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पटना के गर्दनीबाग में PNG की सप्लाई शुरू, फतुहा के उद्योगों को भी जल्द मिलेगी नेचुरल गैस, लागत होगी कम

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की आपूर्ति का दायरा लगातार बढ़ रहा है। गर्दनीबाग इलाके में अब पीएनजी की आपूर्ति शुरू हो गई है। यह आपूर्ति गर्दनीबाग और बाइपास सिपारा में बने डिस्ट्रिक्ट रेगुलेटिंग सिस्टम यानी DRS के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में इस इलाके के दो दर्जन से अधिक घरों को चार्ज किया गया है और लोगों ने गैस का उपयोग शुरू कर दिया है। इसके साथ ही फतुहा में स्थित औद्योगिक इकाइयों को भी जल्द ही पीएनजी की आपूर्ति शुरू होने वाली है।

गेल इंडिया के महाप्रबंधक एके सिंह ने बताया कि गर्दनीबाग इलाके में पीएनजी आपूर्ति आरंभ हो गई है और 10 उपभोक्ता इसका उपयोग करने लगे हैं। जल्द ही पूरे इलाके में कनेक्शन दिया जाएगा। इलाके में पीएनजी कनेक्शन के लिए करीब एक हजार लोगों ने आवेदन दिया है जिनमें से दो सौ लोगों को कनेक्शन दिया जा चुका है। सबसे पहले आफिसर एनक्लेव में यह सुविधा दी गई है।

गर्दनीबाग में शुरू हुई पीएनजी सप्लाई

Bihar News: PNG Pipe Supply
Bihar News: PNG Pipe Supply

पटना के गर्दनीबाग क्षेत्र में पाइप्ड नेचुरल गैस की आपूर्ति शुरू होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह इलाका पटना का एक प्रमुख आवासीय क्षेत्र है जहां हजारों परिवार रहते हैं। अब तक यहां के लोग एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर थे लेकिन अब उन्हें पीएनजी की सुविधा मिल गई है। पीएनजी सिलेंडर से सस्ती होती है और इसमें गैस खत्म होने या सिलेंडर बदलने की परेशानी भी नहीं होती। पाइप के जरिए लगातार गैस की आपूर्ति होती रहती है।

वर्तमान में दो दर्जन से अधिक घरों में गैस जल रही है। ये वे परिवार हैं जिन्होंने सबसे पहले कनेक्शन लिया और जिनके घरों में पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो गया। इन परिवारों ने बताया कि पीएनजी से खाना बनाना बहुत सुविधाजनक हो गया है। गैस की लौ स्थिर रहती है और कभी गैस खत्म होने की चिंता नहीं होती। सिलेंडर मंगवाने और उसे बदलने की परेशानी से भी छुटकारा मिल गया है।

एक हजार लोगों ने किया आवेदन

गर्दनीबाग इलाके में पीएनजी कनेक्शन के लिए करीब एक हजार लोगों ने आवेदन दिया है। यह दिखाता है कि इस सुविधा के लिए कितनी मांग है। लोग एलपीजी सिलेंडर से पीएनजी की ओर शिफ्ट होना चाहते हैं। अब तक दो सौ लोगों को कनेक्शन दिया जा चुका है। बाकी आवेदकों को भी चरणबद्ध तरीके से कनेक्शन दिया जाएगा। गेल की टीम लगातार इलाके में पाइपलाइन बिछाने का काम कर रही है।

सबसे पहले आफिसर एनक्लेव में यह सुविधा दी गई है। यह एक नियोजित कॉलोनी है जहां सरकारी अधिकारी रहते हैं। यहां पाइपलाइन बिछाना और कनेक्शन देना अपेक्षाकृत आसान था। धीरे धीरे पूरे गर्दनीबाग इलाके में नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। गेल के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आवेदकों को कनेक्शन मिल जाएगा। जिन लोगों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है वे भी आवेदन कर सकते हैं।

पांच DRS से हो रही आपूर्ति

पटना में गेल इंडिया की ओर से एम्स से गांधी मैदान तक पाइपलाइन के माध्यम से गैस की आपूर्ति की जा रही है। इसके लिए पांच डिस्ट्रिक्ट रेगुलेटिंग सिस्टम यानी DRS लगाए गए हैं। ये DRS एम्स, बीआइटी, आइजीआइएमएस, गर्दनीबाग, बाइपास सिपारा और फतुहा में स्थापित किए गए हैं। DRS एक तरह का गैस वितरण केंद्र होता है जहां से आसपास के इलाकों में पाइपलाइन के जरिए गैस भेजी जाती है।

गेल के अधिकारियों के अनुसार एक DRS के माध्यम से 30 से 35 हजार घरों में गैस आपूर्ति की जा सकती है। यानी पांच DRS से लगभग डेढ़ से दो लाख घरों को गैस दी जा सकती है। यह पटना शहर की एक बड़ी आबादी को कवर कर सकता है। वर्तमान में 28 हजार घरों में गैस जल रही है जबकि 50 हजार से अधिक लोगों के पास कनेक्शन हैं। यानी जिन लोगों के पास कनेक्शन है लेकिन अभी गैस नहीं आ रही है उनके घरों में पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है।

पूरे पटना में बढ़ रहा नेटवर्क

गेल इंडिया लगातार पटना में अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। एम्स से गांधी मैदान तक मुख्य पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। इस मुख्य लाइन से विभिन्न इलाकों में शाखा पाइपलाइनें निकाली गई हैं। पांच DRS के जरिए अलग अलग इलाकों में गैस भेजी जा रही है। पटना के कई इलाकों में पहले से ही पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है। अब गर्दनीबाग में भी यह शुरू हो गई है।

आने वाले समय में और भी इलाकों में यह सुविधा पहुंचाई जाएगी। नौबतपुर से बिहटा की ओर भी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। आइआइटी पटना में भी DRS लगाने की योजना है। इससे उस इलाके में भी पीएनजी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। गेल का लक्ष्य है कि पटना के अधिकतर इलाकों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध हो। यह न केवल लोगों को सस्ती गैस देगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है क्योंकि नेचुरल गैस साफ ईंधन है।

फतुहा में औद्योगिक आपूर्ति जल्द शुरू

फतुहा में स्थापित पीएनजी गैस डिस्पैच सेंटर से अब औद्योगिक इकाइयों को जल्द ही पाइप्ड नेचुरल गैस की आपूर्ति शुरू होने जा रही है। यह फतुहा के उद्योगों के लिए एक बड़ी राहत होगी। तकनीकी जांच और पाइपलाइन टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि एक लाइसेंसिंग प्राधिकार से लाइसेंस मिलते ही अगले महीने से औद्योगिक उपभोक्ताओं को नियमित गैस आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

फतुहा पटना के पास एक औद्योगिक क्षेत्र है जहां कई छोटे और मध्यम आकार के उद्योग हैं। इन उद्योगों को ऊर्जा की बहुत जरूरत होती है। अब तक ये उद्योग एलपीजी सिलेंडर और डीजल पर निर्भर थे। एलपीजी सिलेंडर महंगे होते हैं और डीजल की कीमत भी काफी ज्यादा है। इसके अलावा डीजल का इस्तेमाल प्रदूषण भी फैलाता है। पीएनजी इन दोनों से सस्ती और साफ है।

उद्योगों की उत्पादन लागत होगी कम

वर्तमान में फतुहा और आसपास की कई फैक्ट्रियां एलपीजी सिलेंडर और डीजल पर निर्भर हैं। इससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ती है। जब उत्पादन लागत ज्यादा होती है तो मुनाफा कम होता है। कुछ उद्योगों को तो घाटा भी उठाना पड़ता है। पीएनजी उपलब्ध होने से न केवल लागत कम होगी बल्कि उद्योगों को सुरक्षित, स्वच्छ और लगातार मिलने वाला ऊर्जा स्रोत भी मिलेगा।

पीएनजी की कीमत एलपीजी और डीजल से काफी कम है। अनुमान है कि पीएनजी के इस्तेमाल से उद्योगों की ऊर्जा लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। यह एक बड़ी बचत है जो उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगी। साथ ही पीएनजी की आपूर्ति लगातार होती रहती है इसलिए उत्पादन में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी। डीजल या सिलेंडर खत्म होने पर काम रुक जाता है लेकिन पीएनजी में ऐसी समस्या नहीं होती।

पर्यावरण के लिए भी बेहतर

पीएनजी एक साफ ईंधन है। इसके जलने से डीजल या कोयले की तुलना में बहुत कम प्रदूषण होता है। नेचुरल गैस में कार्बन की मात्रा कम होती है और इसमें सल्फर नहीं होता। इसलिए इससे सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें नहीं निकलती। कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी अन्य जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कम होता है। यह पर्यावरण के लिए बेहतर है।

जब फतुहा के उद्योग पीएनजी का इस्तेमाल करने लगेंगे तो वहां का वायु प्रदूषण कम होगा। यह क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी यह मदद करेगा। सरकार भी साफ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएनजी इसी दिशा में एक कदम है। उद्योगों को सस्ती ऊर्जा मिलेगी और पर्यावरण की भी रक्षा होगी।

सुरक्षित ऊर्जा स्रोत

पीएनजी एक सुरक्षित ऊर्जा स्रोत भी है। एलपीजी सिलेंडर में हमेशा रिसाव या विस्फोट का खतरा रहता है। हर साल सिलेंडर विस्फोट से कई दुर्घटनाएं होती हैं। डीजल को स्टोर करना और उसे संभालना भी जोखिम भरा होता है। डीजल आसानी से आग पकड़ लेता है। पीएनजी में ये खतरे बहुत कम हैं। पाइपलाइन के जरिए गैस आती है जिसमें रिसाव की संभावना बहुत कम होती है।

पीएनजी में एक खास गंध मिलाई जाती है ताकि अगर कहीं रिसाव हो तो तुरंत पता चल जाए। आधुनिक पीएनजी सिस्टम में सुरक्षा के कई उपाय होते हैं। ऑटोमेटिक शटऑफ वाल्व लगे होते हैं जो किसी समस्या की स्थिति में गैस की आपूर्ति बंद कर देते हैं। इसलिए उद्योगों के लिए पीएनजी एक सुरक्षित विकल्प है। कर्मचारियों को भी सुरक्षित माहौल में काम करने का मौका मिलेगा।

नौबतपुर से बिहटा तक पाइपलाइन

गेल के महाप्रबंधक ने बताया कि नौबतपुर से छह इंच की पाइपलाइन बिहटा की ओर ले जाई जा रही है। इससे उस इलाके में गैस आपूर्ति की जा सकेगी। इसके लिए आइआइटी पटना में DRS लगाए जाएंगे। आइआइटी प्रबंधन से इस बारे में बातचीत की जा रही है। आइआइटी एक बड़ा संस्थान है जहां बहुत सारी ऊर्जा की खपत होती है। वहां पीएनजी की सुविधा मिलने से उनकी लागत कम होगी।

इसके बाद उसी DRS से विभिन्न औद्योगिक यूनिटों में आपूर्ति की जा सकेगी। बिहटा क्षेत्र में भी कई उद्योग हैं। उन्हें भी पीएनजी की सुविधा मिलेगी। साथ ही आसपास के आवासीय क्षेत्रों में भी धीरे धीरे पीएनजी पहुंचाई जाएगी। यह पटना के दक्षिणी हिस्से के विकास में मदद करेगा। एक बार पाइपलाइन नेटवर्क बन जाने के बाद उसका विस्तार करना आसान हो जाता है।

28 हजार घरों में जल रही गैस

वर्तमान में पटना में 28 हजार घरों में पीएनजी की गैस जल रही है। यह एक अच्छी संख्या है लेकिन अभी और भी बहुत काम बाकी है। 50 हजार से अधिक लोगों के पास कनेक्शन हैं। यानी करीब 22 हजार लोगों के पास कनेक्शन तो है लेकिन उनके घरों में अभी गैस की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके घरों तक पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। जैसे जैसे यह काम पूरा होगा वैसे वैसे और लोग गैस का इस्तेमाल करने लगेंगे।

गेल की टीम तेजी से काम कर रही है। रोजाना कई घरों में कनेक्शन दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। जब गर्दनीबाग जैसे नए इलाकों में आपूर्ति शुरू होगी तो हजारों नए परिवारों को यह सुविधा मिलेगी। साथ ही फतुहा में औद्योगिक आपूर्ति शुरू होने से वहां के कई उद्योग भी पीएनजी का इस्तेमाल करने लगेंगे। यह बिहार के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।

पीएनजी के फायदे

पाइप्ड नेचुरल गैस के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एलपीजी सिलेंडर से सस्ती होती है। एक आम परिवार महीने में हजार से डेढ़ हजार रुपये की बचत कर सकता है। सालाना यह बचत 12 से 18 हजार रुपये तक हो सकती है। यह एक बड़ी रकम है। दूसरा बड़ा फायदा सुविधा है। सिलेंडर मंगवाने और बदलने की झंझट नहीं होती। गैस लगातार मिलती रहती है।

तीसरा फायदा सुरक्षा है। पीएनजी में रिसाव और विस्फोट का खतरा बहुत कम होता है। चौथा फायदा पर्यावरण को है। यह साफ ईंधन है जो कम प्रदूषण फैलाता है। पांचवां फायदा यह है कि इसकी आपूर्ति भरोसेमंद है। बिजली या सिलेंडर की तरह इसमें कटौती या कमी की समस्या नहीं होती। छठा फायदा यह है कि गैस का बिल मीटर रीडिंग के आधार पर आता है इसलिए आप जितना इस्तेमाल करते हैं उतना ही भुगतान करते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया

जो लोग पीएनजी कनेक्शन लेना चाहते हैं वे गेल इंडिया की वेबसाइट पर जाकर या उनके कार्यालय में संपर्क करके आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया बहुत सरल है। जरूरी दस्तावेज जैसे पहचान पत्र, पते का प्रमाण और घर के कागजात देने होते हैं। आवेदन के बाद गेल की टीम आपके घर का सर्वे करती है। अगर आपके इलाके में पाइपलाइन है या जल्द ही आने वाली है तो आपको कनेक्शन दे दिया जाता है।

कनेक्शन के लिए एक निश्चित शुल्क देना होता है। इसमें पाइपलाइन बिछाने और मीटर लगाने का खर्च शामिल होता है। एक बार कनेक्शन मिल जाने के बाद आपके घर में पाइपलाइन बिछाई जाती है और मीटर लगाया जाता है। फिर गैस की आपूर्ति शुरू हो जाती है। हर महीने मीटर रीडिंग ली जाती है और उसके आधार पर बिल बनता है। बिल का भुगतान ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जा सकता है।

Bihar News: भविष्य की योजनाएं

गेल इंडिया बिहार में अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। पटना के बाद राज्य के अन्य शहरों में भी पीएनजी पहुंचाने की योजना है। गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों में भी काम शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में बिहार के लाखों घरों और हजारों उद्योगों को पीएनजी की सुविधा मिलेगी। यह न केवल लोगों और उद्योगों के लिए फायदेमंद होगा बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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