखते हुए पार्टी ने अक्टूबर महीने में ही उन्हें बंगाल भेज दिया था। यह पहली बार नहीं है जब राठौर बंगाल में तैनात हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी वह यहां काम कर चुके हैं।
वहीं पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तरी क्षेत्र की कमान मिली है। राणा को पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण सीटों की जिम्मेदारी दी थी और वहां उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा था।
पांच जिलों में यूपी के नेताओं का प्रभार
पश्चिम बंगाल के कुल 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार सीधे उत्तर प्रदेश के बड़े चेहरों को दिया गया है। इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र दयालु, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक का नाम शामिल है।
सुब्रत पाठक को हुगली जिले का दायित्व सौंपा गया है जहां की स्थिति पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण है। हुगली में सात विधानसभा सीटें हैं और इन सीटों पर फिलहाल एक भी भाजपा विधायक नहीं है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा का सांसद जीत चुका है, जिससे पार्टी को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में भी यहां अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है।
पूर्व मंत्रियों और विधायकों की तैनाती
पार्टी ने विभिन्न विधानसभा सीटों पर अनुभवी नेताओं को तैनात किया है। पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण में बिहाला सीट का काम दिया गया है। उपेंद्र तिवारी हावड़ा टाउन की संकरेल सीट पर डटे हुए हैं जबकि आनंद शुक्ला को हाबरा सीट की जिम्मेदारी मिली है।
मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज को बैरकपुर जिले की जगतदल विस सीट सौंपी गई है। कानपुर से विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इन सभी नेताओं को अपनी-अपनी सीटों पर पार्टी की जमीन मजबूत करने और मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने का काम दिया गया है।
जिला और प्रदेश स्तर के कार्यकर्ता भी मैदान में
केवल बड़े नेता ही नहीं बल्कि जिला स्तर, क्षेत्र स्तर और प्रदेश स्तर के संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी बंगाल भेजा गया है। ये कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं और मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। पार्टी का मानना है कि संगठन की ताकत ही चुनाव में जीत दिला सकती है।
बिहार की जीत से मिला उत्साह
बिहार विधानसभा चुनाव में भारी जीत ने भाजपा के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है। पार्टी ने बिहार में जिस तरह से रणनीति बनाई थी और जीत हासिल की थी, उसी फार्मूले को अब बंगाल में भी आजमाने की योजना बनाई है। बिहार चुनाव में यूपी के नेताओं की भूमिका काफी अहम रही थी और अब वही नेता बंगाल में भी अपनी कामयाबी दोहराने के लिए तैयार हैं।
चुनावी रणनीति में संगठन की समझ जरूरी
भाजपा ने जिन नेताओं को बंगाल भेजा है उनमें से ज्यादातर संगठन की गहरी समझ रखते हैं। इन नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में चुनावी लड़ाई लड़ी है और सफलता हासिल की है। पार्टी का मानना है कि बंगाल में जीत के लिए केवल बड़े नेताओं का चेहरा काफी नहीं है बल्कि जमीनी संगठन मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से संगठन के अनुभवी लोगों को यहां भेजा गया है।
West Bengal Election: देशभर की नजर बंगाल चुनाव पर
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था लेकिन सत्ता नहीं मिल पाई थी। इस बार पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है और हर संभव प्रयास कर रही है कि बंगाल में सरकार बनाई जा सके। देशभर की राजनीतिक पार्टियां इस चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं क्योंकि बंगाल का नतीजा आगे की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
उत्तर प्रदेश से गए इन 54 नेताओं पर अब बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करें। चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और आने वाले दिनों में इन नेताओं की भूमिका और भी अहम हो जाएगी।



