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Strength Training Benefits: हफ्ते में सिर्फ 2 घंटे की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग घटा सकती है मौत का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Strength Training Benefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है। सुबह होते ही लोग पार्क में दौड़ते, योग करते या तेज कदमों से चलते दिख जाते हैं। लेकिन फिटनेस को लेकर अक्सर एक आम धारणा बनी हुई है कि जिम में भारी वजन उठाना या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना सिर्फ बॉडीबिल्डर्स या एथलीट्स का काम है। अब एक नई वैज्ञानिक शोध ने इस सोच को पूरी तरह से बदलने का काम किया है। हाल ही में हुई एक बड़ी रिसर्च बताती है कि स्वस्थ और लंबी उम्र जीने के लिए सिर्फ पैदल चलना काफी नहीं है, बल्कि हफ्ते में कुछ घंटे वजन उठाने वाली कसरत करना भी बेहद जरूरी है।

Strength Training Benefits: क्या कहती है नई शोध की रिपोर्ट

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित यह अध्ययन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और सलाह दोनों है। वैज्ञानिकों ने करीब 1.47 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा को आधार बनाकर लगभग 30 वर्षों तक उन पर नजर रखी। इस दौरान शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि व्यायाम की कौन सी शैली शरीर पर कितना प्रभाव डालती है। नतीजों ने साफ कर दिया कि जो लोग नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उनमें दिल की बीमारियों, कैंसर और असामयिक यानी समय से पहले होने वाली मृत्यु का खतरा काफी कम होता है।

इस अध्ययन का सबसे सुखद पहलू यह है कि आपको लंबी उम्र के लिए जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि हफ्ते में केवल 90 से 120 मिनट यानी करीब डेढ़ से दो घंटे की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ही शरीर में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पर्याप्त है। जो लोग इतने समय तक वजन उठाने वाली एक्सरसाइज करते हैं, वे बिना किसी कसरत करने वाले लोगों के मुकाबले बेहतर स्वास्थ्य का आनंद लेते हैं।

कार्डियो और वेट ट्रेनिंग का मिलाजुला असर

शोध में यह बात उभरकर सामने आई है कि केवल कार्डियो एक्सरसाइज करना अधूरा काम है। वॉकिंग, रनिंग या साइकिलिंग जैसे कार्डियो व्यायाम हमारे दिल और फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं और शरीर में रक्त संचार को बेहतर करते हैं। वहीं दूसरी ओर, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हमारी मांसपेशियों को मजबूती देती है, हड्डियों के घनत्व को बढ़ाती है और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखती है।

अध्ययन में उन लोगों की सेहत सबसे बेहतर पाई गई जिन्होंने कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया था। ऐसे व्यक्तियों में मृत्यु दर का जोखिम उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम देखा गया जो बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते थे। यह स्पष्ट करता है कि शरीर को पूरी सुरक्षा यानी ‘फुल प्रोटेक्शन’ देने के लिए व्यायाम की इन दोनों शैलियों का संतुलन बनाना ही सफलता की असली कुंजी है।

Strength Training Benefits: उम्र बढ़ने के साथ क्यों जरूरी है मांसपेशियों की ताकत

जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और हड्डियां अपना घनत्व खोने लगती हैं। इसे चिकित्सा भाषा में सार्कोपेनिया कहा जाता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न केवल मांसपेशियों के इस नुकसान को रोकती है, बल्कि शरीर के संतुलन और स्टेमिना को भी बनाए रखती है। एक मजबूत शरीर होने का मतलब है कि आप उम्र बढ़ने पर भी रोजमर्रा के काम आसानी से कर सकते हैं और गिरने या चोट लगने जैसी समस्याओं का खतरा भी कम हो जाता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही कोई व्यक्ति बहुत कम मात्रा में ही स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करता है, उसका भी सकारात्मक असर शरीर पर देखने को मिलता है। शुरुआत में बहुत भारी वजन उठाने की जरूरत नहीं होती, आप हल्की वेट ट्रेनिंग, रेजिस्टेंस बैंड या अपने शरीर के वजन के साथ की जाने वाली कसरत जैसे पुश-अप्स और स्क्वाट्स से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

Strength Training Benefits: सावधानी भी जरूरी

हालांकि यह स्टडी बेहद उत्साहजनक है, लेकिन शोधकर्ताओं ने साथ ही यह भी साफ किया है कि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है। इसमें लोगों द्वारा दी गई जानकारी को आधार बनाया गया है, इसलिए इसमें छोटी मोटी गलतियों की गुंजाइश हो सकती है। यह शोध सीधे तौर पर यह दावा नहीं करता कि सिर्फ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से ही उम्र बढ़ जाती है, लेकिन यह निश्चित रूप से व्यायाम और लंबी उम्र के बीच एक गहरे संबंध को मजबूती से स्थापित करता है।

यह बात गांठ बांध लेना जरूरी है कि स्वास्थ्य कोई एक दिन का काम नहीं है। यदि आप आज से ही हफ्ते में कम से कम दो घंटे की मेहनत करने का संकल्प लेते हैं, तो यह आपकी आने वाली दशकों की सेहत के लिए सबसे बड़ा निवेश साबित होगा। अपने डॉक्टर या ट्रेनर से सलाह लें और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, ताकि आप न केवल लंबी उम्र जी सकें, बल्कि उस उम्र में स्वस्थ और सक्रिय भी रह सकें।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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